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तबाह हो चुके परमाणु ठिकानों पर ईरान की किलेबंदी, नई सैटेलाइट तस्वीरों ने बढ़ाई US-इजरायल की टेंशन

सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि इजरायल और अमेरिका के हमलों के बाद ईरान ने नतांज और इस्फ़हान परमाणु ठिकानों पर नई छतें बनाई हैं. विशेषज्ञों को आशंका है कि ईरान बची परमाणु सामग्री को छिपाने या निकालने की कोशिश कर रहा है.

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प्लैनेट लैब्स पीबीसी द्वारा ली गई यह सैटेलाइट तस्वीर 28 जनवरी 2026 की है जिसमें ईरान के नतांज परमाणु संवर्धन केंद्र को नई छत से ढका गया है. (Planet Labs PBC via AP)
प्लैनेट लैब्स पीबीसी द्वारा ली गई यह सैटेलाइट तस्वीर 28 जनवरी 2026 की है जिसमें ईरान के नतांज परमाणु संवर्धन केंद्र को नई छत से ढका गया है. (Planet Labs PBC via AP)

पिछले साल इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए भीषण हवाई हमलों के बाद, ईरान के परमाणु ठिकानों पर फिर से हलचल देखी जा रही है. ताजा सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि ईरान ने अपने दो प्रमुख परमाणु केंद्रों- इस्फ़हान और नतांज में क्षतिग्रस्त ढांचों के ऊपर नई छतें (रूफ स्ट्रक्चर) और कवर बना लिए हैं.

प्लैनेट लैब्स पीबीसी (Planet Labs PBC) द्वारा जारी हालिया सैटेलाइट तस्वीरों के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय में यह आशंका गहराने लगी है कि तेहरान शायद हमलों के बाद बचे हुए संवेदनशील परमाणु संसाधनों को छिपाने या फिर से हासिल करने की कोशिश कर रहा है.

 जून में इजरायल और ईरान के बीच हुए 12-दिवसीय युद्ध के बाद से यह पहला बड़ा निर्माण कार्य है, जो किसी भी बमबारी-प्रभावित परमाणु स्थल पर देखा गया है.

सैटेलाइट निगरानी पर पर्दा डालने की कोशिश?

नई छतों के कारण सैटेलाइट्स के लिए ज़मीन पर हो रही गतिविधियों को देख पाना मुश्किल हो गया है. यह बात इसलिए भी अहम है क्योंकि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को देश में प्रवेश की अनुमति नहीं दी है. ऐसे में दूरस्थ निगरानी (रिमोट मॉनिटरिंग) ही निगरानी का एकमात्र साधन बचा है.

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 विशेषज्ञों का मानना है कि इन छतों का उद्देश्य किसी नए परमाणु निर्माण से अधिक, मलबे के नीचे दबे संवेदनशील उपकरणों और यूरेनियम के भंडार को दुनिया की नजरों से छिपाकर निकालना (Salvage Operation) हो सकता है. फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज की एंड्रिया स्ट्रिकर के अनुसार, ईरान यह सुनिश्चित करना चाहता है कि इजरायल या अमेरिका यह न देख सकें कि उनके हमलों में क्या-क्या बचा रह गया है.

नतांज और इस्फहान: क्यों हैं अहम?

नतांज, जो तेहरान से लगभग 220 किलोमीटर दूर है, ईरान का सबसे प्रमुख यूरेनियम संवर्धन केंद्र रहा है, जहां 60% तक संवर्धित यूरेनियम तैयार किया जाता था. जून में इज़राइल ने यहां की जमीन के ऊपर स्थित मुख्य संवर्धन इकाई को नष्ट कर दिया था, जबकि बाद में अमेरिका ने भूमिगत हिस्सों पर बंकर-बस्टर बमों से हमला किया.

सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि दिसंबर में नतांज में नई छत का निर्माण शुरू हुआ और महीने के अंत तक पूरा कर लिया गया, हालांकि वहां की बिजली प्रणाली अब भी निष्क्रिय बताई जा रही है.

इस्फ़हान में भी जनवरी की शुरुआत में इसी तरह की छत बनाई गई. इजरायली सेना का कहना था कि यहां हमले सेंट्रीफ्यूज निर्माण से जुड़ी इकाइयों पर किए गए थे. इसके अलावा, कुछ सुरंगों को मिट्टी से भरते और एक सुरंग को दोबारा मजबूत करते हुए भी देखा गया है. तस्वीरों में नतांज के पास पिकैक्स माउंटेन नाम की जगह पर लगातार खुदाई भी दिख रही है, जहां एनालिस्ट्स का मानना ​​है कि ईरान एक नई अंडरग्राउंड न्यूक्लियर फैसिलिटी बना रहा होगा.

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मिसाइल कार्यक्रम पर भी काम तेज

सैटेलाइट तस्वीरें यह भी दिखाती हैं कि ईरान अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम से जुड़े ठिकानों पर भी दोबारा काम शुरू कर चुका है. तेहरान के पास स्थित पारचिन सैन्य परिसर में ‘तालेघान-2’ नामक स्थल को फिर से विकसित किया जा रहा है, जिसे पहले परमाणु हथियारों से जुड़े विस्फोटक परीक्षणों से जोड़ा गया था. विश्लेषकों का कहना है कि यह स्थल अब पहले से ज्यादा मजबूत और हमलों के प्रति प्रतिरोधी बनाया जा रहा है.

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ईरान का दावा, पश्चिम की शंका

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तेहरान द्वारा देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों पर हिंसक कार्रवाई का हवाला देते हुए, अमेरिकी सैन्य हमलों से बचने के लिए ईरान से अपने परमाणु कार्यक्रम पर एक समझौते पर बातचीत करने की बार-बार मांग कर रहे हैं.  अमेरिका ने विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन और कई गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर को मध्य पूर्व में भेज दिया है.

वही ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है. हालांकि पश्चिमी देशों और IAEA का कहना है कि 2003 तक ईरान के पास संगठित परमाणु हथियार कार्यक्रम था और आज भी उसके पास बम बनाने की तकनीकी क्षमता मौजूद है.
 

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