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'भारत अब एक महाशक्ति, उस पर कोई शर्तें नहीं थोप सकता', बोले अमेरिकी पत्रकार टकर कार्लसन

दुबई में आयोजित वर्ल्ड गवर्नमेंट समिट 2026 में मशहूर अमेरिकन टीवी होस्ट टकर कार्लसन ने कहा कि भारत अब एक महान शक्ति बन चुका है और उस पर शर्तें नहीं थोपी जा सकतीं. इंडिया टुडे ग्लोबल से बातचीत में उन्होंने भारत की संप्रभुता का समर्थन किया. कार्लसन ने कहा कि अमेरिका यह नहीं बता सकता कि भारत किससे तेल खरीदे.

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अमेरिकी टीवी होस्ट टकर स्वानसन मैकनियर कार्लसन. (Photo: AFP)
अमेरिकी टीवी होस्ट टकर स्वानसन मैकनियर कार्लसन. (Photo: AFP)

दुबई में वर्ल्ड गवर्नमेंट समिट 2026 का आयोजन हुआ. वैश्विक स्तर पर सत्ता के संतुलन में बदलाव इस समिट की थीम थी. मशहूर अमेरिकी टीवी होस्ट टकर कार्लसन ने बिना लाग-लपेट के इस समिट में अपनी बात रखी. इंडिया टुडे ग्लोबल से बातचीत में फॉक्स न्यूज के इस पूर्व होस्ट ने कहा कि भारत अब एक महान शक्ति बन चुका है और उस पर कोई अपनी शर्तें नहीं थोप सकता. अब उसके साथ बराबरी की बातचीत करनी होगी.' 

उन्होंने दशकों पुरानी अमेरिकी विदेश नीति की सोच को खारिज करते हुए कहा कि यह 25 साल पहले वाला भारत नहीं है, बल्कि पूरी तरह बदला हुआ देश है. कार्लसन ने खास तौर पर अमेरिका के उन प्रयासों की आलोचना की, जिनमें भारत पर रूस से तेल नहीं खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा, 'अमेरिका यह नहीं तय कर सकता कि भारत को कौन सा तेल खरीदना चाहिए. अफसोस की बात है कि लोग हकीकत को बहुत धीरे-धीरे स्वीकार करते हैं. उभरती शक्तियां अब उभर नहीं रही हैं बल्कि उनका समय आ चुका है.'

मोदी पर इतिहास की किताबें लिखी जाएंगी

टकर कार्लसन ने कहा कि अब भारत, चीन और रूस स्वतंत्र ताकत के केंद्र हैं, न कि किसी के जूनियर पार्टनर. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में पूछे जाने पर कार्लसन ने कहा, 'चाहे आपको मोदी पसंद हों या न हों, वह एक प्रभावशाली नेता हैं, इसमें कोई शक नहीं.' उन्होंने पीएम मोदी को उस दुर्लभ पीढ़ी के नेताओं में रखा जो इतिहास बनाएंगे. कार्लसन ने मोदी को पुतिन, ट्रंप, एर्दोगन, मोहम्मद बिन सलमान, मोहम्मद बिन जायद की श्रेणी में रखा, जिन पर भविष्य में इतिहास की किताबें लिखी जाएंगी. पश्चिमी नेताओं पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे नेता इतिहास में याद नहीं रखे जाएंगे.

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ट्रंप और बाइडन की विदेश नीति पर भी बोले

टकर कार्लसन ने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन की रूस नीति की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इससे अमेरिका और डॉलर दोनों को नुकसान हुआ है. उनके अनुसार, रूस को अलग-थलग करने की कोशिश उलटी पड़ी और वह चीन, भारत व मध्य पूर्व के और करीब चला गया. डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति पर उन्होंने इसे एक प्रयोग बताया, लेकिन कहा कि यह सजा नहीं बल्कि बातचीत की रणनीति थी. कार्लसन ने कहा कि वैश्विक शक्ति का संतुलन बदल चुका है. अब आदेश देने का दौर खत्म हो गया है, अब बातचीत का युग शुरू हो चुका है.
 

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