अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग को अब लगभग 35 दिन हो चुके हैं. दोनों ओर से मिसाइल हमले जारी हैं. अब ईरान ने इजरायल के पेटा टिकवा में एक ड्रोन फैक्ट्री को उड़ा दिया है. ईरान की सुपरसोनिक मिसाइल ने इजरायल ने वो तबाही मचाई है, कि पूरी फैक्ट्री खंडहर में तब्दील हो गई है.
सुपरसोनिक मिसाइल से हमला
इजरायल के सेंट्रल में पेटा टिक्वा वो जगह है, जहां ईरान की मिसाइल आकर गिरी. आजतक के प्रणय उपाध्याय ने मौके से जो हालात बयां किए वो रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं. उन्होंने घटना स्थल से पूरा ब्योरा देते हुए बताया कि इस हमले से हुई भारी तबाही और विनाश को साफ देखा जा सकता है. जिस तरीके के भयानक तस्वीरें सामने आई हैं उससे सुपरसोनिक मिसाइल के असर का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि एक पूरा कारखाना जलकर खंडहर में बदल गया है.
धमाके से हो गया था गड्ढा
दरअसल, माना जा रहा है कि यह फैक्ट्री इज़राइल की रक्षा जरूरतों के लिए ड्रोन तकनीक से जुड़ी हुई थी. इमरजेंसी रेस्पॉन्स टीमें लगातार काम कर रही हैं. यहां मिसाइल गिरने से एक बड़ा गड्ढा बन गया था, जिसे कुछ ही घंटों में भर दिया गया है. पास में ही ऊंची-ऊंची रिहायशी इमारतें भी हैं. अगर यह मिसाइल कुछ मीटर इधर-उधर गिरती, तो यह और विनाशकारी बन जाता, क्योंकि इससे सीधे एक बड़ा रिहायशी इलाका चपेट में आ जाता और भारी जनहानि होती. हालांकि, मिसाइल एक खुले इलाके में गिरी, जिससे नुकसान कुछ हद तक सीमित रहा.
लेकिन इसके बावजूद आप देख सकते हैं कि फैक्ट्री को कितना नुकसान हुआ है. इमारत का पूरा बाहरी हिस्सा टूट चुका है. अंदर के कई हिस्से, कमरे और ढांचा पूरी तरह तबाह हो गए हैं. मशीनें जल चुकी हैं, एसी यूनिट्स, वायरिंग और इंसुलेशन सब बाहर निकल आए हैं. यह दृश्य दिखाता है कि मिसाइल का असर कितना जबरदस्त था. यह भी एक बड़ा सवाल है कि तमाम दावों के बावजूद इज़राइल का मिसाइल डिफेंस सिस्टम इस मिसाइल को रोक नहीं सका. यह मिसाइल कैसे इस सुरक्षा कवच को भेदते हुए यहां तक पहुंची, यह जांच का विषय है.
बाल-बाल बचा रिहायशी इलाका
वाहनों और इमारत के बाकी हिस्से भी वीडियो और तस्वीरों में दिख रहे हैं, जो इस हमले से प्रभावित हुए हैं. यह जगह एक बार फिर इस युद्ध की भयावहता को दिखाती है. कल ईरान की ओर से करीब 6 मिसाइलें दागी गई थीं, जिन्होंने इज़राइल के अलग-अलग हिस्सों, जैसे बेइत शेमेश और अन्य इलाकों—को निशाना बनाया. इन हमलों में संपत्ति का नुकसान जरूर हुआ, लेकिन राहत की बात यह रही कि किसी की जान नहीं गई. फिर भी, अगर यह मिसाइल कुछ मीटर भी इधर-उधर गिरती, तो परिणाम बेहद विनाशकारी हो सकते थे. यह जगह उसी खतरे और तबाही की एक बड़ी मिसाल है, जो इस युद्ध में लगातार सामने आ रही है.