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तेल के खजाने पर बैठे सऊदी अरब का भी हाल बेहाल, होर्मुज संकट के बीच पहली बार ये कदम उठाने को मजबूर

दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातकों में शामिल सऊदी अरब इन दिनों खुद ईंधन संकट जैसी स्थिति से जूझ रहा है. होर्मुज संकट और गैस उत्पादन में गिरावट के कारण सऊदी अरब को अब बिजली बनाने के लिए पहले से ज्यादा फ्यूल ऑयल आयात करना पड़ रहा है.

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सऊदी अरब में गैस उत्पादन कम हुआ है. (Photo- ITG)
सऊदी अरब में गैस उत्पादन कम हुआ है. (Photo- ITG)

दुनियाभर को कच्चा तेल बेचने वाला सऊदी अरब अब खुद ईंधन आयात बढ़ाने को मजबूर हो गया है. मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट संकट के बीच सऊदी अरब को बिजली उत्पादन के लिए पहले से कहीं ज्यादा फ्यूल ऑयल खरीदना पड़ रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह प्राकृतिक गैस उत्पादन में आई गिरावट को माना जा रहा है.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रिसर्च फर्म रिस्टैड एनर्जी ने कहा कि सऊदी अरब का गैस उत्पादन घटने लगा है, जिसकी वजह से देश को बिजली बनाने के लिए वैकल्पिक ईंधन की जरूरत पड़ रही है. यही कारण है कि फ्यूल ऑयल इंपोर्ट में अचानक बड़ा उछाल देखने को मिला है.

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डेटा फर्म वोर्टेक्सा के आंकड़ों की मानें तो, पिछले महीने सऊदी अरब ने औसतन 3 लाख 60 हजार बैरल प्रतिदिन फ्यूल ऑयल आयात किया. यह पिछले साल के मुकाबले करीब 86 फीसदी ज्यादा है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह संकेत है कि आने वाले महीनों में सऊदी अरब बिजली उत्पादन के लिए ज्यादा तेल जलाने वाला है.

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सऊदी को तेल उत्पादन में करनी पड़ी कटौती

होर्मुज स्ट्रेट पर जारी तनाव का असर सीधे सऊदी के उत्पादन पर पड़ा है. दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक और OPEC के सबसे ताकतवर सदस्य सऊदी अरब को अपने तेल उत्पादन में कटौती करनी पड़ी है. अनुमान है कि रोजाना 30 लाख बैरल से ज्यादा तेल उत्पादन प्रभावित हुआ है. कच्चे तेल के साथ निकलने वाली प्राकृतिक गैस की सप्लाई भी इससे कम हुई है.

गर्मी के मौसम में सऊदी अरब और पूरे खाड़ी क्षेत्र में एयर कंडीशनर की मांग तेजी से बढ़ जाती है. ऐसे में बिजली की खपत भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचती है. रिस्टैड एनर्जी के ऑयल एंड गैस रिसर्च प्रमुख राहुल चौधरी के मुताबिक, इस साल बिजली उत्पादन के लिए फ्यूल ऑयल और क्रूड ऑयल की खपत 10 लाख बैरल प्रतिदिन से ऊपर जा सकती है.

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फ्यूल ऑयल पर निर्भरता कम करने की कोशिश में सऊदी

सऊदी अरब पिछले कई सालों से अपनी ऊर्जा रणनीति बदलने की कोशिश कर रहा है. वह बिजली उत्पादन में फ्यूल ऑयल पर निर्भरता कम करके प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल बढ़ाना चाहता है. इसी दिशा में उसका सबसे बड़ा प्रोजेक्ट जाफुराह गैस फील्ड है, जिस पर करीब 100 अरब डॉलर खर्च किए जा रहे हैं.

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जाफुराह को अमेरिका के बाहर दुनिया का सबसे बड़ा अनकन्वेंशनल गैस प्रोजेक्ट माना जाता है. अनुमान है कि इसमें 229 ट्रिलियन क्यूबिक फीट प्राकृतिक गैस और 75 अरब बैरल कंडेन्सेट मौजूद है. हालांकि यह प्रोजेक्ट पूरी क्षमता से 2030 तक ही काम कर पाएगा.

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