"तेल लेना है ले लो, लेकिन हम डॉलर नहीं चाहते हैं, हमें युआन दे दें आप. ये एक बहुत बड़ा घटनाक्रम है. लेकिन चीन चुप है, रूस चुप है. मगर मेरा खयाल है कि सीक्रेटेली तो बड़े खुश होंगे."
ईरान के सीजफायर पर ये दावा पाकिस्तान के सीनियर जर्नलिस्ट नजम सेठी ने किया है. पाकिस्तान के न्यूज चैनल दुनिया न्यूज पर प्रसारित होने वाले इस कार्यक्रम में पाकिस्तान के स्तंभकार नजम सेठी ने कहा है कि ईरान ने डील में होर्मुज से होकर गुजरने वाले जहाजों से पेमेंट लेने की बात करके कूटनीतिक सयानेपन का परिचय दिया है.
नजम सेठी ने कहा कि इससे भी बड़ी बात ईरान का यह कहना कि होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को पेमेंट युआन या रूबल में करना होगा. युआन चीन की मुद्रा है जबकि रूबल रूस की मुद्रा.
पाकिस्तानी पत्रकार ने सीजफायर डील की हकीकत बताते हुए कहा कि ईरान ने जो नया ड्रामा किया है वो फैन्टास्टिक है. ये स्ट्रोक ऑफ पॉलिटिकल जीनियस है.
आगे उन्होंने कहा, "ईरान ने यह कह दिया है कि हम होर्मुज से जहाजों को क्रॉस करने देंगे, अगर साउथ कोरिया, जापान को तेल खरीदना है तो हम जाने देंगे. लेकिन हमें जो पेमेंट करनी है यो युआन में करें, डॉलर में नहीं."
पाकिस्तान के दिग्गज पत्रकार नजम सेठी ने कहा कि ये बहुत बड़ी बात है. ये एक मास्टर स्ट्रोक है. नजम सेठी ने कहा कि ब्रिक्स देश लंबे समय से अपनी करेंसी पर बात कर रहे हैं. वहां चर्चा इस बात पर हो रही है कि कैसे डॉलर को पीछे धकेला जाए और युआन और रूबल को आगे बढ़ाया जाए. क्योंकि अब दुनिया बहुध्रुवीय यानी कि मल्टीपोलर हो चुकी है और डॉलर डिपेंडेंसी को खत्म करने पर चर्चा हो रही है. उन्होंने कहा कि अमेरिका डॉलर के दाम पर दुनिया को ब्लैकमेल करता है, अमेरिका के पास डॉलर का पावर है.
बता दें कि ईरान होर्मुज पर अपनी सेनाओं का नियंत्रण चाहता है, और होर्मुज से जहाजों को क्रॉस करने के लिए ईरान के साथ समन्वय जरूरी है. ईरान नियंत्रित आवागमन चाहता है.
ईरान होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाने की मांग कर रहा है. इसके लिए वह अपनी संसद में बिल पास कर रहा चुका है. रिपोर्ट के अनुसार ईरान प्रति बैरल 1 डॉलर का फीस ले सकता है. कई बार ये रिपोर्ट आई है कि ईरान ये भुगतान युआन में चाहता है जो चीन की मुद्रा है.
नजम सेठी ने कहा कि ये बड़ी बात है. उन्होंने कहा, " ईरान ने कहा आइए युआन में ट्रेड करते हैं. तेल लेना है ले लो, लेकिन हम डॉलर नहीं चाहते हैं, हमें युआन दे दें आप. ये एक बहुत बड़ा घटनाक्रम है. लेकिन चीन चुप है, रूस चुप है. मगर मेरा खयाल है कि सीक्रेटेली तो बड़े खुश होंगे. लेकिन ये दोनों अभी कुछ नहीं कहेंगे, क्योंकि ऐसा न हो कि कोई कॉन्सप्रेसी थ्योरी शुरू हो जाए कि चीन ने ये करवाया है. लेकिन चीन ने ऐसा नहीं किया है."
बता दें कि रूस और चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए किसी भी तरह के बल प्रयोग से जुड़े प्रस्ताव के खिलाफ वीटो किया था. इसके बाद ये प्रस्ताव गिर गया था.
उन्होंने कहा कि ईरान को एहसास है कि ये बड़ा मुद्दा है. हमें ब्रिक्स का साथ देना है. ब्रिक्स के अंदर रहना है और ब्रिक्स को स्ट्रॉन्ग करना है. क्योंकि मल्टीपोलर दुनिया इसी तरह आगे बढ़ेगी. इसकी वजह से जापान, दक्षिण कोरिया और भारत का अमेरिका के साथ और भी दूरी बढ़ जाएगी.
बता दें कि ईरान की मंशा जो भी लेकिन अमेरिका-इजरायल होर्मुज को पूरी तरह फ्री चाहता है. दोनों ही देश यहां से पास होने वाले जहाजों पर किसी भी तरह के टोल लगाने के खिलाफ हैं.
अब इस मुद्दे पर शुक्रवार को इस्लामाबाद में चर्चा होगी. इस वार्ता में ईरान की अगुआई ईरान के स्पीकर गलिबाफ करेंगे.