गुरुवार को राज्यसभा में सरकार से सवाल हुए कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा के दौरान ईरान पर हमले की जानकारी सरकार को थी. इस सवाल का जवाब देते हुए सरकार ने साफ किया है कि इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई थी.
राज्यसभा में पूछा गया कि क्या 25-26 फरवरी को पीएम मोदी की इजरायल यात्रा के दौरान या उसके तुरंत बाद ईरान पर हुए सैन्य हमले की जानकारी सरकार को थी. इसके जवाब में सरकार ने कहा, 'इस विषय पर कोई चर्चा नहीं हुई.'
विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लिखित जवाब में बताया कि इजरायल के प्रधानमंत्री के निमंत्रण पर नरेंद्र मोदी ने 25-26 फरवरी को इजरायल का दौरा किया था. इस दौरान दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच भारत-इजरायल साझेदारी के विभिन्न पहलुओं और क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई.
उन्होंने बताया कि इस यात्रा के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर सुरक्षा, कृषि, मत्स्य पालन, शिक्षा, वित्तीय सेवाओं, डिजिटल भुगतान, श्रमिकों की आवाजाही और भू-भौतिकीय खोजों जैसे क्षेत्रों में कई समझौते, एमओयू और अन्य करार किए गए. सरकार ने यह भी साफ किया कि ईरान पर हमले से जुड़े सवाल पर कोई चर्चा नहीं हुई थी.
फारस की खाड़ी में तनाव कम करने के लिए क्या कर रही सरकार?
सरकार से यह भी पूछा गया था कि फारस की खाड़ी में तनाव को कम करने और भारत के रणनीतिक, ऊर्जा और नागरिक हितों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए हैं. इस पर कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि भारत सरकार पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है.
उन्होंने बताया कि संघर्ष शुरू होने के बाद प्रधानमंत्री ने इजरायल, ईरान, सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, यूएई, जॉर्डन और अमेरिका समेत कई देशों के नेताओं से बातचीत की है. वहीं, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी अपने समकक्षों से संपर्क किया है.
सरकार ने कहा कि बातचीत के दौरान तनाव कम करने के लिए संवाद और कूटनीति पर जोर दिया गया और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई.
विदेश मंत्रालय ने बताया कि क्षेत्र में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं. प्रभावित देशों में भारतीय मिशन 24x7 कंट्रोल रूम और इमरजेंसी हेल्पलाइन के जरिए सहायता प्रदान कर रहे हैं और नियमित एडवाइजरी जारी की जा रही है.
सरकार के अनुसार, इन कोशिशों के चलते युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 4.75 लाख से अधिक भारतीय सुरक्षित भारत लौट चुके हैं. साथ ही, भारत ऊर्जा और आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है. सरकार ने बताया कि होर्मुज स्ट्रेट के जरिए एलपीजी और अन्य जहाजों को सुरक्षित आवागमन भी सुनिश्चित किया गया है.