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'हीरो बन रहे हो...', PM मोदी के मलेशिया दौरे के बीच मुस्लिम ग्रुप ने ऐसा क्या किया कि मलेशियाई पीएम ने खूब सुनाया

मलेशिया में एक पुराने मंदिर को हटाने को लेकर मुस्लिम संगठन शनिवार को रैली करने वाले थे. ये रैली उसी समय होनेवाली थी जब पीएम मोदी मलेशिया पहुंच रहे थे. इसे देखते हुए रैली को रोक दिया गया और पीएम अनवर इब्राहिम ने रैली के आयोजकों को खूब सुनाया.

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पीएम मोदी दो दिवसीय दौरे पर मलेशिया गए थे (Photo: AP)
पीएम मोदी दो दिवसीय दौरे पर मलेशिया गए थे (Photo: AP)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार और रविवार को मलेशिया दौरे पर थे. इस दौरान मलेशिया में एक मंदिर को लेकर विवाद इतना गहरा गया कि खुद प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम को सामने आकर मामला संभालना पड़ा.

मुस्लिम बहुल मलेशिया में मुस्लिम संगठनों ने एक पुराने मंदिर को हटाकर वहां मस्जिद बनाने के समर्थन में रैली का आयोजन किया. रैली ऐसे समय आयोजित की जा रही थी जब पीएम मोदी मलेशिया में लैंड करने वाले थे यानी शनिवार को. लेकिन अनवर इब्राहिम की सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए रैली को रोक दिया और इसमें शामिल कई असामाजिक तत्वों को गिरफ्तार कर लिया गया है.

अब प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने रैली के आयोजकों को खरी-खोटी सुनाई है. सोमवार को मलेशिया की राष्ट्रीय एकता मंत्रालय की मासिक बैठक में बोलते हुए अनवर इब्राहिम ने कहा कि 'अवैध' मंदिरों को लेकर उठे विवाद सांप्रदायिक झगड़ों में नहीं बदलना चाहिए.

उन्होंने कहा, 'इस मासिक बैठक में मैं राष्ट्रीय एकता के मूल मुद्दे पर जोर देना चाहता हूं. अगर इसी तरह के टकराव जारी रहे तो केवल आर्थिक विकास से लोगों की भलाई नहीं हो सकती.'

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मलेशिया के उपद्रवी तत्वों को अनवर इब्राहिम की चेतावनी

मलेशिया में यह बहस काफी पुरानी है कि मंदिर की जमीन न होने के बावजूद भी अवैध तरीके से कई मंदिर बनाए गए हैं. उन्होंने कहा कि स्थानीय परिषदों को नियमों के पालन सुनिश्चित करने का अधिकार दिया जाएगा.

उन्होंने कहा, 'मैं यह घोषणा करना चाहता हूं कि जो नियमों के हिसाब से नहीं है, उसे अब इजाजत नहीं दी जाएगी. नगर परिषदों को कार्रवाई का अधिकार है, ताकि जो इलाके मंदिर भूमि नहीं हैं, उन्हें खाली कराया जा सके और समस्या का सही समाधान हो सके.'

मलेशिया के उपद्रवी तत्वों को चेतावनी देते हुए अनवर ने कहा कि कार्रवाई केवल कानून के दायरे में रहकर ही होनी चाहिए. उन्होंने कहा, 'यह कानून का देश है. हीरो बनना चाहते हैं? यह आपका काम नहीं है. इस्लाम के चैंपियन बनना चाहते हो तो सही तरीके से इस्लाम का प्रचार करो, लोगों से सही बर्ताव करो, अच्छा उदाहरण बनो, न कि अपमान और गाली-गलौज करने वाले बनो.'

राजधानी कुआलालंपुर के बीचोंबीच आयोजित होनी थी रैली

मंदिर हटाने को लेकर रैली को सेंट्रल कुआलालंपुर में आयोजित होने वाली थी. रैली को रोकने के लिए पुलिस ने इससे जुड़े 19 लोगों को हिरासत में लिया. अधिकारियों ने बताया कि रैली नस्लीय और धार्मिक तनाव भड़का सकती थी.

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'एंटी-इलीगल हाउसेज़ ऑफ वर्शिप' नाम से प्रस्तावित रैली शनिवार शाम करीब 8 बजे जालान तुआंकू अब्दुल रहमान पर, सोगो शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के पास आयोजित होनी थी. रैली के विरोध में पुलिस को कथित तौर पर 131 शिकायतें मिली थीं. इसके बाद पुलिस ने सुरक्षा कारणों से रैली को इजाजत देने से इनकार कर दिया था.

मलेशिया एक मुस्लिम बहुल देश है जहां इस्लाम आधिकारिक धर्म है लेकिन अन्य धार्मिक समूहों को अपने धर्म के सम्मान की पूरी आजादी है. हालांकि, यहां के मुस्लिम समूह आए दिन मंदिरों से जुड़ा विवाद उठाते हैं जो तनाव का कारण बनता है.

ऐसे विवाद अक्सर जमीन या योजना संबंधी मुद्दों से शुरू होते हैं. लेकिन जब पता चलता है कि मंदिर जैसा कोई पूजा स्थल किसी निजी जमीन मालिक, राज्य एजेंसियों या स्थानीय परिषदों के दावे वाली जमीन पर है तो ये पहचान और आस्था से जुड़े झगड़े में बदल जाता है.

कुआलालंपुर के पुलिस प्रमुख फादिल मारसुस ने बताया कि गिरफ्तार लोगों में विवादित उपदेशक जामरी विनोथ भी शामिल हैं, जिन्होंने इस रैली का नेतृत्व किया था. रैली के सह-आयोजक व कार्यकर्ता तमीम दाहरी अब्दुल रजाक भी हिरासत में लिए गए. उन्होंने कहा कि इन लोगों के खिलाफ राजद्रोह कानून, दंड संहिता और संचार एवं मल्टीमीडिया अधिनियम के तहत जांच की जा रही है. अन्य 17 लोगों को एहतियातन हिरासत में लेकर बाद में पुलिस जमानत पर रिहा कर दिया गया.

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रैली तब होनेवाली थी जब पीएम मोदी मलेशिया पहुंच रहे थे. हालांकि, रैली आयोजकों ने इससे इनकार किया कि पीएम मोदी के दौरे को देखते हुए रैली आयोजित की गई थी. लेकिन पुलिस प्रमुख फादिल ने कहा कि मोदी की यात्रा को देखते हुए सुरक्षा कारणों से रैली रोक दी गई. यह जानकारी सरकारी समाचार एजेंसी बरनामा ने दी.

पिछले साल से विवादों में है राजधानी का मंदिर

रैली देवी श्री पथ्रकालिअम्मन मंदिर के पुराने स्थान के पास होनी थी. यह करीब 130 साल पुराना मंदिर पिछले साल मार्च में स्थानांतरण विवाद के केंद्र में आया था. तब टेक्सटाइल कंपनी जाकेल ग्रुप की जमीन पर एक नई मस्जिद बनाने की प्लानिंग के लिए मंदिर हटाने की बात सामने आई थी.

2018 में भी सेलांगोर में एक मंदिर स्थानांतरण विवाद हुआ था. विवाद इतना हिंसक हो गया था कि फायरफाइटर मोहम्मद आदिब मोहद कासिम की मौत हो गई थी.

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