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इजरायल का नाम लेते हुए सऊदी अरब की अमेरिका को दो टूक

बीते साल 7 अक्टूबर को हमास की ओर से इजरायल पर किए गए हमले से पहले इजरायल और सऊदी अरब के नेताओं ने यह संकेत दिया था कि वे राजनयिक संबंध स्थापित करने की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं. लेकिन इस हमले के बाद सऊदी अरब ने इजरायल के साथ रिश्ते बहाल करने की अमेरिकी योजनाओं को ठंडे बस्ते में डाल दिया है.

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अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (फाइल फोटो)
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (फाइल फोटो)

इजरायल और हमास में जारी जंग के बीच सऊदी अरब ने इजरायल से राजनयिक संबंध स्थापित करने के अमेरिकी प्रयास को लेकर दो टूक कही है. सऊदी अरब ने अमेरिका को स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इजरायल के साथ वह राजनयिक संबंध तब तक स्थापित नहीं करेगा जब तक कि 1967 की सीमाओं के आधार पर आजाद फिलिस्तीन का गठन नहीं हो जाता है. 

सऊदी अरब और इजरायल के बीच रिश्ते बहाल करने में अमेरिका अहम भूमिका निभा रहा है. यहां तक कि दोनों देशों के बीच रिश्ते सामान्यीकरण को लेकर बातचीत शुरू भी हो गई थी. लेकिन अक्टूबर में इजरायल और गाजा के बीच जंग छिड़ने के बाद सऊदी अरब ने इजरायल के साथ रिश्ते बहाल करने की अमेरिकी योजनाओं को ठंडे बस्ते में डाल दिया है. 

सऊदी अरब की सरकारी न्यूज एजेंसी सऊदी गैजेट के अनुसार, सऊदी अरब ने अमेरिका को यह स्पष्ट कर दिया है कि फिलिस्तीन मुद्दे पर जरूरी कदम उठाए बिना वह इजरायल के साथ राजनयिक संबंध स्थापित नहीं करेगा. 

आजाद फिलिस्तीन देश की मांग करता रहा है सऊदी अरब

सऊदी अरब इजरायल द्वारा कब्जा किए गए क्षेत्रों में से एक अलग देश फिलिस्तीन का समर्थन करता है, जिसकी राजधानी पूर्वी यरुशलम हो. इसके अलावा सऊदी अरब ने गाजा पट्टी में इजरायल की ओर से जारी हमले को भी रोकने की अपील की है. इजरायल के साथ भविष्य में किसी भी राजनयिक संबंध स्थापित करने के संबंध में सऊदी अरब ने इजरायली कब्जे वाली सेनाओं की वापसी पर जोर दिया है. 

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सऊदी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि फिलिस्तीन मुद्दे पर सऊदी अरब की स्थिति पहले की तरह ही स्पष्ट है. सऊदी अरब फिलिस्तीनी लोगों को उनके अधिकार प्राप्त करने की जरूरत पर जोर देता है. 

अरब-इजरायल शांति समझौते को लेकर सऊदी अरब और अमेरिका के बीच जारी बातचीत के दृष्टिकोण से सऊदी सरकार की ओर से जारी यह बयान महत्वपूर्ण हो जाता है. हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता ने इस पर टिप्पणी की थी. सऊदी अरब की यह टिप्पणी मिडिल ईस्ट की राजनीति के लिए भी बहुत अहम है. फिलिस्तीन मुद्दे को लेकर सऊदी अरब अपनी प्रतिबद्धता को लेकर स्पष्ट है. सऊदी अरब ने यह भी कहा है कि फिलिस्तीन मुद्दे के सामाधान के बाद ही क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता आएगी.

सऊदी अरब ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और खास कर सुरक्षा परिषद से अपील करते हुए कहा है कि जिन्होंने अभी तक फिलिस्तीन को मान्यता नहीं दी है, वो आजाद फिलिस्तीन को मान्यता दें. सऊदी अरब 1967 की सीमाओं के आधार पर पूर्वी यरुशलम को इसकी राजधानी के रूप में त्वरित मान्यता की वकालत करता है. जिसका उद्देश्य फिलिस्तीनी लोगों को उनके वैध अधिकार प्राप्त करने और एक व्यापक शांति सुनिश्चित करने के लिए सशक्त बनाना है.

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आजाद फिलिस्तीन देश से ही शांति संभवः सऊदी विदेश मंत्री

दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच के दौरान भी सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने कहा था कि हम इस बात से सहमत हैं कि क्षेत्रीय शांति में इजरायल की शांति भी शामिल है. लेकिन यह केवल फिलिस्तीनियों के लिए एक अलग फिलिस्तीन देश के माध्यम से ही संभव है. 

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