ईरान को लेकर अमेरिका ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक एक्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने का रास्ता साफ हो गया है. व्हाइट हाउस के मुताबिक, इस आदेश के तहत अमेरिका ऐसे देशों से आयात होने वाले सामान पर 25 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगा सकता है.
व्हाइट हाउस के मुताबिक, इस आदेश के जरिए ईरान को लेकर राष्ट्रीय आपात स्थिति को फिर से लागू किया गया है और ऐसा प्रावधान किया गया है, जिससे ईरान से सीधे या परोक्ष रूप से सामान या सेवाएं खरीदने वाले देशों पर टैरिफ लगाया जा सके. आदेश के प्रभावी होने की तारीख से अमेरिका किसी भी ऐसे देश से आयात होने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त एड वैलोरम ड्यूटी लगा सकता है.
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कदम अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए उठाया गया है. व्हाइट हाउस के अनुसार, इस व्यवस्था के तहत राष्ट्रपति को यह अधिकार भी होगा कि यदि हालात बदलते हैं, जवाबी कार्रवाई होती है या ईरान अथवा संबंधित देश अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और आर्थिक हितों के अनुरूप 'महत्वपूर्ण कदम' उठाते हैं, तो टैरिफ में बदलाव किया जा सके.
इस एक्जीक्यूटिव ऑर्डर के तहत अमेरिकी विदेश मंत्री, वाणिज्य मंत्री और यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव को टैरिफ व्यवस्था और उससे जुड़े अन्य कदमों को लागू करने के लिए सभी जरूरी कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है. इसमें नियम और दिशानिर्देश जारी करना भी शामिल है.
व्हाइट हाउस ने कहा कि यह कदम ईरान के 'दुर्भावनापूर्ण प्रभाव' से निपटने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है. अमेरिका ने ईरान पर परमाणु क्षमता हासिल करने की कोशिश, आतंकवाद को समर्थन देने, बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम चलाने और क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाने के आरोप लगाए हैं. प्रशासन का कहना है कि ईरान मध्य पूर्व में प्रॉक्सी आतंकी समूहों का समर्थन करता है, अपने ही नागरिकों का दमन करता है और घरेलू जरूरतों की बजाय संसाधनों को परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों में झोंक रहा है.
व्हाइट हाउस के मुताबिक, ये गतिविधियां अमेरिका, उसके सहयोगियों और उसके हितों के लिए 'असामान्य और असाधारण खतरा' हैं, जिसके लिए लगातार और ज्यादा सख्त प्रतिक्रिया की जरूरत है. यह आदेश राष्ट्रपति ट्रंप की ईरान को लेकर लंबे समय से चली आ रही सख्त नीति का ही विस्तार है. अपने पहले कार्यकाल में ट्रंप ने ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका को बाहर निकाला था, 'मैक्सिमम प्रेशर' प्रतिबंध दोबारा लागू किए थे और ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को विदेशी आतंकी संगठन घोषित किया था.
राष्ट्रपति पद पर दोबारा लौटने के बाद ट्रंप ने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए मैक्सिमम प्रेशर नीति फिर से लागू कर दी है. व्हाइट हाउस ने हाल के अमेरिकी सैन्य और कूटनीतिक कदमों का भी जिक्र किया, जिनमें ईरान के परमाणु ढांचे को निशाना बनाने वाले ऑपरेशन और क्षेत्र में अतिरिक्त अमेरिकी सैन्य बलों की तैनाती शामिल है. इन कदमों का मकसद ईरान पर दबाव बनाकर उसे ऐसे समझौते के लिए मजबूर करना है, जिससे उसकी परमाणु महत्वाकांक्षाएं हमेशा के लिए खत्म हो सकें.
इस बीच, अमेरिकी सरकार ने ईरान को लेकर एक सुरक्षा अलर्ट भी जारी किया है. इसमें कड़े सुरक्षा इंतजाम, इंटरनेट बाधाएं, उड़ानों के रद्द होने और देशभर में संचार प्रतिबंधों की चेतावनी दी गई है. एडवाइजरी में अमेरिकी नागरिकों से कहा गया है कि अगर सुरक्षित हो तो वे तुरंत ईरान छोड़ दें, किसी भी प्रदर्शन से दूर रहें, लो-प्रोफाइल बनाए रखें और लंबे समय तक व्यवधान के लिए तैयार रहें.
अमेरिका और ईरान के बीच फिलहाल कोई राजनयिक या कांसुलर संबंध नहीं हैं. व्हाइट हाउस ने बताया कि स्विट्जरलैंड, तेहरान स्थित अपने दूतावास के जरिए ईरान में अमेरिकी हितों की रक्षा करने वाली शक्ति के तौर पर काम करता है.