मिडिल ईस्ट की जंग के बीच एक बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है. इजरायल ने अचानक ईरान के दो शीर्ष नेताओं को अपनी 'हिट-लिस्ट' से बाहर कर दिया है. इनमें विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ शामिल हैं. यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि जंग समाप्त करने के लिए इन नेताओं से बात की जा सके. इस बीच इजरायल ने होर्मुज स्ट्रेट पर पहरेदारी लगाने वाले IRGC के नेवी चीफ अलीरेजा तंगसेरी को मार गिराया है.
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अराघची और गालिबाफ को हिट-लिस्ट से हटाने का फैसला सीधे-सीधे कूटनीतिक दबाव का नतीजा हो सकता है. एक पाकिस्तानी सूत्र ने दावा किया कि पाकिस्तान ने अमेरिका से साफ कहा था कि अगर इन दोनों नेताओं को भी खत्म कर दिया गया, तो बातचीत के लिए कोई बचा ही नहीं रहेगा. इसके बाद वॉशिंगटन ने इजरायल को पीछे हटने को कहा.
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हालांकि इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट भी बताती है कि इन दोनों नेताओं को फिलहाल 4-5 दिनों के लिए निशाने से हटाया गया है, ताकि संभावित शांति वार्ता की गुंजाइश बनी रहे. यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है - क्या ये सिर्फ अस्थायी राहत है, या इसके पीछे कोई बड़ी रणनीति चल रही है?
दरअसल, मौजूदा हालात में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन एक डील की कोशिश में है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने पाकिस्तान के जरिए ईरान को 15-सूत्रीय का प्रस्ताव भेजा था. इसमें यूरेनियम एनरिचमेंट रोकना, बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम सीमित करना और क्षेत्रीय सहयोगियों को फंडिंग कम करना जैसी शर्तें शामिल हैं.
दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र अब इस पूरे संघर्ष में "मध्यस्थ" की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहे हैं. खासकर पाकिस्तान, जिसने वॉशिंगटन और तेहरान दोनों से सीधा संपर्क बनाए रखा है, संभावित बातचीत का केंद्र बनता दिख रहा है.
अब सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या इन दो नेताओं को जानबूझकर "बचाया" गया है, ताकि भविष्य में इन्हें बातचीत या सत्ता के नए समीकरण में इस्तेमाल किया जा सके? कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अगर ईरान में सत्ता संतुलन बदलता है, तो ऐसे ही चेहरे सामने लाए जा सकते हैं, जो बातचीत के लिए तैयार हों.
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हालांकि अब्बास अराघची ने साफ कहा है कि ईरान प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है, लेकिन अभी बातचीत का कोई इरादा नहीं है. इनके अलावा ईरान की तरफ से एक अलग प्रस्ताव भी ट्रंप प्रशासन को भेजा गया है.
मसलन, यह कदम सिर्फ सैन्य रणनीति नहीं, बल्कि गहरी कूटनीतिक चाल का हिस्सा माना जा रहा है. जंग के मैदान में जहां मिसाइलें चल रही हैं, वहीं पर्दे के पीछे बातचीत, दबाव और संभावित सत्ता समीकरण भी तेजी से बदल रहे हैं. आने वाले कुछ दिन तय करेंगे कि ये "हिट-लिस्ट से हटाना" शांति की ओर पहला कदम है या किसी बड़े राजनीतिक खेल की शुरुआत.