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'अमेरिकी जासूसों की जानकारी दो, पाओ 1 लाख डॉलर का इनाम', इराकी गुटों का बड़ा ऐलान

इराकी रेजिस्टेंस ने इराक और पड़ोसी क्षेत्रों में सक्रिय अमेरिकी सैन्य और खुफिया अधिकारियों की सटीक जानकारी देने पर 150 मिलियन इराकी दीनार ($1,14,500) के इनाम की घोषणा की है. गुटों का दावा है कि अमेरिकी अधिकारी अब रिहायशी इलाकों में छिप रहे हैं.

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इराकी गुटों ने अमेरिकी कर्मियों की जानकारी पर 1.14 लाख डॉलर का इनाम रखा है. (Photo: Reuters/File)
इराकी गुटों ने अमेरिकी कर्मियों की जानकारी पर 1.14 लाख डॉलर का इनाम रखा है. (Photo: Reuters/File)

पश्चिम एशिया में जारी भीषण तनाव के बीच इराक के सशस्त्र गुटों 'इस्लामिक रेजिस्टेंस' ने अमेरिकी सैन्य और खुफिया कर्मियों को लेकर एक सनसनीखेज ऐलान किया है. रेजिस्टेंस गुटों ने इराक और आसपास के क्षेत्रों में काम कर रहे अमेरिकी सैन्य, खुफिया और जासूसी एजेंसियों के अधिकारियों के बारे में सटीक जानकारी देने वाले के लिए भारी-भरकम  इनाम की घोषणा की है.

शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक बयान में रेजिस्टेंस गुटों ने कहा कि जो कोई भी अमेरिकी सैन्य या उच्च स्तरीय खुफिया अधिकारियों की पहचान या उनके ठिकानों की सटीक जानकारी देगा, उसे 150 मिलियन इराकी दीनार (लगभग $1,14,500 यानी भारतीय मुद्रा में करीब 95 लाख रुपये से अधिक) का इनाम दिया जाएगा. 

यह इनाम इराकी नागरिकों के साथ-साथ वहां रह रहे विदेशी निवासियों के लिए भी है. बयान में दावा किया गया है कि जमीनी स्तर पर रेजिस्टेंस की बढ़ती ताकत की वजह से अमेरिकियों के पास सुरक्षा के विकल्प कम हो गए हैं. 

यह भी पढ़ें: ईराक-सीरिया में अमेरिका का लेट नाइट एक्शन, 85 टारगेट पर भीषण एयरस्ट्राइक, 18 लोग मारे गए, कमांड सेंटर ध्वस्त

गुटों के अनुसार, "अमेरिकी अधिकारियों को अब मजबूर होकर वैकल्पिक और रिहायशी इलाकों (Civilian Locations) का सहारा लेना पड़ रहा है, जिन्हें वे सुरक्षित मान रहे हैं." रेजिस्टेंस ने जोर देकर कहा कि जानकारी देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी और इसके लिए सुरक्षित चैनल तैयार किए गए हैं.

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तनाव की चरम सीमा
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब महज एक दिन पहले ही इन गुटों ने इराक में अमेरिकी वायुसेना के एक रिफ्यूलिंग विमान (KC-135) को मार गिराने का दावा किया था, जिसमें चालक दल के सभी 6 सदस्य मारे गए थे. इस ताजा इनाम की घोषणा के बाद क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों और दूतावास कर्मियों पर खतरा और भी गहरा गया है.
 

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