गाजा पट्टी के भविष्य को लेकर एक ऐतिहासिक मोड़ आता दिख रहा है. हमास के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुरुवार को घोषणा की है कि उनका संगठन गाजा का शासन चलाने की जिम्मेदारी नवनियुक्त 'नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा' (NCAG) को सौंपने के लिए तैयार है. यह एक ऐसी संस्था है जिसमें राजनीतिक गुटों के बजाय विशेषज्ञ (Technocrats) शामिल होंगे.
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब वाशिंगटन ने गाजा युद्ध को समाप्त करने और भविष्य की राजनीतिक व सुरक्षा व्यवस्था को आकार देने के लिए अपनी योजना के दूसरे चरण (Phase 2) की शुरुआत कर दी है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन अब केवल युद्ध रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि गाज़ा के भावी शासन का निर्धारण करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने हाल ही में इस योजना के दूसरे चरण की घोषणा की. इस चरण में गाजा में गैर-पक्षपाती पेलेस्टिनी प्रशासनिक निकाय की स्थापना और पूर्ण विमुद्रीकरण की प्रक्रिया शामिल है.
गाजा के लिए तकनीकी निकाय
इस योजना के तहत, नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा (NCAG) गाजा का प्रशासन संभालेगी. इस निकाय में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि नहीं होंगे, बल्कि तकनीकी विशेषज्ञ शामिल होंगे. इसका उद्देश्य शासन की निरंतरता बनाए रखना, पुनर्निर्माण की निगरानी करना और बुनियादी सेवाओं की बहाली सुनिश्चित करना है.
विटकॉफ ने हमास को चेतावनी भी दी कि अमेरिकी प्रशासन उम्मीद करता है कि समूह सभी शेष प्रतिबद्धताओं को पूरा करे. इसमें गाजा में अभी भी बंदी बनाए गए अंतिम मृत बंधक के शव की तुरंत वापसी शामिल है. विटकॉफ़ ने कहा कि अगर हमास अपने दायित्वों का पालन नहीं करता, तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे.
गाजा शांति योजना
अमेरिकी विशेष दूत के अनुसार, तीन चरणों वाली योजना के पहले चरण ने ठोस परिणाम दिए. इसमें मानवीय सहायता का निरंतर प्रवाह, युद्धविराम का पालन, सभी जीवित बंधकों की रिहाई और 28 में से 27 मृत बंधकों के शवों की वापसी शामिल है.
पहला चरण मुख्य रूप से सक्रिय संघर्ष को रोकने, मानवीय संकट को कम करने और लंबी अवधि के राजनीतिक व्यवस्थाओं की नींव रखने पर केंद्रित था. इसमें कैदियों के आदान-प्रदान के जरिए सैकड़ों फिलिस्तीनियों को भी रिहा किया गया. विटकॉफ़ ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि करार दिया और मिस्र, तुर्की और कतर की मध्यस्थता की भूमिका को सराहा.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिका की गाजा के भविष्य के प्रशासन को लेकर और अधिक सक्रिय भूमिका अपनाने की दिशा में संकेत देता है. वहीं, हमास की यह सहमति गाजा में राजनीतिक परिदृश्य को बदल सकती है.