अमेरिका और इजरायल की मिसाइलें और बम ईरान पर बरस रहे हैं, वहीं ईरान भी इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर हमले कर रहा है. इस तनावपूर्ण हालात के बीच रूस ने अब तक मिडिल ईस्ट के समर्थन में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है और केवल नाराजगी भरे बयान दिए हैं. माना जा रहा है कि इसके पीछे रूस का यूक्रेन पर फोकस हो सकता है.
रूस का यह सतर्क रुख राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के यूक्रेन पर फोकस से जुड़ा माना जा रहा है. बताया जा रहा है कि ईरान में जारी युद्ध रूस के लिए अप्रत्यक्ष रूप से फायदेमंद साबित हो सकता है. तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और यूक्रेन के लिए पश्चिमी समर्थन में कमी रूस को लाभ पहुंचा सकती है.
युद्ध की वजह से स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज से गुजरने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही बाधित हुई है और खाड़ी देशों की ऊर्जा सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है. इसके चलते ऊर्जा की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे रूस को पहले से ही लाभ मिल रहा है.
चीन, जो ईरानी तेल का एक प्रमुख खरीदार है, संघर्ष बढ़ने की स्थिति में रूसी कच्चे तेल के आयात को बढ़ा सकता है. इसी बीच अमेरिका ने ईरान युद्ध के चलते भारत को समुद्र में फंसे रूसी तेल की खरीद के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट का ऐलान किया है. वहीं, अगर ईरान से आपूर्ति बाधित होती है तो तुर्की भी रूस से प्राकृतिक गैस का आयात बढ़ा सकता है.
अगर युद्ध और आगे बढ़ता है, तो यह अतिरिक्त कमाई मॉस्को के खजाने को मजबूत करने में मदद कर सकती है. इससे रूस को यूक्रेन में अपने सैन्य अभियानों के लिए फंड जुटाने में आसानी होगी और बजट घाटे को भी कुछ हद तक संतुलित किया जा सकेगा.
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माना जा रहा है कि रूस को यह भी उम्मीद है कि ईरान में जारी युद्ध दुनिया का ध्यान यूक्रेन से हटा देगा और पश्चिमी देशों के हथियार भंडार को कमजोर करेगा. यह अमेरिका और उसके NATO सहयोगियों को यूक्रेन के लिए अपनी सैन्य मदद घटाने पर मजबूर कर सकता है.
पुतिन ने ईरान पर हमले की निंदा की
पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन को संवेदना संदेश भेजा और पिछले हफ्ते ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनी की हत्या की निंदा करते हुए इसे मानव नैतिकता और अंतरराष्ट्रीय कानून के सभी मानकों का खुला और गंभीर उल्लंघन बताया.
बताया जा रहा है कि युद्ध शुरू होने के एक हफ्ते बाद पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति से फोन पर बातचीत की और कहा कि रूस चाहता है कि यह संघर्ष जल्द से जल्द खत्म हो.
पुतिन ने खाड़ी देशों के कई नेताओं से भी फोन पर बात की. माना जा रहा है कि यह कदम उन देशों के साथ रिश्ते मजबूत करने की कोशिश है, जो वैश्विक तेल कीमतों को नियंत्रित करने वाले OPEC+ समूह (Organization of the Petroleum Exporting Countries) में रूस के लिए जरूरी माने जाते हैं और पश्चिमी प्रतिबंधों से बचने में भी अहम व्यापारिक साझेदार हैं.
रूसी राजनीति के विशेषज्ञ Mark Galeott का कहना है कि मिडिल ईस्ट में रूस अब तक काफी प्रभावी ढंग से सक्रिय रहा है. जैसे-जैसे युद्ध आगे बढ़ेगा, क्षेत्र की कई शक्तियों के पास मॉस्को की ओर अधिक ध्यान देने या उसकी भूमिका पर भरोसा बढ़ने की संभावना है.
रूस कर रहा ईरान की मदद?
क्रेमलिन के प्रवक्ता Dmitry Peskov से जब यह पूछा गया कि क्या रूस केवल बयानबाजी से आगे बढ़कर ईरान को हथियार भी दे सकता है, तो Peskov ने कहा कि तेहरान की ओर से ऐसी कोई मांग मॉस्को को नहीं मिली है.
वहीं, इस बीच अमेरिकी खुफिया जानकारी से परिचित दो अधिकारियों ने बताया कि रूस ने ईरान को ऐसी जानकारी दी है, जिनसे तेहरान क्षेत्र में मौजूद अमेरिका के युद्धपोतों, विमानों और अन्य सैन्य संसाधनों को निशाना बनाने में मदद मिल सकती है.
क्रेमलिन के प्रवक्ता Dmitry Peskov ने कहा कि रूस ईरानी पक्ष और नेतृत्व के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर रहा है और यह संवाद आगे भी जारी रहेगा. जब उनसे पूछा गया कि युद्ध शुरू होने के बाद से क्या रूस ने ईरान को कोई सैन्य या खुफिया मदद दी है, तो उन्होंने इस सवाल पर टिप्पणी करने से परहेज किया.