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BLA के ‘हेरोफ-2’ से दहशत में पाकिस्तान, अमेरिका-चीन के लिए भी खतरे की घंटी है बलूचिस्तान अटैक

बलूचिस्तान में BLA के दशकों के सबसे बड़े हमले ने पाकिस्तान के साथ अमेरिका और चीन को भी चेताया है. विदेशी निवेश, CPEC और खनिज संसाधनों का दोहन BLA के विद्रोह की मुख्य वजह बन रहे हैं. बढ़ते हमले क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं.

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अमेरिका ने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी और मजीद ब्रिगेड को आतंकवादी समूह घोषित किया हुआ है (File Photo)
अमेरिका ने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी और मजीद ब्रिगेड को आतंकवादी समूह घोषित किया हुआ है (File Photo)

पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान में शनिवार को दशकों का सबसे बड़ा और घातक हमला हुआ, जब बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने एक साथ कई जिलों में आत्मघाती हमलों और सशस्त्र कार्रवाइयों को अंजाम दिया.

बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने 'ऑपरेशन हेरोफ-2' (काला तूफान) के तहत पूरे प्रांत में हमले किए. इन हमलों में आम नागरिकों, पुलिस, सेना और अर्धसैनिक ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिससे यह दिन प्रांत के सबसे खूनखराब दिनों में दर्ज हो गया.

हमलों का पैमाना न केवल पाकिस्तान के लिए, बल्कि अमेरिका और चीन के लिए भी एक स्पष्ट चेतावनी माना जा रहा है, जिनके इस क्षेत्र में बड़े रणनीतिक और आर्थिक हित जुड़े हुए हैं. पिछड़ेपन के बावजूद बलूचिस्तान प्राकृतिक गैस, तांबा, सोना और दुर्लभ खनिजों से भरपूर है, जिस पर पाकिस्तान, चीन (CPEC के तहत) और अब अमेरिका की नजरें टिकी हैं.

विदेश नीति विशेषज्ञ माइकल कुगेलमैन ने सोशल मीडिया पर लिखा,“आज बलूचिस्तान में हुए हमले उन सभी के लिए चेतावनी हैं, खासकर व्हाइट हाउस में बैठे लोगों के लिए, जो पाकिस्तान के क्रिटिकल मिनरल्स में निवेश करना चाहते हैं. BLA की सबसे बड़ी शिकायत बाहरी शक्तियों द्वारा स्थानीय संसाधनों का दोहन करना है.”

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‘हेरोफ-2’: एक सुनियोजित और व्यापक हमला

BLA ने इस अभियान को “हेरोफ-2” नाम दिया, जिसका बलूची साहित्य में अर्थ होता है “काला तूफान”. 2024 में हुए हेरोफ-1 के मुकाबले इस बार हमलों का दायरा कहीं ज्यादा बड़ा और हिंसक था.

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पाकिस्तानी सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, क्वेटा, मस्तुंग, ग्वादर, पंजगुर, तुरबत, केच, कलात, नुश्की, अवारान समेत 15 से अधिक इलाकों में एक साथ गोलीबारी, बम धमाके और आत्मघाती हमले हुए.

क्वेटा में पुलिस थानों और मोबाइल यूनिट्स पर हमला किया गया, मस्तुंग सेंट्रल जेल से कम से कम 30 कैदियों को छुड़ा लिया गया, जबकि ग्वादर में मजदूरों के कैंप पर हमले में महिलाओं और बच्चों सहित 11 लोगों की मौत हुई.

खुफिया सूत्रों का दावा है कि इन हमलों में 800 से 1000 लड़ाके, जिनमें कुछ महिलाएं भी शामिल थीं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मृतकों की संख्या 200 तक पहुंच सकती है. बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने 31 नागरिकों और 17 सुरक्षाकर्मियों की मौत की पुष्टि की, जबकि पाक सेना ने 145 BLA लड़ाकों को मार गिराने का दावा किया.वहीं BLA प्रवक्ता जीयंद बलूच ने सरकारी दावों को खारिज करते हुए कहा कि 84 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए, 18 को जिंदा पकड़ा गया और BLA के केवल 7 लड़ाके मारे गए.

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रॉयटर्स को एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि ग्वादर में, विद्रोहियों ने प्रवासी मजदूरों के एक कैंप को निशाना बनाया, जिसमें महिलाओं और बच्चों सहित 11 लोग मारे गए. कलात में डिप्टी कमिश्नर के हेडक्वार्टर और पुलिस लाइंस के पास झड़पों की खबर मिली, जबकि नुश्की में, विद्रोहियों ने डिप्टी कमिश्नर हुसैन हजारा और उनके परिवार को अगवा कर लिया.

पसनी में एक कोस्ट गार्ड पोस्ट पर हमला किया गया, बोलन, लक पास और किला सैफुल्लाह-रखनी में हाईवे बंद कर दिए गए, और नसीराबाद में रेलवे लाइन पर लगाए गए विस्फोटकों को डिफ्यूज कर दिया गया.

बलूचिस्तान क्यों है इतना अहम?

बलूचिस्तान पाकिस्तान का क्षेत्रफल में सबसे बड़ा प्रांत है, जो ईरान और अफगानिस्तान की सीमा से लगा है और अरब सागर तक पहुंच देता है. यहां स्थित ग्वादर बंदरगाह, चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का केंद्र है, जिसे चीन अपनी ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक मार्गों के लिए बेहद अहम मानता है.

साथ ही, सूई गैस फील्ड सहित यहां के खनिज संसाधन पाकिस्तान की ऊर्जा जरूरतों की रीढ़ हैं. अमेरिका ने हाल ही में बलूचिस्तान के रेको दिक इलाके में खनन परियोजनाओं के लिए 1.25 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है. वहीं चीन के लिए CPEC उसकी बेल्ट एंड रोड पहल का सबसे अहम हिस्सा है.

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लेकिन यही विदेशी निवेश BLA के गुस्से की सबसे बड़ी वजह है. संगठन का आरोप है कि बलूचिस्तान के संसाधनों का दोहन तो होता है, लेकिन स्थानीय आबादी को उसका लाभ नहीं मिलता.

सुरक्षा का सबसे बड़ा सिरदर्द

1948 से जारी बलूच विद्रोह अब अपने सबसे उग्र चरण में पहुंच चुका है. विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और चीन के आर्थिक हित BLA के साथ सीधे टकराव की स्थिति बना रहे हैं. चीनी इंजीनियरों पर 2023 और 2024 में हुए हमले इसका साफ उदाहरण हैं.

विश्लेषकों का मानना है कि आर्थिक महत्वाकांक्षाओं को स्थानीय असंतोष से अलग करके नहीं देखा जा सकता, और यही बात वाशिंगटन और बीजिंग के लिए सबसे बड़ी चुनौती है.

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