
पाकिस्तान के लिए शुक्रवार दिन बेहद घातक रहा. राजधानी इस्लामाबाद में जब एक शिया इमामबाड़े में जुमे की नमाज पढ़ रहे थे वहां एक जोरदार ब्लास्ट हुआ. यह धमाका इतना भीषण था कि आस-पास कई मीटर तक इसकी आवाज सुनाई दी. मस्जिद में लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला और विस्फोट में दो दर्जन से ज्यादा लोग मारे गए और 170 से ज्यादा लोग घायल हो गए.
इस हमले से राजधानी में अफरा-तफरी मच गई थी. पुलिस और सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यह हमला खदीजा तुल कुबरा इमामबाड़ा में हुआ. यह इमामबाड़ा इस्लामाबाद के बाहरी इलाके में स्थित है.
स्थानीय न्यूज समाचार चैनलों और अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के आंकड़ों के अनुसार, अब तक इस धमाके में 31 लोगों की जान चली गई है और 170 से ज्यादा लोग घायल हैं. घायलों का अस्पताल में इलाज किया जा रहा है. कई लोगों की हालत नाजुक बनी हुई है.
सुरक्षाकर्मियों ने रोका हमलावर, गेट पर किया धमाका
दो पुलिस अधिकारियों ने बताया है कि सुसाइड बॉम्बर को इमामबाड़े के गेट पर मौजूद दो सुरक्षाकर्मियों ने रोक लिया था. फिर बॉम्बर घबरा गया और उसने धमाका कर दिया. हमलावर अंदर मस्जिद के अंदर एंट्री नहीं कर सका था. यह जानकारी रॉयटर्स के हवाले से आई है.

अंदर पहुंचता तो और बढ़ जाती मौतों की संख्या
इस्लामाबाद में मस्जिद में हुए धमाके ने जहां पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया, वहीं पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यदि हमलावर मस्जिद के अंदर पहुंच जाता, तो हताहतों की संख्या और भी अधिक हो सकती थी.
घटनास्थल के भयावह दृश्य
घटनास्थल की तस्वीरों में मस्जिद के अंदर खून से सना फर्श, टूटे शीशे और मलबा साफ देखा गया. कई घायल लोग मस्जिद के बाहर बगीचों में पड़े रहे, जिन्हें स्थानीय लोग और सुरक्षाबल मिलकर अस्पताल तक पहुंचाने में मदद करते नजर आए.
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सरकारी और राजनीतिक प्रतिक्रिया
पाकिस्तान के संसदीय मामलों के मंत्री तारिक फजल चौधरी ने इस हमले को आतंकवादी हमला करार दिया और कहा कि ऐसी कायराना हरकतें देश के हौसले को कमजोर नहीं कर सकतीं. वहीं पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो ज़रदारी ने कहा कि मस्जिद में नमाज पढ़ रहे लोगों को निशाना बनाना मानवता और राष्ट्रीय चेतना पर हमला है. ऐसा हमला पूरे समाज के लिए चिंता का विषय है.

जांच जारी, मृतकों में IG का रिश्तेदार भी शामिल
इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटोरी पुलिस के प्रवक्ता ताकी जवाद ने कहा कि धमाके की प्रकृति को लेकर किसी अंतिम फैसले पर पहुंचना अभी जल्दबाजी होगी. उन्होंने यह भी बताया कि मृतकों में इस्लामाबाद के पुलिस महानिरीक्षक के एक रिश्तेदार भी शामिल हैं.
पाकिस्तान में बढ़ती हिंसा और शिया समुदाय पर हमले
इस्लामाबाद में आमतौर पर कड़ी सुरक्षा होती है और इस तरह के धमाके रेयर माने जाते हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान में हिंसक घटनाओं में तेजी देखी गई है. शिया समुदाय, जो पाकिस्तान में अल्पसंख्यक है, पहले भी कई बार सांप्रदायिक हमलों का शिकार रहा है. कई बार तालिबान जैसे संगठनों पर शिया समुदाय को निशाना बनाने के आरोप लगते रहे हैं.
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अब तक किसी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली
फिलहाल इस हमले की जिम्मेदारी किसी भी संगठन ने नहीं ली है और जांच एजेंसियां मामले की हर पहलू से गहन जांच कर रही हैं. सुरक्षा व्यवस्था को और भी सख्त करने की जरूरत को लेकर आवाजें उठ रही हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके.