ईरान युद्ध को लेकर शांति वार्ता की बातें तो हुई हैं, लेकिन अब तक युद्ध विराम को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है. ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने अपने वादों को पूरा नहीं किया और शांति वार्ता की शर्तें पूरी नहीं हुई हैं. इस बीच आजतक की टीम तेहरान पहुंची.यहां गोलिस्तान पैलेस में हमले के कारण काफी क्षति पहुंची है.
14वीं सदी के इस गोलिस्तान पैलेस के अंदर भारी नुकसान देखा जा सकता है. यह शीशों से बना महल है, इसलिए यहां जाना अब और भी खतरनाक हो गया है.
इसी वजह से यहां प्रवेश करने से पहले सुरक्षा का खास ध्यान रखना पड़ रहा है और हेलमेट का इस्तेमाल किया जा रहा है.
इस बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बेहद संवेदनशील इलाका बना हुआ है. ईरान पहले ही साफ कर चुका है कि उसकी अनुमति के बिना किसी भी जहाज को यहां से गुजरने नहीं दिया जाएगा. इसके बावजूद अमेरिका यह कोशिश कर रहा है कि जहाजों की आवाजाही कैसे जारी रखी जाए.
ईरान फिलहाल अपने रुख पर मजबूती से कायम है और यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण उसी के हाथ में है. साथ ही, ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका और ईरान के बीच कोई शांति समझौता नहीं होता, तब तक वह अपने रुख में बदलाव नहीं करेगा.
मॉस्किटो फ्लीट ईरान की ताकत
एक बहुत बड़ी चीज जो ईरान के पास है, जिसे उसने कई सालों से प्लान किया है वह है 'मॉस्किटो फ्लीट'. इसे छोटे-छोटे नाव हैं, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर तैनात हैं. इन बोट्स को सैटेलाइट से ट्रैक करना भी मुश्किल होता है, और यही बोट्स आज ईरान के काम आ रही हैं.
क्योंकि बड़े जहाज़ों को तो अमेरिका ने ध्वस्त करने का दावा किया है, यह कहते हुए कि उसने ईरान की पूरी नेवी खत्म कर दी है. लेकिन अगर पूरी नेवी खत्म हो गई है, एयर फोर्स खत्म हो गई है और मिलिट्री पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है, तो फिर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अब भी ईरान का नियंत्रण कैसे बना हुआ है?
दरअसल, ईरान ने बड़ी संख्या में छोटे-छोटे नाव तैनात कर रखे हैं, जिनमें गन और रॉकेट लगे हुए हैं. ये जब वार्निंग शॉट्स छोड़ते हैं, तो किसी भी जहाज के लिए वहां से निकलना मुश्किल हो जाता है. क्योंकि अगर कोई भी शॉट या रॉकेट जहाज पर लग जाए, तो नुकसान उसी देश का होता है, जिस देश का वह जहाज है.