अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग का आज 9वां दिन है. मिडिल ईस्ट के कई इलाकों में आज भी तनाव की स्थिति बनी हुई है. वहीं इस बीच दुबई के अधिकारियों के मुताबिक, अल बरशा इलाके में हुए ईरानी ड्रोन हमले की घटना में एक पाकिस्तानी नागरिक की मौत हो गई है.
यहां एक सफल हवाई इंटरसेप्शन के बाद श्रैपनेल (धातु का टुकड़ा) एक वाहन पर आ गिरा. इस घटना में पाकिस्तानी नागरिकता वाले एक निवासी की मौत हो गई.
ईरान ने दावा किया है कि उसने कई अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है. ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अपने बयान में कहा कि ऑपरेशन ‘ट्रू प्रॉमिस-4’ की 27वीं लहर, जिसे “या हैदर कर्रार” कोडनेम दिया गया था, इसमें अमेरिकी और जायनिस्ट ठिकानों को ड्रोन और मिसाइलों के संयुक्त हमले से अंजाम दिया गया.
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इस रणनीतिक और बहुआयामी ऑपरेशन में कब्जे वाले इलाकों के उत्तर में स्थित हाइफा में जायनिस्ट सेना के ठिकानों को IRGC की एयरोस्पेस फोर्स की नई सॉलिड-फ्यूल ‘खैबरशकन’ मिसाइलों से निशाना बनाया गया. इन मिसाइलों में सटीक लक्ष्य तक गाइडेंस की क्षमता है.
ड्रोन यूनिट्स ने भी “मरीना” इलाके में अमेरिकी सेना के मुख्यालय को निशाना बनाया, जो वार्नर ब्रदर्स कंपनी की इमारतों के बाहरी इलाके में स्थित है.
IRGC नौसेना ने पोर्ट सलमान में अमेरिकी 5वें बेड़े (फिफ्थ फ्लीट) और अमेरिकी सैन्य समर्थन ठिकानों को भी निशाना बनाया.
ह्यूमन शील्ड का सहारा
IRGC के मुताबिक मैदान से मिली जानकारी बताती है कि जायनिस्ट शासन अपने सैनिकों को बचाने के लिए कब्जे वाले इलाकों के उत्तरी और मध्य क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को रोककर “ह्यूमन शील्ड” की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है.
ईरान के हमलों के बाद क्षेत्र और कब्जे वाले इलाकों की स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है. IRGC का कहना है कि उसके सशस्त्र बलों की यूनिट्स अमेरिकी सैनिकों पर नजर रखते हुए व्यवस्थित तरीके से घात लगाने की रणनीति पर काम कर रही हैं.