नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक को जमानत पर रिहा कर दिया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने दोनों नेताओं को रिहा करने का आदेश दिया था.
ओली और लेखक की ओर से दायर जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को काठमांडू अदालत द्वारा बढ़ाई गई 5 दिन की हिरासत अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें रिहा करने का आदेश दिया था. न्यायाधीश विनोद शर्मा और सुनील कुमार पोखरेल की पीठ ने हिरासत को 'कानून के विपरीत नहीं' माना, लेकिन निर्धारित समय के भीतर जांच पूरी कर यह निर्णय लेने का निर्देश दिया कि मामला चलाया जाए या नहीं.
अदालत ने यह भी कहा कि यदि उस अवधि में निर्णय नहीं हो पाता है, तो तीसरी बार बढ़ाई गई अवधि के बाद मुलुकी फौजदारी संहिता की धारा-15 की प्रक्रिया पूरी कर उन्हें रिहा कर आगे की जांच जारी रखी जाए.
अदालत में दी गई ये दलील
अदालत ने यह भी बतया कि ओली और लेखक के बयान तथा अन्य जांच प्रक्रियाएं पहले ही पूरी हो चुकी हैं. साथ ही, जांच आयोग की सिफारिश पर तत्कालीन काठमांडू प्रमुख जिला अधिकारी छविलाल रिजाल को भी आवश्यकता पड़ने पर उपस्थित होने की शर्त पर छोड़ा गया है. अदालत ने यह भी कहा कि ओली की सेहत को देखते हुए जांच प्रक्रिया को जल्द पूरा करना उचित होगा.
दोनों नेताओं को पुलिस ने 28 मार्च को गिरफ्तार किया था. बालेंद्र शाह के प्रधानमंत्री बनने के बाद कैबिनेट ने गौरी बहादुर कार्की के नेतृत्व वाले जांच आयोग की रिपोर्ट लागू करने का निर्णय लिया था, जिसके आधार पर उनकी गिरफ्तारी हुई थी.
ओली पर इसलिए की गई कार्रवाई
आयोग की रिपोर्ट में कहा गया था कि 8 सितंबर 2025 को गोलीबारी से लोगों की मौत होने के बाद भी तत्कालीन प्रधानमंत्री ओली सहित संबंधित पदाधिकारियों ने गोली रोकने के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए और लापरवाही दिखाई.
इसी आधार पर ओली और लेखक के खिलाफ मुलुकी फौजदारी संहिता की धारा 181 और 182 के तहत कार्रवाई की सिफारिश की गई थी. इन धाराओं के अनुसार लापरवाही या असावधानी से किसी की मृत्यु होने पर 3 से 10 वर्ष तक की कैद और 30 हजार से 1 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है.