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ब्लॉकेड के बावजूद होर्मुज पार कर खाड़ी में घुसा ईरानी सुपरटैंकर, अमेरिका को खुली चुनौती!

ईरान का सुपरटैंकर होर्मुज स्ट्रेट पार कर खाड़ी में पहुंचा, जिससे अमेरिका के ब्लॉकेड पर सवाल खड़े हो गए हैं. यह कदम दिखाता है कि तेहरान दबाव में झुकने को तैयार नहीं है, जबकि अमेरिका सख्ती बढ़ाकर उसे रोकने की कोशिश कर रहा है.

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अमेरिकी ब्लॉकेड के बीच दूसरे सुपरटैंकर ने होर्मुज पार किया है. (सांकेतिक तस्वीर)
अमेरिकी ब्लॉकेड के बीच दूसरे सुपरटैंकर ने होर्मुज पार किया है. (सांकेतिक तस्वीर)

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच एक नई घटना ने हालात को और दिलचस्प बना दिया है. ईरान ने अमेरिकी दबाव को दरकिनार करते हुए अपना सुपरटैंकर खाड़ी में भेज दिया है, जिससे अमेरिका के ब्लॉकेड के प्रभाव पर सवाल खड़े हो गए हैं.

दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस्लामाबाद वार्ता फेल होने के बाद होर्मुज स्ट्रेट पर ब्लॉकेड का ऐलान किया था. इसका मकसद था ईरान की तेल सप्लाई को रोककर उसकी अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाना. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, ब्लॉकेड शुरू होने के बाद कई जहाजों को वापस लौटना पड़ा और अब तक कोई भी जहाज इस घेराबंदी को तोड़ नहीं पाया था.

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लेकिन इसी बीच एक चौंकाने वाली खबर सामने आई. ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी ने दावा किया कि अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद एक सुपरटैंकर होर्मुज स्ट्रेट पार कर ईरान के इमाम खोमैनी पोर्ट की ओर बढ़ा है. हालांकि इस जहाज की पहचान स्पष्ट नहीं की गई, लेकिन शिपिंग डेटा के मुताबिक "RHN" नाम का एक वीएलसीसी (वेरी लार्ज क्रूड कैरियर) खाड़ी में दाखिल हुआ है.

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ब्लॉकेड के बावजूद ईरानी सुपरटैंकरों का मूवमेंट

यह जहाज करीब 20 लाख बैरल तेल ढोने की क्षमता रखता है, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत काफी बढ़ जाती है. अलअरबिया की रिपोर्ट के मुताबिक इससे एक दिन पहले "Alicia" नाम का एक और टैंकर भी इसी रास्ते से गुजरा था, जो इराक की ओर जा रहा था.

इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि ईरान पूरी तरह झुकने को तैयार नहीं है. जहां एक तरफ अमेरिका ब्लॉकेड के जरिए दबाव बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी तरफ तेहरान अपने विकल्प खुले रखे हुए है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक टेस्ट हो सकता है. यानी ईरान यह देखना चाहता है कि अमेरिका कितनी सख्ती से अपने ब्लॉकेड को लागू करता है.

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10 जहाजों को रोकने का अमेरिका का दावा

हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि अब तक 10 जहाजों को रोका जा चुका है और कई टैंकरों को वापस लौटना पड़ा है. लेकिन इस सुपरटैंकर की एंट्री ने यह दिखा दिया कि पूरी तरह से रोक लगाना आसान नहीं है. इस बीच अमेरिका ने चेतावनी दी है कि वह ईरानी तेल खरीदने वाले देशों पर "सेकेंडरी सैंक्शन" भी लगा सकता है. यानी जो भी देश या कंपनी ईरान के साथ तेल व्यापार करेगी, उसे भी अमेरिकी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है. 

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आंकड़ों के मुताबिक, ईरान फिलहाल रोजाना करीब 35 लाख बैरल तेल का उत्पादन कर रहा है और मार्च में उसने करीब 18.4 लाख बैरल प्रतिदिन निर्यात किया. यानी जंग और ब्लॉकेड के बावजूद उसकी सप्लाई पूरी तरह नहीं रुकी.

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