दक्षिण लेबनान की पहाड़ियों से आई ताजा रिपोर्ट इजरायली सैन्य अभियानों की एक चौंकाने वाली तस्वीर पेश करती है. गैलील पर्वतमाला और रिजलाइन के एक ही धुरी पर स्थित दो पड़ोसी कस्बों में युद्ध का असर बिल्कुल अलग-अलग दिखाई दे रहा है.
आजतक की टीम दक्षिण लेबनान में मौजूद है और वहां से सामने आई तस्वीरों में कंक्रीट की दीवारों के पीछे से देखने पर दो पहाड़ियां नजर आती हैं. एक तरफ तबाही का मंजर है, तो दूसरी तरफ इमारतें पूरी तरह सुरक्षित हैं.
कफ्र किला सीमा पर स्थित वो कस्बा है, जहां ज्यादातार इमारतें तबाह हो चुकी हैं. वहीं, कफ्र क्लेह ऐसा कस्बा है जहां ज्यादातर घर और इमारतें आज भी सही-सलामत खड़ी हैं.
मुस्लिम बहुल क्षेत्र है कफ्र किला
कफ्र किला और कफ्र क्लेह कस्बों के बीच भौगोलिक तौर पर कोई बड़ा अंतर नहीं है. इनके बीच इकलौता बड़ा अंतर वहां रहने वाले लोगों की धार्मिक पहचान है. कफ्र किला के बारे में कहा जाता है कि ये एक मुस्लिम बहुल क्षेत्र है. यहां की गलियों और इमारतों पर अरबी भाषा के साइनबोर्ड देखे जा सकते हैं, जो इस क्षेत्र की पहचान को उजागर करते हैं.
इस इलाके में युद्ध की मार सबसे ज्यादा देखने को मिली है. हमलों की वजह से यहां की इमारतें मलबे में तब्दील हो गई हैं.
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वहीं दूसरी ओर, कफ्र क्लेह एक अरब ईसाई कस्बा है. दूर से देखने पर ही इस टाउन में एक बड़े पवित्र क्रॉस की संरचना दिखाई देती है, जो इस कस्बे की पहचान है. कफ्र किला के मुकाबले यहां की स्थिति बिल्कुल सामान्य दिखती है और इमारतें मलबे का ढेर बनने से बच गई हैं.
तबाही और सुरक्षा का कंट्रास्ट
विजुअल्स में ये साफ देखा जा सकता है कि कैसे एक ही रिजलाइन पर होने के बावजूद, इन दोनों क्षेत्रों ने इजरायली ऑपरेशन के दौरान अलग-अलग परिणाम भुगते हैं. जहां एक तरफ अरबी साइनबोर्ड वाली गलियां खंडहर बन गई हैं, वहीं दूसरी तरफ पवित्र क्रॉस वाला कस्बा लगभग अछूता खड़ा है.