scorecardresearch
 

Nelson Mandela Day: अफ्रीका के राष्ट्रपति जिसके भारत-पाकिस्तान दोनों हुए मुरीद, दिए सर्वोच्च सम्मान

भारत सरकार ने 1990 में मंडेला को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया था और सबसे ख़ास बात ये थी कि मंडेला भारत रत्न पाने वाले पहले विदेशी नागरिक थे.

Advertisement
X
Nelson Mandela Day Birthday
Nelson Mandela Day Birthday

Nelson Mandela Day: "मैं 27 साल लंबी छुट्टी पर चला गया था”. ये शब्द नेल्सन मंडेला के तब थे जब वो जेल से बाहर आए. गांधी ऑफ साउथ अफ्रीका के नाम से मशहूर नेल्सन मंडेला को कौन नहीं जानता. बापू यानी महात्मा गांधी को अपना रोल मॉडल मानने वाले नेल्सन उन्हीं की सिखाई नीति पर भी चले. मंडेला इतनी बड़ी शख्सियत थे कि जब उनसे एक इंटरव्यू में जेल में बिताए 27 सालों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने जवाब में बस इतना कहा कि मुझे यकीन था कि मैं सबको माफ कर दूंगा और ऐसा हुआ भी. मंडेला के मन में कभी भी किसी के प्रति बदले की भावना देखने को नहीं मिली. यही वजह थी कि उन्होंने उन सबको माफ किया. उन्हें भी, जो लोग उन्हें सजा दिलाना चाहते थे. 

27 साल तक कैदी नंबर 466

रंगभेद विरोधी लड़ाई के दौरान मंडेला को अफ्रीकी सरकार ने जेल में डाल दिया. नेल्सन मंडेला ने भले ही दक्षिण अफ्रीका की बदनाम रोबेन आइलैंड जेल में कैदी नंबर 466 की ज़िंदगी 27 साल तक जी और इस दौरान कोयले की खदान में काम करने से लेकर न जाने कितनी मुश्किलों का सामना किया. लेकिन, उन्होंने संघर्ष कभी नहीं छोड़ा. उनका लक्ष्य था आजादी. और इतनी मुसीबतों के बाद भी इन सबके बीच उन्होंने इसी जेल में अपनी वकालत की पढ़ाई भी पूरी की. नतीजा ये हुआ कि साल 1990 में दक्षिण अफ्रीका की श्वेत सरकार ने घुटने टेक दिए और फिर उदय हुआ नए दक्षिण अफ्रीका का. ये वो दिन था जब इतिहास के पन्नों पर नई इबारत लिखी जा रही थी और नेल्सन मंडेला दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ले रहे थे.

Advertisement

जब मंडेला हुए रंगभेद के शिकार 

नेल्सन मंडेला यूं तो एक अच्छे परिवार से ताल्लुक रखते थे लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब वो भी रंगभेद का शिकार हुए. बात उन दिनों की है, जब नेल्सन मंडेला एक कंपनी में बतौर टाइपिस्ट काम करते थे. उसी कंपनी में एक गोरी महिला टाइपिस्ट भी काम करती थी. एक बार वो महिला मंडेला से टाइपिंग के बारे में कुछ सीख रही थी, तभी एक अंग्रेज क्लाइंट वहां आ गया. जिसे देखकर वो गोरी महिला चौंक गई और फौरन हालात को भांपते हुए मंडेला को पैसे देते हुए कहा- जाओ मेरे लिए एक शैंपू लेकर आओ. इस घटना के बाद नेल्सन मंडेला को ये बात पूरी तरह से समझ में आ चुकी थी कि दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद की जड़ें बहुत गहरी हैं.

आतंकियों की लिस्ट में शामिल थे नेल्सन मंडेला 

नेल्सन मंडेला को साल 1993 में नोबेल प्राइस मिला, लेकिन क्या आप जानते है कि एक वक्त ऐसा भी था जब इनपर अमेरिका की Investigation agency FBI की पैनी नजर थी. साल 1980 में अमेरिका ने नेल्सन मंडेला की पार्टी अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस को आतंकी संगठन घोषित कर दिया था. ये बात है साल 1990 की जब नेल्सन मंडेला अपनी रिहाई के बाद अमेरिका की ऐतिहासिक यात्रा पर थे. ये जानकारी एक बहुत ही फेमस ब्रिटिश अखबार ने छापी. ‘द इंडिपेंडेट’ की रिपोर्ट में कहा गया कि मंडेला जब अमेरिका गए थे, उनकी पार्टी ANC उस समय तक अमेरिकी सरकार के आतंकवादी संगठनों की लिस्ट में शामिल थी. रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया कि एफबीआई मंडेला के काफिले से जुड़ी हर छोटी बड़ी जानकारी खुफिया तरीके से पता कर रही थी, मतलब ये कहा जा सकता है कि FBI नेल्सन मंडेला के हर मूवमेंट पर नजर रख रही थी. हालांकि, बाद में मंडेला समेत अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस के बाकी सदस्यों का नाम इस लिस्ट से बाइज्जत हटाया गया. 

Advertisement

जब AIDS को लेकर फैलाई जागरूकता 

नेल्सन मंडेला वो थे जिन्होंने दुनिया भर में AIDS को लेकर फैली तमाम अफवाहों के बीच जागरूकता पर आवाज उठाई और दुनिया के सामने ये कबूल किया कि उनके बेटे की जान भी AIDS ने ही ली. वो साल 1994 से 1999 तक दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति रहे, जिसके बाद 1999 में राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद से ही नेल्सन मंडेला ने एड्स के ख़िलाफ़ अभियान में ज़ोर-शोर से हिस्सा लिया था और लोगों में इस बीमारी को लेकर जागरूकता फैलाई. ये वो वक्त था जब AIDS पर बात करना तो दूर इस बीमारी का नाम लेना भी शर्मनाक माना जाता था. 

हिंदुस्तान-पाकिस्तान दोनों देशों ने किया सम्मानित 

बहरहाल, जेल से बाहर आने के बाद जब नेल्सन मंडेला ने अपने देश में रंगभेद के खिलाफ अभियान चलाया तो कई देशों का ध्यान उनकी तरफ गया. भारत सरकार ने 1990 में मंडेला को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया था और सबसे ख़ास बात ये थी कि मंडेला भारत रत्न पाने वाले पहले विदेशी नागरिक थे. आपको जानकर हैरानी होगी कि ये वो राष्ट्रपति थे जिन्हें न सिर्फ भारत बल्कि पाकिस्तान ने भी अपने देश के सर्वोच्च सम्म्मान निशान-ऐ-पाकिस्तान से नवाजा था.

Advertisement
Advertisement