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जंग इंसानों की, मार झेल रहे बेजुबान! खौफ की असली तस्वीर है लेबनान का ये VIDEO

लेबनान के साउथ कस्बों में युद्ध ने न केवल इंसानों को प्रभावित किया है बल्कि जानवरों की सुरक्षा पर भी गंभीर खतरा पैदा कर दिया है. मिसाइल हमलों और बमबारी के बीच छोटे जानवर जैसे कुत्ते और पिल्ले भी डर और असुरक्षा में जी रहे हैं.

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साउथ लेबनान में अटैक के बाद बेजुबान भी सहम जाते हैं
साउथ लेबनान में अटैक के बाद बेजुबान भी सहम जाते हैं

जंग जारी है. मिसाइल अटैक, द्रोन हमले, बमबारी ने आबादी को नुकसान पहुंचाया. शहर खंडहरों में तब्दील हो रहे हैं और लोग बदहवासी में जी रहे हैं. हर पल डर से भरा और हर वक्त मौत का साया. आपने ये सारी बातें सिर्फ इंसानों को ही सोचकर पढ़ी, देखी या समझीं होंगी. क्योंकि जंग की आग भी इंसानों की भड़काई हुई तो हम-आप समझते हैं कि इसकी जद में भी सिर्फ इंसान ही आ रहे होंगे. नहीं... बिल्कुल नहीं. 

क्योंकि खौफ नस्ल नहीं देखता है. धमाके इंसान या बेजुबान में फर्क करते हुए किसी को अपनी जद में नहीं लेते हैं. कहीं किसी जगह जब एक मिसाइल भी गिरती है तो इसकी चोट, इसका जख्म उन सभी पर बराबर असर डालता है जो आसपास मौजूद होते हैं. फिर चाहे वो चाहे कुत्ते-बिल्ली या कोई दूसरे जानवर ही क्यों न हों. 

खौफ में हैं बेजुबान
साउथ लेबनान के कस्बों में, जब हवाई हमले रात के आसमान को चीरते हैं, तब सबसे छोटे जीव भी इस खौफ को महसूस करते हैं. जिन शांत गलियों में जो कुत्ते कभी आजादी से घूमते थे, वे अब सहमे नजर आते हैं. धमाकों की सिरहन को वे भी महसूस करते हैं और जब अलर्ट के सायरन बजते हैं तो वह भी बदहवासी में इधर-उधर भागते नजर आते हैं. उनके लिए कोई बंकर, कोई बेसमेंट तो है नहीं. तो बेचारे टूटी दीवारों से सटकर, छोड़ी हुई गाड़ियों के नीचे छिपकर या कहीं भी ऐसी ही कोई 'सुरक्षित जगह' ढूंढने की कोशिश करते हैं, जहां वे खुद को बचा सकें.

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छोटे-छोटे पिल्ले, जो अभी दुनिया को समझ भी नहीं पाए हैं, ज़मीन के कांपने के साथ सहम जाते हैं. उनकी दुनिया, जो कभी खाने के टुकड़ों और थोड़ी सी इंसानी दया तक सीमित थी, अब डर, शोर और जीवित रहने की जद्दोजहद में बदल चुकी है. वहां मौजूद लोग बताते हैं कि हर हमले के साथ जानवर घबराकर भागने लगते हैं. पूंछ दबाकर, धड़कते दिल के साथ, जहां भी जगह मिले, वहीं छिपने की कोशिश करते हैं. कुछ लोग, अपनी जान के खतरे के बावजूद, उनके लिए खाना छोड़ते हैं दरवाज़े खुले रखते हैं. इस अराजकता के बीच इंसानियत की छोटी-छोटी मिसालें पेश करते हैं.

कुत्तों और बिल्लियों के लिए भी मुश्किल
ऐसा ही एक वीडियो और कुछ तस्वीरें साउथ लेबनान से सामने आई हैं. जहां किसी बिल्डिंग पर हमला हुआ है. बिल्डिंग का कांच इधर-उधर बिखरा पड़ा है. इसी बीच बिल्डिंग के एक कोने में एक-दो कुत्ते सहमे हुए से खुद को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं. एक पिल्ला जो छोटा ही है, घबराया लग रहा है और इधर-उधर भटक कर अपने लिए कोई सही-सलामत जगह देख रहा है.

 जंग सीमाएं बदल देती है, लेकिन एक गहरी सच्चाई भी सामने रखती है, जहां दर्द न भाषा देखता है, न सरहद, न ही प्रजाति. हवाई हमलों के बीच की खामोशी में एक सच्चाई छिपी है, हर जीवन, चाहे कितना भी छोटा क्यों न हो, सुरक्षा चाहता है. जंग इंसानों की होती है, लेकिन इसकी मार हर उस जिंदगी पर पड़ती है, जो सिर्फ जीना चाहती है—चाहे वो इंसान हो या बेजुबान

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