मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब खुले सैन्य टकराव की दिशा में बढ़ता दिख रहा है. ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया है कि उसने अमेरिका के दो ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टरों को निशाना बनाया है. यह दावा ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर 48 घंटे बाद भीषण हमले की चेतावनी दी है.
ईरान की संयुक्त सैन्य कमान के प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फागरी ने कहा कि शुक्रवार को दुश्मन के कई ठिकानों पर हमले किए गए, जिनमें ये हेलिकॉप्टर भी शामिल थे. उन्होंने इस दिन को अमेरिकी और जायोनी दुश्मनों के लिए काला और अपमानजनक शुक्रवार बताया. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है.
अमेरिकी मीडिया के कुछ हिस्सों में हमले की खबरें जरूर सामने आई हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है. ईरान ने इससे पहले भी दो अमेरिकी लड़ाकू विमानों को मार गिराने का दावा किया था. इन दावों के बीच अमेरिकी सेना दक्षिण-पश्चिमी ईरान के एक दूरदराज इलाके में लापता पायलट की तलाश में जुटी हुई है.
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रिपोर्ट के मुताबिक, एक हमले में अमेरिकी A-10 थंडरबोल्ट II को निशाना बनाया गया, जो फारस की खाड़ी में गिर गया. वहीं F-15E स्ट्राइक ईगल पर भी हमला हुआ, जिसमें सवार दो पायलटों में से एक को बचा लिया गया, जबकि दूसरे की तलाश जारी है. ईरानी मीडिया ने इन हमलों के वीडियो भी जारी किए, जिससे दावों को बल मिला है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह कहते रहे हैं कि अमेरिका ने इस संघर्ष में ईरान की सैन्य ताकत को कमजोर कर दिया है. लेकिन ईरान के ताजा दावे इस नैरेटिव को चुनौती देते नजर आ रहे हैं. ईरान ने न सिर्फ अमेरिकी विमानों को गिराने का दावा किया, बल्कि यह भी कहा कि अमेरिकी दावे हकीकत से दूर हैं.
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ईरान ने कुवैत में अमेरिकी CH-47 चिनूक हेलीकॉप्टर पर भी हमला करने का दावा किया है. इससे साफ है कि संघर्ष अब सिर्फ सीमित हमलों तक नहीं, बल्कि व्यापक सैन्य टकराव का रूप लेता जा रहा है. F-15E स्ट्राइक ईगल अमेरिकी वायुसेना का बेहद आधुनिक मल्टी-रोल लड़ाकू विमान है, जो हवा-जमीन दोनों पर सटीक हमले करने में सक्षम है.
इसमें अत्याधुनिक रडार और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम लगे होते हैं. वहीं A-10 थंडरबोल्ट II भले ही पुराना प्लेटफॉर्म हो, लेकिन ग्राउंड अटैक मिशन में इसकी ताकत अब भी बेहद अहम मानी जाती है. यह टैंक और बख्तरबंद ठिकानों को तबाह करने में माहिर है. ऐसे में इन विमानों को नुकसान अमेरिका के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.