कनाडा में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या मामले पर अब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का बयान आया है. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने निज्जर की हत्या को लेकर हिंदुत्व पर निशाना साधा है और इसकी तुलना आईएसआईएस से की है.
पाकिस्तान के केयरटेकर प्रधानमंत्री अनवरुल हक ककार ने शुक्रवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 78वें सत्र को संबोधित करते हुए बिना किसी भेदभाव के आतंकियों के खात्मे की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने यूएन से इतर एक इंटरव्यू के दौरान हिंदुत्व पर भी जमकर निशाना साधा.
ककार ने कहा कि इस हिंदुत्व की राजनीति के पीछे एक घिनौनी वास्तविकता छिपी हुई है, जिसने दुनिया को युद्ध की आग में झोंक दिया है. उन्होंने कहा कि कनाडा में निज्जर की हत्या हिंदुत्व की विस्तारवादी राजनीति का ही परिणाम है.
ककार ने कहा कि हिंदुत्व का उभार अमेरिका सहित अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए गहरी चिंता का विषय है. उन्होंने खालिस्तानी आतंकी निज्जर की हत्या को हिंदू राष्ट्रवाद से जोड़ा. हिंदुत्व के इन विचारकों का हौसला इस तरह से बढ़ रहा है कि अब सीमाओं से बाहर इसका विस्तार हो रहा है. कनाडा में खालिस्तानी नेता की दुर्भाग्यपूर्ण हत्या इसका उदाहरण है. लेकिन आर्थिक और रणनीतिक कारणों से कई पश्चिमी देश इस तथ्य और वास्तविकता को नजरअंदाज कर रहे हैं.
हिंदुत्व का उभार खतरनाक
पाकिस्तानी पीएम ने कहा कि इनके सामने पहचान की चुनौती है. इस तरह के विचारों को मुख्यधारा में बने रहने के लिए पहचान की राजनीति से जुड़ने रहना पड़ता है. इस तरह यह पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है. भारत के लिए बहुलवादी और उदार लोकतंत्र के रूप में अस्तित्व में बने रहना एक गंभीर चुनौती है. यह एक आंतरिक चुनौती है और यह चुनौती क्षेत्रवाद में तब्दील हो रही है. क्योंकि जब आप इस तरह के मानवतावादी रुख को अपनाते हैं तो आप पहले क्षेत्र पर हावी होना चाहते हैं.
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान हमेशा से भारत के इस तरह के कट्टर रवैये का आलोचक रहा है लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आर्थिक या रणनीतिक कारणों से कई पश्चिमी देश भारत की इस वास्तविकता और तथ्य को नजरअंदाज करना पसंद करते हैं. मेरे लिए हिंदुत्व, आईएसआईएस यूरोपीय महाद्वीप का केंद्र है. यह फासीवाद का प्रतीक है.
ककार ने कहा कि मैं इस देश का केयरटेकर प्रधानमंत्री हूं. मैं कोई प्रोपगैंडा स्टोरी नहीं बता रहा हूं. मेरा डर वाजिब है. ये लोग इतिहास को तोड़मरोड़ कर उन्हें राजनीतिक रंग देने में लगे हैं.
भगवा भाईवाद नाजी प्रवृत्ति से बहुत मिलता-जुलता है. मैं यहां किसी पर दोष नहीं मढ़ रहा हूं. मैं इंटरनेशनल एकेडमिया में प्रकाशित साक्ष्यों और डेटा के बारे में बात कर रहा हूं. मुद्दा यह नहीं है कि पाकिस्तान ने क्या कहा है. जो ट्रेंड आरएसएस और वीएचपी और अन्य संबंधित समूह मुख्यधारा में लेकर आए हैं. अब यही ट्रेंड मुस्लिमों, ईसाइयों, सिखों और अन्य के लिए अस्तित्व का खतरा बन गया है.