scorecardresearch
 

टॉप अफसरों संग ट्रंप का 45 मिनट का 'वॉर रूम' सेशन, ईरान पर अंतिम प्रहार की तैयारी

तनाव के बीच अमेरिका ने कई सैन्य और रणनीतिक विकल्प तैयार किए हैं, जिनसे दबाव बनाकर समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है. हालात ऐसे हैं कि बातचीत और टकराव दोनों साथ-साथ चल रहे हैं. आने वाले समय में स्थिति किस दिशा में जाएगी, यह अहम रहेगा.

Advertisement
X
सेंटकॉम ने ईरान पर निर्णायक हमले से पहले ट्रंप को पूरी जानकारी दी. (Photo: AP)
सेंटकॉम ने ईरान पर निर्णायक हमले से पहले ट्रंप को पूरी जानकारी दी. (Photo: AP)

मिडिल-ईस्ट में एक बार फिर तनाव बढ़ने के आसार हैं. बढ़ते तनाव के बीच 'यूएस सेंट्रल कमांड' (CENTCOM)' द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई (Final Blow) के विकल्पों पर विस्तार से ब्रीफिंग दी है. इस ब्रीफिंग से साफ संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन अब कूटनीति के साथ-साथ सैन्य दबाव को भी तेज करने के मूड में है.

अधिकारियों के मुताबिक, इस 45 मिनट की लंबी ब्रीफिंग में ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई की नई और आक्रामक योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई है. अमेरिकी सैन्य योजनाकार इस बात के लिए भी तैयार हैं कि यदि अमेरिका नाकाबंदी या हमला करता है, तो ईरान क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सेना पर पलटवार कर सकता है. इस हाई-लेवल ब्रीफिंग में ज्वाइंट चीफ्स के चेयरमैन जनरल डैन केन भी मौजूद रहे, जो इस बात का संकेत है कि अमेरिका बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई के लिए गंभीरता से विचार कर रहा है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, CENTCOM ने ट्रंप के सामने 'शॉर्ट एंड इंटेंस' यानी कम समय में तेज-सटीक हमलों की रणनीति रखी है, जिसमें ईरान के अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया जा सकता है. इसका उद्देश्य यह है कि ईरान को मजबूर किया जाए कि वह परमाणु मुद्दे को लेकर अपने रूख में नरमी दिखाए और वापस बातचीत की मेज पर लौटे.

Advertisement

जब पत्रकारों ने राष्ट्रपति ट्रंप से ईरान के साथ संभावित बातचीत के बारे में पूछा, तो उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज में जवाब दिया. ट्रंप ने कहा, 'वे (ईरान) छिपे बैठे हैं और समझौता चाहते हैं...' ट्रंप के इस बयान से साफ है कि अमेरिका अब ईरान पर अधिकतम दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है.

यह भी पढ़ें: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा- ब्लॉकेड बर्दाश्त से बाहर

CENTCOM द्वारा सुझाए गए विकल्पों में हाइपरसोनिक 'डार्क ईगल' मिसाइलों की तैनाती भी शामिल है, जो तेज और सटीक हमलों के लिए जानी जाती हैं. इसके अलावा, एक अहम विकल्प होर्मुज के कुछ हिस्सों पर नियंत्रण स्थापित करने का भी है, ताकि वैश्विक व्यापारिक जहाजों की आवाजाही सुचारू रखी जा सके. हालांकि इस तरह के ऑपरेशन में जमीनी सेना की तैनाती भी शामिल हो सकती है, जिससे टकराव और बढ़ने का खतरा है.

एक अन्य रणनीतिक प्रस्ताव में ईरान के उच्च स्तर के संवर्धित यूरेनियम के भंडार को सुरक्षित करने के लिए विशेष बलों की कार्रवाई का सुझाव भी शामिल है. यह कदम ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीधे प्रभावित कर सकता है और वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है.

ईरान की तैयारी

इस बीच, ईरान की राजधानी तेहरान में में गुरुवार रात एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय होने की खबरें आईं. ईरानी मीडिया 'तसनीम' और 'फ़ार्स' के अनुसार, ये सिस्टम छोटे ड्रोन या टोही विमानों को मार गिराने के लिए सक्रिय हुए थे. हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि यह केवल अभ्यास था या वास्तविक खतरे के जवाब में उठाया गया कदम था.  

Advertisement

यह भी पढ़ें: 'तेल का एक भी कुआं नहीं फटा', 120 डॉलर हुआ क्रूड तो ईरान ने उड़ाया ट्रंप का मजाक!

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) को एक प्रभावी विकल्प मान रहा है, जो सीधे हमले की तुलना में कम जोखिम भरा लेकिन ज्यादा असरदार दबाव बना सकता है. हालांकि अमेरिकी सैन्य योजनाकार इस बात के लिए भी तैयार हैं कि ईरान जवाबी कार्रवाई कर सकता है, जिससे पूरे क्षेत्र में संघर्ष और भड़क सकता है.

कुल मिलाकर, मौजूदा हालात यह संकेत देते हैं कि अमेरिका एक दोहरी रणनीति पर काम कर रहा है, जहां एक तरफ बातचीत के रास्ते खुले रखे जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ सैन्य विकल्पों को भी पूरी तरह तैयार रखा गया है. आने वाले दिन यह तय करेंगे कि यह टकराव कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ेगा या बड़े सैन्य संघर्ष में बदल जाएगा.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement