ईरान के मिनाब शहर में जिस गर्ल्स स्कूल पर जो मिसाइल हमला हुआ था, उसे अमेरिका ने ही किया था. अमेरिकी सेना की जांच में इस बात का खुलासा हुआ. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना की जांच से पता चला है कि मिनाब में स्कूल पर हुए मिसाइल हमले के लिए अमेरिका जिम्मेदार है. इस हमले में 175 लोग मारे गए थे. यह हमला शायद टारगेट चुनने में गलती की वजह से हुआ था. शुरुआती जांच में पता चला है कि यूएस सेंट्रल कमांड के अधिकारियों ने हमले के लिए टारगेट कोऑर्डिनेट्स बनाने के लिए डिफेंस इंटेलिजेंट एजेंसी से मिले पुराने डेटा का इस्तेमाल किया था.
NYT की रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका ने टॉमहॉक मिसाइल से मिनाब शहर के शाजराह तैयबेह एलिमेंट्री स्कूल पर हमला किया था. ये स्कूल ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) के एक नेवल बेस के पास था. हालांकि, अमेरिकी सेना का कहना है कि ये नतीजे सिर्फ शुरुआती हैं और कई जरूरी सवाल हैं कि पुराने डेटा को दोबारा चेक क्यों नहीं किया गया.
क्या AI टूल से हुई गलती?
ईरान में चल रहे युद्ध में अमेरिका AI का जमकर इस्तेमाल कर रहा है. AI की मदद से सिर्फ 24 घंटे में ईरान में 1,000 टारगेट पर निशाना साधा था. इस बात की भी चर्चा है कि एडवांस्ड AI सिस्टम की वजह से यह गलती हो सकती है.
अमेरिकी सेना एंथ्रोपिक के AI मॉडल क्लाउड का इस्तेमाल करती है, जिसे वॉर टेक कंपनी Palantir के साथ पार्टनरशिप के जरिए इस्तेमाल किया है. द वॉशिंगटन पोस्ट और द गार्डियन ने बताया कि क्लाउड Palantir के मेवेन स्मार्ट सिस्टम में लगा है, जो मिलिट्री को रियल टाइम में सटीक टारगेट लोकेशन बताता है. शुरुआत जांच से पता चलता है कि हो सकता है कि स्कूल की जगह बदलने को AI टूल ने ध्यान में नहीं रखा हो.
इस जांच रिपोर्ट से ट्रंप का दावा झूठा साबित होता है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान ने खुद स्कूल पर बमबारी की थी. वहीं, अमेरिकी सरकार का कहना था कि उनकी सेना ने सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला नहीं किया और वह इस मामले की जांच कर रहे हैं.
ईरान ने लगाया वॉर क्राइम का आरोप
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने X पर स्कूल पर हुए हमले का वीडियो फुटेज पोस्ट किया और अमेरिका पर युद्ध अपराध का आरोप लगाया. बाघेई ने लिखा, अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइल ने 28 फरवरी को मिनाब शहर में 168 छोटे फरिश्तों को मार डाला. यह एक ऐसा युद्ध अपराध है जिसे माफ नहीं किया जा सकता और जिसे बिना सजा के नहीं छोड़ा जाना चाहिए.
इससे पहले, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने पिछले हफ्ते छोटी-छोटी सामूहिक कब्रों के ड्रोन शॉट्स शेयर किए थे और ट्रंप पर निशाना साधा था. उन्होंने पोस्ट किया, 'मिस्टर ट्रंप ने जिस 'बचाव' का वादा किया था, वह असल में ऐसा दिखता है.'
ईरान ने इस हमले को 'बर्बर' और 'अमेरिका के कथित अनगिनत अपराधों के इतिहास में एक और काला पन्ना' बताया था.