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Ground Report: घर तबाह, बंकर बने सुरक्षा कवच... ईरान से जंग के बीच इजरायल में ऐसे हैं हालात

ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध में राजधानी तेल अवीव लगातार हमलों का केंद्र बनी हुई है. ईरानी मिसाइलों से कई घरों को नुकसान पहुंचा है, लेकिन मजबूत बम शेल्टरों की वजह से आम लोग सुरक्षित बच रहे हैं. आजतक संवाददाता श्वेता सिंह की ग्राउंड रिपोर्ट में दिखाया गया कि मिसाइल से घर तबाह हो सकता है, लेकिन शेल्टर के भीतर लोग सुरक्षित रहते हैं. वहीं ज़रज़ीर में हुए हमले में 58 लोग घायल हुए.

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इजरायल के कई बड़े शहरों पर युद्ध का असर दिख रहा है.
इजरायल के कई बड़े शहरों पर युद्ध का असर दिख रहा है.

मिडिल-ईस्ट में चल रहा युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है. ईरान लगातार इजरायल को निशाना बना रहा है और हमलों का सबसे बड़ा केंद्र राजधानी तेल अवीव बना हुआ है. ईरान की ओर से किए जा रहे मिसाइल हमलों के बीच तेल अवीव के लोग बड़े पैमाने पर बंकरों का इस्तेमाल कर रहे हैं. खास बात यह है कि यहां के कई घरों में ही मजबूत बम शेल्टर बनाए गए हैं, जिनकी वजह से भारी हमलों के बावजूद आम लोगों की जान बच रही है. उत्तरी इजरायल के ज़रज़ीर में कल तड़के हुए हमले में 58 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. यह एक अरब बस्ती है और उस समय लोग सेहरी की तैयारी कर रहे थे, इसलिए अधिकांश लोग सायरन बजने पर भी सुरक्षित स्थानों या बंकरों तक नहीं पहुंच पाए.

तेल अवीव से ग्राउंड रिपोर्ट कर रहीं आजतक संवाददाता श्वेता सिंह ने ऐसे ही एक घर के अंदर से रिपोर्ट करते हुए दिखाया कि किस तरह ईरानी मिसाइल के हमले से घर का बाहरी हिस्सा लगभग खंडहर बन चुका है, लेकिन घर के बीचों-बीच बने बम शेल्टर के भीतर कोई नुकसान नहीं हुआ. रिपोर्ट में दिखाया गया कि जैसे ही उस मजबूत दरवाजे को बंद किया जाता है, मिसाइल के धमाके का असर शेल्टर के भीतर नहीं पहुंच पाता.

दीवारें टूट चुकी, बिखरा पड़ा सामान
रिपोर्ट के मुताबिक जिस घर पर मिसाइल गिरी, उसके हर कमरे में नुकसान के निशान दिखाई देते हैं. दीवारें टूट चुकी हैं, सामान बिखर गया है और बाहर का हिस्सा लगभग गिर चुका है. लेकिन घर के बीचों-बीच बने शेल्टर का दरवाजा बंद होने के बाद अंदर मौजूद लोग सुरक्षित रहे. बताया गया कि इन बम शेल्टरों के निर्माण के लिए विशेष तकनीकी मानक तय होते हैं और इन्हें बेहद मजबूत बनाया जाता है, ताकि विस्फोट का असर भीतर तक न पहुंच सके.

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युद्ध के बीच एक बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब दोनों देश दो हफ्तों से एक-दूसरे पर पूरी ताकत से हमले कर रहे हैं, तो फिर इजरायल में आम लोगों को अपेक्षाकृत कम नुकसान क्यों हो रहा है. कई जगह घरों को नुकसान जरूर पहुंचा है, लेकिन लोग सुरक्षित बच जा रहे हैं. इसी सवाल का जवाब तेल अवीव से श्वेता सिंह अपनी ग्राउंड रिपोर्ट के जरिए दे रही हैं.

ईरान की ओर से दावा किया जाता रहा है कि उसने तेल अवीव पर मिसाइल हमले किए हैं और कई इमारतों को नुकसान पहुंचाया है. वित्तीय इमारतों पर भी हमले का दावा किया गया. जमीन पर कई जगह घर टूटे हुए भी दिखाई देते हैं, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग सुरक्षित रहते हैं. यही वजह है कि सवाल उठता है कि क्या ईरान की मिसाइलें उतनी प्रभावी नहीं हैं या फिर इजरायल का सुरक्षा तंत्र बेहद मजबूत है.

इजरायल के कई बड़े शहरों पर दिखा युद्ध का असर
युद्ध का असर इजरायल के अन्य बड़े शहरों पर भी देखने को मिल रहा है. इजरायल का तीसरा सबसे बड़ा शहर हाइफा भी हमलों की जद में रहा है. ईरान ने दावा किया कि उसने हाइफा पर हमला करके ईरानी तेल रिफाइनरी पर हुए हमले का जवाब दिया है. हालांकि युद्ध के दौरान किए जाने वाले दावों की सच्चाई हमेशा पूरी तरह स्पष्ट नहीं होती, इसलिए ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए इन दावों की पड़ताल की जा रही है.

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दूसरी ओर ईरान की राजधानी तेहरान से भी युद्ध के अलग दृश्य सामने आ रहे हैं. वहां एक ऐसे कैफे के तबाह होने की बात सामने आई है, जहां ऑटिज़्म और डाउन सिंड्रोम से जूझ रहे लोग अक्सर मिलते-जुलते और समय बिताते थे. बताया गया कि अमेरिकी और इजरायली हमलों में वह जगह पूरी तरह नष्ट हो गई.

तेल अवीव में सामान्य जीवन की झलक
इसके उलट तेल अवीव में सामान्य जीवन की झलक भी देखने को मिलती है. युद्ध के बीच भी लोग मॉल में खरीदारी करते, खाते-पीते और घूमते नजर आते हैं. इसकी वजह वहां की मजबूत सुरक्षा व्यवस्था है. तेल अवीव के ऐतिहासिक डिज़ेनगॉफ़ सेंटर में मौजूद मॉल इसका बड़ा उदाहरण है. यह मॉल केवल एक व्यापारिक परिसर नहीं बल्कि एक विशाल सुरक्षा ढांचा भी है. यह जमीन के नीचे कई मंजिल तक बना हुआ है और इसे इस तरह तैयार किया गया है कि हमले की स्थिति में लोग यहां सुरक्षित रह सकें.

ग्राउंड रिपोर्ट में बताया गया कि यह मॉल सड़क के स्तर से नीचे कई फ्लोर तक फैला हुआ है. यहां शॉपिंग एरिया के साथ-साथ बम शेल्टर जैसी सुरक्षा भी मौजूद है. लोग सामान्य दिनों की तरह खरीदारी करते दिखाई देते हैं और जरूरत पड़ने पर यही जगह सुरक्षित शरणस्थल बन जाती है.

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मॉल के अंदर बच्चों के खेलने के लिए प्ले एरिया भी है. युद्ध के बीच साइरन बजने की आशंका बनी रहती है, लेकिन इसके बावजूद लोग यहां सामान्य जीवन जीने की कोशिश करते दिखाई देते हैं. बुजुर्ग, युवा और परिवार यहां बिना घबराहट के समय बिताते हैं.

युद्ध के बीच ईरानी जोड़े की शादी का जश्न
युद्ध के बीच ईरान से भी अलग तरह की तस्वीरें सामने आ रही हैं. एक वीडियो में हथियारों और गोला-बारूद के बक्सों के बीच एक ईरानी जोड़ा अपनी शादी का जश्न मनाता दिखा. उनके आसपास हथियारबंद समर्थक खड़े थे और पीछे मशीनगन भी दिखाई दे रही थी. इसे अमेरिका और इजरायल की बमबारी के बीच सरकार के समर्थन के प्रतीक के रूप में देखा गया.

इन तमाम तस्वीरों के बीच एक बड़ा अंतर साफ दिखाई देता है. एक ओर ईरान हमले की क्षमता बढ़ाने के लिए लंबे समय से भूमिगत मिसाइल ठिकाने और सुरंगें बनाता रहा है, जिन्हें 'मिसाइल सिटी' कहा जाता है. वहीं दूसरी ओर इजरायल ने अपने शहरों में ऐसे बंकर, घरों में शेल्टर और भूमिगत संरचनाएं तैयार की हैं, जिनका उद्देश्य आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है.

इसी वजह से तेल अवीव जैसे शहरों में भारी हमलों के बावजूद कई बार आम लोग सुरक्षित हैं. मजबूत बंकर, घरों के भीतर बने शेल्टर और जमीन के नीचे बने बड़े ढांचे युद्ध के बीच इजरायल के नागरिकों के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम कर रहे हैं.

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