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G7 की ईरान को कड़ी चेतावनी, होर्मुज की नाकेबंदी तोड़ने के लिए बड़ा मास्टरप्लान तैयार

बढ़ते तनाव के बीच प्रमुख देशों ने आपूर्ति तंत्र बनाए रखने पर जोर दिया. महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए सामूहिक कदमों पर चर्चा हुई. कूटनीतिक प्रयास तेज करने की बात कही गई. जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए विशेष व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है.

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तेल सप्लाई संकट पर G7 एकजुट  हो गए हैं और  जहाजों को सुरक्षा देने की बात कही है. (PHoto-ITG)
तेल सप्लाई संकट पर G7 एकजुट हो गए हैं और जहाजों को सुरक्षा देने की बात कही है. (PHoto-ITG)

ईरान के साथ जारी भीषण युद्ध के बीच  दुनिया की सात सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं (G7) और यूरोपीय संघ (EU) ने ईरान द्वारा नागरिक और ऊर्जा बुनियादी ढांचों पर किए जा रहे "लापरवाह हमलों" की कड़े शब्दों में निंदा की. जी-7 (G7) देशों ने एक बड़ा संयुक्त बयान जारी कर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री मार्गों की रक्षा के लिए सैन्य व कूटनीतिक मोर्चे पर उतरने का ऐलान किया. 

सदस्य देशों ने स्पष्ट किया है कि वे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सुचारू रखने के लिए हर आवश्यक कदम उठाने को तैयार हैं, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा भी शामिल है.

होर्मुज की नाकेबंदी और बढ़ती तेल कीमतों से निपटने के लिए G7 देशों ने एक वर्किंग ग्रुप का गठन किया है. यह समूह खाड़ी में व्यापारिक जहाजों को 'सैन्य एस्कॉर्ट' (सुरक्षा घेरा) प्रदान करने के विकल्पों की जांच कर रहा है. बयान में कहा गया है कि सही सुरक्षा स्थितियां होने पर जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे. इसके लिए शिपिंग कंपनियों के साथ भी बातचीत शुरू की गई है.

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कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका के विदेश मंत्रियों ने ईरान और उसके सहयोगियों (Proxies) द्वारा किए जा रहे हमलों को "अन्यायपूर्ण" बताया. उन्होंने कहा कि वे अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ खड़े हैं और उन देशों के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन करते हैं जिन पर ईरान ने हमले किए हैं.

गौरतलब है कि 28 फरवरी को शुरू हुए इस युद्ध ने अब एक महायुद्ध का रूप ले लिया है. इस संकट के समाधान के लिए 24-25 मार्च को पेरिस में G7 देशों की एक विशेष बैठक भी बुलाई गई है.

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