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PAK का सीजफायर प्लान ईरान ने किया खारिज! US की तरफ से तेहरान को सौंपी थीं 15 शर्तें

एक तरफ अमेरिका ने युद्धविराम के लिए 15-सूत्रीय प्रस्ताव ईरान तक पहुंचाया है, वहीं दूसरी तरफ तेहरान ने बातचीत से इनकार कर सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है. पाकिस्तान की मध्यस्थता, बढ़ती सैन्य तैनाती और तेल संकट की आशंका ने वैश्विक चिंता को गहरा कर दिया है.

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होर्मुज पर तनाव और हमलों से तेल बाजार में उथल-पुथल, वैश्विक संकट की आशंका. (File Photo: ITG)
होर्मुज पर तनाव और हमलों से तेल बाजार में उथल-पुथल, वैश्विक संकट की आशंका. (File Photo: ITG)

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच कूटनीतिक और सैन्य गतिविधियां तेज होती नजर आ रही हैं. रॉयटर्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने एक अहम भूमिका निभाते हुए अमेरिका का 15-सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव ईरान तक पहुंचाया है. हालांकि, तेहरान ने वॉशिंगटन के साथ बातचीत करने के विचार को सिरे से खारिज कर दिया है.

पाकिस्तानी अधिकारियों ने बताया कि यह प्रस्ताव इस्लामाबाद के मध्यस्थों के जरिए ईरान को सौंपा गया. इसमें कई अहम बिंदु शामिल हैं. इनमें प्रतिबंधों में राहत, नागरिक परमाणु सहयोग, ईरान के परमाणु कार्यक्रम में कमी, मिसाइल कार्यक्रम पर सीमाएं और होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की अनुमति जैसे मुद्दे शामिल हैं.

पाकिस्तान की तरफ से ये प्रस्ताव ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिका पहले ही क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा चुका है. वॉशिंगटन ने मरीन सैनिकों की सहायता के लिए पैराट्रूपर्स को मिडिल ईस्ट में भेजना शुरू कर दिया है. इससे साफ है कि कूटनीति के साथ-साथ सैन्य तैयारी भी समानांतर चल रही है.

दूसरी तरफ, ईरान ने इन कूटनीतिक कोशिशों को गंभीरता से लेने के बजाय उनका मजाक उड़ाया है. तेहरान ने बुधवार को इजरायल और खाड़ी क्षेत्र में हमलों की रफ्तार और तेज कर दी. इन हमलों में कुवैत अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा भी निशाने पर आया, जहां भीषण आग लग गई. आसमान में काले धुएं का गुबार छा गया.

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ईरान की आक्रामक रणनीति का असर सिर्फ सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं है. क्षेत्रीय ऊर्जा ढांचे पर हमलों और होर्मुज स्ट्रेट पर उसकी सख्ती ने वैश्विक बाजारों को भी झकझोर दिया है. होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के कुल तेल का करीब पांचवां हिस्सा गुजरने का प्रमुख रास्ता है. ऐसे में ये तेल की कीमतों में उछाल का कारण बन रहा है.

तेल बाजार में आई उथल-पुथल ने ऊर्जा संकट की आशंकाओं को बढ़ा दिया है. अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता का माहौल है. निवेशकों के बीच चिंता साफ देखी जा सकती है. कुल मिलाकर, एक तरफ कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, तो दूसरी तरफ हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. आने वाले दिनों में स्थिति गंभीर हो सकती है.

गौरतलब है कि ईरान की तरफ से लगातार बड़े हमले किए जा रहे हैं. इसका सबसे ज्यादा शिकार इजरायल बन रहा है. ईरान और इजरायल की दूरी 1500 किलोमीटर है. वो ईरान के घातक मिसाइलों की जद में है. पहले तो ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर अपने नियंत्रण का ऐलान कर संकट बढ़ा दिया. अब उसने खाड़ी देश में अमेरिकी बेस पर हमले तेज कर दिए हैं.

हाल ही में ट्रंप ने मिडिल ईस्ट देशों का जिक्र करते हुए उनकी जमकर तारीफ की थी. उनकी यही तारीफ ईरान की दुश्मनी की बड़ी वजह बनी हुई है. कभी बेहद करीबी रहे कतर और ओमान जैसे देशों की जमीन पर भी ईरान बारूद बरसा चुका है. कतर के अल उदैद एयरबेस पर ईरान ने हमला किया. बहरीन में भी बम बरसाए हैं.

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वहां अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े को निशाना बनाया. ओमान में थमरेट एयरबेस पर भी हमला हुआ. इसका इस्तेमाल अमेरिकी वायुसेना करती है. सऊदी अरब के एयरबेस को टारगेट किया. कुवैत में अली अल सलेम एयरबेस पर बम गिराए. इराक के इरबिल तक मिसाइल मारे. यहां कई ऊंची इमारतें एक जोरदार धमाके के साथ शोले में तब्दील हो गईं.

इजरायल और अमेरिका के हमले भी तेज हैं. ईरानी मीडिया की मानें तो बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के पास नए हमले हुए हैं. ईरान के कई परमाणु केंद्रों को टारगेट किया गया है. नतांज, फोर्डो और बुशहर में बम बरसे हैं. 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के सैन्य हमलों की शुरुआत के बाद से बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर ये दूसरा हमला है.

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