संयुक्त राष्ट्र महासभा के विशेष सत्र में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के ब्लॉकेड पर चर्चा के दौरान इजरायली राजदूत ने चीन, फ्रांस और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों को घेरते हुए सवाल खड़े किए. उन्होंने इन देशों पर ईरान के साथ सीक्रेट समझौते करने का आरोप लगाया. उन्होंने पूछा कि सुरक्षित रास्ता पाने के लिए इन देशों ने ईरान को कितनी कीमत चुकाई और 'चेक' दिखाने की मांग की. राजदूत ने कहा कि यह समझौते अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ हैं और इससे क्षेत्र की स्थिरता खतरे में है.
इजरायली राजदूत ने सीधे तौर पर फ्रांस के राजदूत बॉनफॉन से पूछा कि 3 अप्रैल को अन्य जहाजों के रोके जाने के बावजूद फ्रांसीसी जहाज कैसे गुजर गया. उन्होंने तंज कसते हुए कहा, 'आपने ईरान को कितने पैसे दिए? हमें वह चेक दिखाइए.' राजदूत ने आरोप लगाया कि कूटनीतिक मर्यादाओं के पीछे छिपकर ईरान के साथ सीक्रेट वित्तीय लेन-देन किया जा रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है.
उन्होंने महासभा में चीनी प्रतिनिधि राजदूत कोंग और पाकिस्तानी प्रतिनिधि राजदूत अहमद से भी कड़े सवाल पूछे गए. इजरायली राजदूत ने कहा कि पाकिस्तान ने स्वीकार किया है कि एक डील हुई थी तो अब उसे सबके साथ साझा क्यों नहीं किया जा रहा.
उन्होंने चीन से भी उस समझौते के बारे में पूछा, जिसके तहत उसके जहाज सुरक्षित निकल रहे हैं. इन सवालों पर दोनों देशों की चुप्पी ने कई संदेह पैदा कर दिए हैं.
राजदूत ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि एक तरफ दुनिया भर के जहाज रोके जा रहे हैं और दूसरी तरफ कुछ देश नियमों को ताक पर रखकर 'सीक्रेट डील' कर रहे हैं. उन्होंने इसे सुरक्षा परिषद की बड़ी विफलता बताया. इजरायल का कहना है कि इस तरह के समझौतों से ईरानी शासन को बढ़ावा मिल रहा है जो क्षेत्र की स्थिरता के लिए खतरनाक है.
इजरायली राजदूत ने का ये बयान ऐसे समय में आया है, जब ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से बंद करने का ऐलान किया है और भारतीय जहाजों समेत कई जहाजों को वापस से तुरंत लौटने का निर्देश दिया. जिसका एक ऑडियो भी सामने आया है जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.