
अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते की सीजफायर तो हो गई, लेकिन दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्ते यानी होर्मुज की खाड़ी में हालात अभी भी सामान्य नहीं हैं. ईरान ने इस रास्ते पर अपनी शर्तें थोप दी हैं, एक नया रूट तय किया है और कहा है कि पुराने रास्ते में समुद्री सुरंगें बिछी हो सकती हैं.
दुनियाभर के जहाज अटके पड़े हैं और भारत के 20 जहाज भी इस जाम में फंसे हैं. भारत सरकार की बातचीत के बाद कुछ जहाज निकल पाए हैं, लेकिन अभी भी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है.
होर्मुज की खाड़ी है क्या और यह इतनी अहम क्यों है?
होर्मुज की खाड़ी एक बेहद संकरा समुद्री रास्ता है जो ईरान और ओमान के बीच से गुजरता है. यह सबसे संकरी जगह पर सिर्फ 29 समुद्री मील यानी करीब 54 किलोमीटर चौड़ा है.
इसकी खासियत यह है कि फारस की खाड़ी यानी फारस की खाड़ी से बाहर निकलने का यही एकमात्र रास्ता है. सऊदी अरब, यूएई, कुवैत, इराक जैसे तेल उत्पादक देशों का तेल और गैस इसी रास्ते से दुनिया तक पहुंचता है.
दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का बहुत बड़ा हिस्सा इसी खाड़ी से होकर गुजरता है. अगर यह रास्ता बंद हो जाए तो पूरी दुनिया में तेल की किल्लत हो सकती है और कीमतें आसमान छू सकती हैं.
ईरान ने क्या किया और नया रूट क्यों तय किया
जब अमेरिका और ईरान के बीच जंग जैसे हालात बने, तो ईरान ने इस रास्ते को अपने हिसाब से चलाना शुरू कर दिया. पहले ईरान ने जहाजों को Qeshm और Larak द्वीप के बीच के रास्ते से गुजारना शुरू किया.

यह पुराने रास्ते से अलग था और इस पर ईरान की सेना यानी आईआरजीसी का पूरा कंट्रोल था. आईआरजीसी यानी इस्लामी क्रांतिकारी गार्ड कोर, यह ईरान की सबसे ताकतवर फौजी ताकत है.
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अब सीजफायर के बाद भी ईरान ने एक नया नक्शा जारी किया है. जिसमें जहाजों के लिए नया रूट बताया गया है. इस नक्शे में कहा गया है कि पुराने मुख्य रास्ते में समुद्री सुरंगें यानी समुद्री बारूद हो सकती हैं इसलिए जहाजों को नए रास्ते से जाना चाहिए.
यह नया रास्ता ईरान के समुद्री किनारे के करीब से होकर जाता है. इसका मतलब यह है कि IRGC के लिए हर जहाज पर नजर रखना और उसे रोकना बहुत आसान हो जाता है.
क्या ईरान जहाजों से पैसे ले रहा है?
यहां मामला और दिलचस्प हो जा रहा है. इस पूरी व्यवस्था को दुनिया के जानकार 'तेहरान का टोल बूथ' यानी तेहरान का टोल नाका कह रहे हैं. लॉयड्स लिस्ट के विश्लेषकों का कहना है कि ईरान के पास इस रास्ते से गुजरने वाले हर जहाज पर रोक लगाने या उसे आगे जाने देने की ताकत है.

अभी यह पूरी तरह साफ नहीं है कि ईरान हर जहाज से पैसे मांग रहा है या नहीं. लेकिन लॉयड्स लिस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक कम से कम दो जहाज इस रास्ते से गुजरने के लिए पैसे दे चुके हैं. इनमें से एक बड़े तेल टैंकर ने करीब 20 लाख डॉलर यानी करीब 18.5 करोड़ रुपये चुकाए.
भारत के जहाजों का क्या हाल है?
भारत के लिए यह मामला बहुत सीधे तौर पर असर डालने वाला है क्योंकि भारत खाड़ी देशों से बड़े पैमाने पर तेल और गैस मंगाता है.
इंडिया टुडे की OSINT टीम की नजर रखने के मुताबिक इस वक्त कम से कम 20 भारतीय जहाज होर्मुज के पश्चिम में यानी फारस की खाड़ी की तरफ अटके हुए हैं. इनमें 2 एलपीजी टैंकर और 4 कच्चे तेल के टैंकर शामिल हैं.
12 मार्च और 8 अप्रैल की स्थिति की तुलना करने पर पता चलता है कि कई भारतीय जहाज होर्मुज की तरफ खिसक आए हैं और खासाब के पास इकट्ठे हो गए हैं. यह जगह ओमान में है और यहां जहाज रास्ता खुलने का इंतजार कर रहे हैं.

अच्छी खबर यह है कि भारत सरकार ने ईरान से बातचीत की और 8 एलपीजी टैंकर पहले ही निकल चुके हैं. इनके नाम हैं नंदा देवी, जग वसंत, बीडब्ल्यू एल्म, शिवालिक, ग्रीन सान्वी, बीडब्ल्यू टायर, पाइन गैस और ग्रीन आशा. इसके अलावा 3 कच्चे तेल के टैंकर और 3 दूसरे जहाज भी खाड़ी पार कर चुके हैं.
आगे क्या होगा, अभी भी बहुत कुछ अधर में है
सीजफायर तो हो गई है लेकिन होर्मुज का भविष्य अभी भी तय नहीं है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पुराना रास्ता फिर से सामान्य रूप से खुलेगा या ईरान इसी नए रूट को आगे भी जारी रखेगा.
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अगर ईरान यही नया रूट चलाता रहा तो दुनियाभर के जहाजों को उसकी शर्तों पर चलना होगा. यह भी साफ नहीं है कि पुराने रास्ते में सच में सुरंगें बिछाई गई हैं या यह सिर्फ जहाजों को नए रास्ते पर धकेलने की चाल है ताकि IRGC का कंट्रोल बना रहे.
फिलहाल दुनिया की नजर इस 54 किलोमीटर चौड़े रास्ते पर टिकी है क्योंकि इस पर जो भी होगा, उसका असर दुनियाभर में तेल की कीमतों और समुद्री व्यापार पर पड़ेगा.