भूकंप की विनाशलीला के बीच काठमांडू में 84 घंटे बाद एक शख्स को मलबे से जिंदा बाहर निकाल लिया गया. बाहर आकर ऋषि खनाल नाम के युवक ने लोगों को आपबीती सुनाई. ऋषि ने बताया कि मलबे के भीतर जान बचाने के लिए उसे अपना मूत्र पीना पड़ा.
27 साल के युवक ऋषि खनाल ने भूकंप की त्रासदी को याद करते हुए कहा, 'मेरे मन में जान बचने की कोई उम्मीद नहीं बची थी. मेरे पास खाने-पीने को कुछ नहीं था. मजबूरन मुझे अपना पेशाब पीना पड़ा.'
युवक ने बताया कि जिस मलबे के नीच वह दबा था, न तो वहां बाहर से कोई आवाज आ रही थी, न ही अंदर की आवाज बाहर जाने की कोई संभावना थी. उसे जिंदा बाहर आने की कोई आशा नहीं थी, तभी रेस्क्यू टीम की कोशिशों से उसे बाहर निकाल लिया गया. ऋषि ने कहा, 'अब मैं बेहतर महसूस कर रहा हूं. मैं अभारी हूं.'
ऋषि खनाल काठमांडू में गोंगबू इलाके के सात मंजिला होटल के मलबे में दबा हुआ था. उसे बचाने के लिए 10 घंटे से रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा था. उसे बचाने के लिए नेपाल के सशस्त्र प्रहरी बल और फ्रेंच रेस्क्यू टीम जी-जान से जुटी हुई थी.
गौरतलब है कि नेपाल में भूकंप के झटकों का बुधवार को पांचवां दिन है. भूकंप से बुरी तरह तबाह नेपाल में भारत व दुनिया के कुछ अन्य देशों के सहयोग से रेस्क्यू ऑपरेशन तेजी से चलाया जा रहा है.