मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच होर्मुज संकट का हल निकालने की लगातार कोशिश हो रही है. इसी बीच ईरान और ओमान ने इस मुद्दे पर बातचीत की है. वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर असर डाल रहे इस तनाव ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. सीमित आवाजाही, जहाजों की लंबी कतार और अमेरिका की सख्त चेतावनी ने हालात को जटिल बना दिया है.
ओमान के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि दोनों पक्षों ने होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए संभावित विकल्पों पर विचार किया. इसमें यह भी बताया गया कि दोनों देशों के विशेषज्ञों ने कई प्रस्ताव और सुझाव पेश किए हैं, जिनका अब अध्ययन किया जाएगा. दरअसल, वैश्विक ऊर्जा प्रवाह में बढ़ते व्यवधान के बीच यह बातचीत शुरू हुई है.
28 अक्टूबर को अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद तेहरान ने होर्मुज को प्रभावी रूप से अवरुद्ध कर दिया था. इसके बाद दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक पर संकट गहरा गया. 4 अप्रैल को उप विदेश मंत्रियों के स्तर पर हुई इस बैठक में दोनों देशों के विशेषज्ञ भी मौजूद थे. बैठक का मुख्य उद्देश्य व्यावहारिक समाधान खोजना था.
इससे क्षेत्रीय संघर्ष के बावजूद जहाज सुरक्षित रूप से गुजर सकें. यह घटनाक्रम ईरान के उन संकेतों के बाद सामने आया है, जिसमें कहा गया कि वो होर्मुज में जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए एक मसौदा प्रोटोकॉल तैयार कर रहा है. ईरान ने ओमान के साथ एक संयुक्त ढांचा तैयार करने की भी बात कही है, जिससे यातायात बेहतर तरीके से प्रबंधित किया जा सके.
शिपिंग डेटा के मुताबिक, ओमान से जुड़े कुछ जहाज असामान्य मार्गों से गुजरते देखे गए. इनमें तेल टैंकर और LNG वाहक जहाज शामिल थे. ये जहाज सामान्य गलियारों की बजाय ओमान के तट के करीब से होकर निकले. ईरान ने हाल के दिनों में केवल चुनिंदा जहाजों को ही गुजरने की अनुमति दी है. इसके चलते हजारों जहाज अब भी मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं.
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि अगर होर्मुज को समुद्री यातायात के लिए नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों को निशाना बना सकता है. ट्रंप ने कहा, "मंगलवार ईरान में पावर प्लांट डे और ब्रिज डे होगा. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ होगा. होर्मुज को खोलो, वरना अंजाम भुगतना होगा."