मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने चीन के साथ अपने देश के रणनीतिक संबंधों की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देश एक-दूसरे का सम्मान करते हैं. उन्होंने कहा कि चीन हिंद महासागर द्वीप की संप्रभुता का पूरा समर्थन करता है. मुइज्जू का यह बयान भारत के साथ चल रहे राजनयिक विवाद के बीच आया है.
चीन की हाई-प्रोफाइल स्टेट विजिट के बाद मुइज्जू बीते शनिवार को मालदीव वापस लौटे. मुइज्जू ने कहा कि चीन ने 1972 में राजनयिक संबंध स्थापित करने के बाद से मालदीव के विकास में काफी मदद की है. उन्होंने यह भी कहा कि चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव द्विपक्षीय संबंधों को एक नए स्तर पर ले गई है.
चीन के सरकारी टीवी चैनल CGTN से बात करते हुए मुइज्जू ने कहा कि चीन ऐसा देश नहीं है जो मालदीव के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करेगा और इसी वजह से दोनों देशों के रिश्ते मजबूत हैं. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते भविष्य में भी मजबूत रहेंगे.
भारत के साथ विवाद को लेकर देश में घिरे मुइज्जू
बीते मंगलवार को मालदीव की विपक्षी पार्टी MDP के सांसद मिखाइल अहमद नसीम ने एक प्रस्ताव पेश कर मांग की है कि विदेश मंत्री मूसा जमीर संसद (मजलिस) में आएं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर उप मंत्रियों की आपत्तिजनक टिप्पणी पर स्पष्टीकरण दें.
नसीम ने मांग की है कि जिन तीन उप मंत्रियों को निलंबित किया गया है, संसद में उनके मामले की सुनवाई हो. उन्होंने यह भी मांग की है कि मुइज्जू सरकार मंत्रियों को बर्खास्त करें और पीएम मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों के लिए एक औपचारिक माफीनामा जारी करे.
श्रीलंका के साथ जो हुआ, उससे सबक ले मालदीव की सरकार
आजतक की सहयोगी वेबसाइट इंडिया टुडे के साथ बातचीत में नसीम ने कहा कि मुइज्जू सरकार को चीन के मामले में श्रीलंका से सीख लेनी चाहिए.
उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि अपने पड़ोसियों से सबक सीखना अच्छा रहेगा, खासकर हंबनटोटा बंदरगाह को लेकर श्रीलंका में जो हुआ, उससे सबक लेना अच्छा रहेगा. हमारी सरकार चीन के साथ कई तरह के समझौता ज्ञापन और समझौता करने में व्यस्त है, जिनके बारे में हमें जानकारी नहीं है... मुझे लगता है कि ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि मालदीव का नागरिक होने के नाते हम इस बात पर कड़ी नजर रखें कि क्या किया जा रहा है.'
मिखाइल अहमद नसीम ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि उनकी सरकार भारत के साथ चल रहे राजनयिक तनाव को गंभीरता से ले रही है.
पेश है इंडिया टुडे की विदेश मामलों की एडिटर गीता मोहन से नसीम की बातचीत का अंश-
सवाल- उप मंत्रियों को निलंबित किया गया है, बर्खास्त नहीं किया गया है... विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है कि क्या निलंबित मंत्रियों को बर्खास्त किया जाएगा? लेकिन मुइज्जू सरकार ने अपने उप मंत्रियों को केवल निलंबित किया है. क्या आपको लगता है कि सरकार बर्खास्तगी और निंदा जैसी कड़ी कार्रवाई करेगी?
जबाव- हम बहुत निराश हैं कि सरकार शायद भारत के साथ हमारे सदियों पुराने संबंधों और दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों के बजाए अपने उप मंत्रियों को अधिक महत्व दे रही है. मुझे लगता है कि मौजूदा सत्ताधारी पार्टी अपने उप मंत्रियों के प्रति जो वफादारी दिखा रही है, उससे कहीं अधिक जरूरी इस वक्त एक अहम कदम उठाना है ताकि मालदीव की अच्छी अंतरराष्ट्रीय स्थिति बनी रहे और भारत के साथ अच्छे संबंध भी बरकरार रहे.
सवाल- हम पिछली सरकार से इस सरकार में एक बदलाव देख रहे हैं लेकिन राष्ट्रपति मुइज्जू पूर्व राष्ट्रपति यामीन (मुइज्जू के गुरु अब्दुल्ला यामीन)से अलग होने के बाद, क्या आपको लगता है कि हालिया सरकार चीन और भारत के बीच संबंधों को संतुलित करने की कोशिश कर रही है? या क्या हम आने वाले दिनों में भारत और मालदीव के बीच मुश्किल वक्त देखने वाले हैं?'
जवाब- सच कहूं तो, मैंने सोचा था कि मुइज्जू सालों से "इंडिया आउट" की बयानबाजी करते आ रहे हैं और जीत के बाद वो उसे रोक देंगे. मैंने सोचा था कि अब तो उन्होंने अपना लक्ष्य हासिल कर लिया, सत्ता में आ गए, सरकार बना ली... इसलिए वो रुक जाएंगे. लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ. यह बहुत निराशाजनक है क्योंकि मुझे लगता है कि मालदीव के लोग वर्तमान सरकार से बहुत निराश हैं और वर्तमान सरकार का रुख मालदीव के अधिकांश लोगों की सोच नहीं है.
हालांकि उन्होंने मुइज्जू की सरकार के लिए मतदान किया, मुझे लगता है कि उन्होंने कई मुद्दों पर वोट किया न कि सिर्फ 'इंडिया आउट' के मुद्दे पर. मेरा यह भी मानना है कि केवल कुछ लोग हैं जो इस तरह की बयानबाजी में लगे हैं.
सवाल- क्या आपको लगता है कि इसका भारत और मालदीव के बीच पर्यटन और व्यापार पर असर पड़ेगा?
जवाब- पिछले चार से 72 घंटों के भीतर हमने हजारों-हजारों बुकिंग रद्द होते देखी हैं. मेरे सूत्र ने बताया कि एक रिजॉर्ट में स्पेशल शादी का फंक्शन होना था, लगभग 10 लाख डॉलर का...उसे रद्द कर दिया गया है. हम पर्यटन पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं. ऐसे में यह हमारे लिए बहुत हानिकारक है.
मेरी राय में, हमें इस तरह से किसी देश को निशाना नहीं बनाना चाहिए, खासकर किसी सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को. इस तरह की चीजों को स्वीकार नहीं किया जा सकता. मैं समझता हूं कि इस पूरे विवाद को खत्म करने के लिए सरकार को तुरंत माफीनामा जारी करना चाहिए और पूरे विवाद को खत्म करना चाहिए. तीनों उप मंत्रियों को बर्खास्त भी कर देना चाहिए.
सवाल- आपने जवाब मांगने के लिए जो प्रस्ताव पेश किया है,उस पर कब बात होने की संभावना है?
जवाब- संसद 1 फरवरी को दोबारा बुलाई जाएगी लेकिन हम इससे पहले ही संसद का एक सत्र आयोजित कराने की पूरी कोशिश कर रहे हैं ताकि मामले की तह तक जल्दी से जल्दी पहुंच सकें.
सवाल- आप दो चीजों की मांग कर रहे हैं, एक तो विदेश मंत्रियों से जवाब और दूसरा अपमानजनक टिप्पणी करने वाले उप मंत्रियों को बर्खास्त करना. लेकिन क्या अविश्वास प्रस्ताव को लेकर भी कोई कदम या बातचीत चल रही है?
जबाव- मुझे नहीं लगता कि महाभियोग के लिए कोई औपचारिक चर्चा हुई है लेकिन सांसदों के साथ-साथ राजनीतिक दलों ने भी टिप्पणी की है कि वो इसके साथ हैं. लेकिन हम नहीं जानते कि इसे लेकर आगे कुछ कदम उठाए जाएंगे या नहीं.'
सवाल- हम जानते हैं कि मुइज्जू प्रशासन डैमेज कंट्रोल की कोशिश कर रहा है लेकिन उनकी सरकार में कितने नेता हैं जो भारत से दूर हटकर चीन के करीब जाना चाहते हैं. आपको क्या लगता है कि सरकार में कितने ऐसे नेता हैं जो सरकारी नीतियों को प्रभावित करते हैं?'
जवाब- ऐसा होते देखने बहुत भयावह है लेकिन ईमानदारी से कहूं तो मैं हैरान नहीं हूं क्योंकि यह कोई अकेली घटना नहीं थी. ऐसा नहीं है कि सत्ताधारी दल से कोई भी नेता सामने आया और उसने ऐसा मनमानी टिप्पणी कर दी. मुझे लगता है कि यह मालदीव के भीतर राजनीतिक लाभ हासिल करने और भारत विरोधी भावनाओं की चरम समय है.'
सवाल- आपको क्या लगता है कि इस विवाद से न केवल पर्यटन पर असर होगा, बल्कि भारत मालदीव की अर्थव्यवस्था, अस्पतालों, डॉक्टरों, नर्सों,नौकरियों में बहुत योगदान देता आया है. इसका क्या असर होगा? क्या आपको लगता है कि भारतीयों के खिलाफ कोई प्रतिक्रिया होगी?
जवाब- सच कहूं तो, मुझे डर है, मुझे बहुत डर है कि मालदीव और भारत दोनों देशों में हेट क्राइम बढ़ सकते हैं क्योंकि जिस तरह की बयानबाजी की जा रही है वो बेहद खतरनाक है. इसलिए मैं भारत में रहने वाले, इलाज और अन्य कामों के लिए भारत जाने वाले मालदीव के लोगों के लिए बहुत-बहुत डरा हुआ हूं, लेकिन मुझे लगता है कि इसे रोका जा सकता है.
इसका एकमात्र तरीका है सरकार औपचारिक माफी मांगे, अपने तीन उप मंत्रियों को बर्खास्त करे और संतुलित विदेश नीति अपनाए.
सवाल- मालदीव भारत से दूर चीन के करीब जा रहा है. मालदीव भारत का रणनीतिक सहयोगी है और भारत चाहता है कि मालदीव के साथ इस तरह का सहयोग बरकरार रहे. क्या आप मालदीव के भू राजनीति में बदलाव देख रहे हैं और क्या यह चीन की तरफ झूक रहा है? इससे मालदीव पर क्या असर पड़ेगा? हमने देखा है कि श्रीलंका में क्या हुआ?
जवाब- अपने पड़ोसियों से सीख लेना अच्छी बात है, खासकर श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह पर जो हुआ. मुझे लगता है कि जहां सरकार चीन के साथ समझौता ज्ञापन और समझौता करने में व्यस्त है, हम मालदीव का नागरिक होने के नाते इन सब चीजों पर नजर रख रहे हैं.
यह भी जरूरी है कि सरकार को याद दिलाते रहें कि चाहे किसी भी पार्टी की सरकार हो, हम अपनी भौगोलिकी को नहीं बदल सकते. हम इस बात को नहीं बदल सकते कि भारत हमारा पड़ोसी है और हमारे हित एकृ-दूसरे से जुड़े हुए हैं. इसका मतलब ये भी नहीं है कि हमें चीन से दूरी बनाकर रखनी होगी बल्कि हमें एक संतुलित विदेश नीति अपनाकर चल सकते हैं. मैं फिर कहूंगा कि हम अपनी भौगोलिक स्थिति को नजरअंदाल कर आगे नहीं बढ़ सकते हैं.