गुजरात के गांधीनगर में मंगलवार को संपन्न हुई G-20 वित्त मंत्रियों और सेंट्रल बैंक गवर्नस FMCBG) की बैठक में भारत एक बार फिर सदस्य देशों के साथ सहमति बनाने में असफल रहा. रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर सदस्य देशों के बीच मतभेदों के कारण बैठक के बाद जारी किए जाने वाले साझा बयान पर सहमति नहीं बनी.
दरअसल, इस बैठक में भाग लेने वाले देशों के साथ भारत इस बात पर सहमति बनाने में असमर्थ रहा कि यूक्रेन-रूस युद्ध को 'संघर्ष' के तौर पर उल्लेख किया जाए. सदस्य देश इस बात पर अड़े रहे कि रूस को लेकर बयान में सख्त शब्दावली का इस्तेमाल हो और 'रूस-यूक्रेन संघर्ष' को युद्ध ही कहा जाए. इस कारण बैठक के बाद कोई संयुक्त बयान जारी नहीं हो पाया और बैठक चेयर समरी और परिणाम दस्तावेज के साथ समाप्त हुई.
इससे पहले मार्च 2023 में हुई जी-20 की वित्त मंत्रियों की बैठक में यूक्रेन मुद्दे पर असहमति के कारण कोई संयुक्त बयान नहीं जारी हो पाया था. इस बैठक में रूस और चीन ने रूसी युद्ध से संबंधित दो पैराग्राफों पर आपत्ति जताई थी. इस पैराग्राफ में रूस के हमले की कड़े शब्दों में निंदा की गई थी. इसके अलावा विदेश मंत्रियों की बैठक में भी जी-7 देशों ने फैमिली फोटो में शामिल होने से इनकार कर दिया था. यूक्रेन पर रूसी आक्रमण का जिक्र अब तक हुई सभी जी-20 बैठकों की असहमति का कारण रहा है.
दो दिवसीय बैठक के समापन के बाद भारत के केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मीडियाकर्मियों से बात करते हुए कहा, "बैठक को लेकर चेयर स्टेटमेंट जारी किया गया है. क्योंकि रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर अभी भी हमारे पास कोई कॉमन टर्म नहीं है. बाली लीडर्स समिट में दिए गए नाम को बदलने के लिए हमारे पास पर्याप्त बहुमत नहीं है. ऐसे में इसे बदलना हमें सही नहीं लगा. इसलिए इसका निर्णय अब सितंबर में होने वाली शिखर सम्मेलन पर छोड़ दिया जाना चाहिए.
G20 India Presidency releases Chair Summary & Outcome Document of the 3rd G20 Finance Ministers and Central Bank Governors #G20FMCBG meeting held under #G20India Presidency in Gandhinagar from 17th-18th July 2023.
— Ministry of Finance (@FinMinIndia) July 18, 2023
Read more ➡️ https://t.co/6j9eMnsMoH pic.twitter.com/73hbMNGoHv
रूस-यूक्रेन युद्ध भारत की देन नहींः अमिताभ कांत
भारत के जी-20 शेरपा अमिताभ कांत ने यूक्रेन संघर्ष पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इस पर हम चर्चा नहीं करना चाहते हैं. क्योंकि रूस-यूक्रेन युद्ध हमारी देन नहीं है. रूस-यूक्रेन संघर्ष किसी विकासशील और उभरते हुए देशों की देन नहीं है. यह हमारे लिए प्राथमिकता नहीं है. हमारी प्राथमिकता युद्ध नहीं है. यह किसी और देश के लिए प्राथमिकता हो सकती है. इसलिए यूक्रेन मुद्दे पर हम अंत में चर्चा करेंगे. और इससे हमें कोई समाधान मिलेगा या नहीं, इससे भारत पर कोई असर नहीं होने वाला है.
काला सागर अनाज डील से बाहर होने पर रूस की निंदा
भारतीय अधिकारियों का कहना है कि रूस-यूक्रेन संघर्ष जी-20 के दायरे से बाहर है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि मुद्दों पर सभी की सहमति थी, लेकिन इसके लिए किस भाषा का इस्तेमाल किया जाए. इसके लिए और समय चाहिए.
रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक में चर्चा के दौरान कई जी-20 देशों ने रूस के उस फैसले की निंदा की जिसके तहत रूस ने यूक्रेन से समुद्र के रास्ते अनाज निर्यात की अनुमति के एक महत्वपूर्ण सौदे को निलंबित कर दिया है. दरअसल, रूस यूक्रेन को काला सागर से अनाज निर्यात की अनुमति देने वाले समझौते से बाहर हो गया है. रूस का कहना है कि वह इस समझौते से बाहर हो रहा है क्योंकि उसकी शर्तों को पूरा नहीं किया गया है. यह समझौता इसलिए भी अहम था क्योंकि रूस और यूक्रेन बड़े स्तर पर गेहूं निर्यात करते हैं.
वित्त मंत्री ने आगे कहा, "कई सदस्य देशों ने रूस के इस कदम की निंदा की है. और कहा है कि काला सागर से गुजरने वाले खाद्य पदार्थों से संबंधित समझौते को निलंबित नहीं किया जाना चाहिए था.
चेयर समरी स्टेटमेंट में क्या कहा गया?
G-20 बैठक के बाद जारी परिणाम दस्तावेज और चेयर समरी में कहा गया है, "अधिकांश सदस्य देशों ने यूक्रेन युद्ध की कड़ी निंदा की है. निंदा करने वाले सदस्य देशों का कहना है कि यूक्रेन युद्ध भारी मानवीय पीड़ा का कारण बन रहा है और वैश्विक अर्थव्यवस्था को कमजोर कर रहा है. इससे वैश्विक विकास बाधित हो रहा है और महंगाई बढ़ रही है. युद्ध की स्थिति और प्रतिबंधों को लेकर सभी देशों का अपना अलग-अलग विचार था. चूंकि, जी 20 सुरक्षा मुद्दों को हल करने का मंच नहीं है. हम इस बात को स्वीकार करते हैं कि सुरक्षा मुद्दों का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभावी परिणाम हो सकता है."