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ईरान-अमेरिका डील पर 'अपनों' को ही ऐतराज, यूरोपीय देशों ने ट्रंप की जल्दबाजी पर उठाए सवाल

ईरान‑अमेरिका डील को लेकर यूरोपीय देशों ने चिंता जताई है. उनका कहना है कि जल्दबाजी में किया गया कोई भी समझौता भविष्य में फिर से समस्याएं खड़ी कर सकता है. डिप्लोमेट्स का मानना है कि अमेरिकी टीम ईरान के साथ केवल एक सतही समझौते पर जोर दे रही है.

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व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली ने कहा, ट्रंप वही समझौता स्वीकार करेंगे जो ‘अमेरिका फर्स्ट’ को प्राथमिकता देता हो. (Photo: Reuters)
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली ने कहा, ट्रंप वही समझौता स्वीकार करेंगे जो ‘अमेरिका फर्स्ट’ को प्राथमिकता देता हो. (Photo: Reuters)

यूरोपीय देशों ने अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते पर चिंता जताई है. उनका कहना है कि जल्दबाजी में किया गया कोई भी समझौता भविष्य में उल्टा पड़ सकता है. डिप्लोमेट्स ने चेतावनी दी है कि यूरेनियम एनरिचमेंट और प्रतिबंधों में छूट से जुड़े तकनीकी विवाद अभी भी अनसुलझे हैं. ईरान गारंटी चाहता है और यूरोप इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी की मांग कर रहा है.

तेहरान के साथ बातचीत का पूर्व अनुभव रखने वाले डिप्लोमेट्स का कहना है कि यूरोपीय सहयोगी देशों को डर है कि अनुभवहीन अमेरिकी वार्ताकार ईरान के साथ एक जल्दबाजीभरा और केवल सुर्खियां बटोरने वाले समझौते पर जोर दे रहे हैं, जो समस्याओं को हल करने के जगह इसे और ज्यादा गंभीर बना सकता है.

उन्हें चिंता है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लिए एक डिप्लोमेटिक जीत का दावा करने के लिए उत्सुक वाशिंगटन, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों में छूट पर एक सतही समझौते पर हस्ताक्षर कर सकता है, और इसके चलते महीनों या सालों तक फिर से तकनीकी बातचीत में उलझना पड़ सकता है.

रॉयटर्स के मुताबिक, एक सीनियर यूरोपियन डिप्लोमेट ने कहा, “चिंता इस बात की नहीं है कि समझौता नहीं होगा, बल्कि इस बात की है कि एक खराब शुरुआती समझौता हो सकता है, जो आगे चलकर कई समस्याएं पैदा करेगा.”

ट्रंप 'अमेरिका फर्स्ट’ को प्राथमिकता देंगे

वार्ता की शैली, टीम, उद्देश्य और जल्दबाज़ी में समझौते के संभावित खतरे वाले सवालों के जवाब में व्हाइट हाउस ने आलोचनाओं को खारिज किया है. व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप का अमेरिका और अमेरिकी जनता के हित में अच्छे समझौते करने का साबित रिकॉर्ड है, और वह केवल वही समझौता स्वीकार करेंगे जो ‘अमेरिका फर्स्ट’ को प्राथमिकता देता हो.”

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फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी के डिप्लोमेट्स जिन्होंने 2003 से ईरान के साथ बातचीत शुरू की थी, उनका कहना है कि उन्हें अब इस प्रक्रिया से दरकिनार कर दिया गया है.

2013 से 2015 के बीच, इन तीनों देशों ने अमेरिका के साथ मिलकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण लगाने और बदले में प्रतिबंधों में राहत देने के लिए एक समझौता कराया था, जिसे जॉइंट कॉम्प्रिहेन्सिव प्लान ऑफ़ एक्शन (JCPOA) के नाम से जाना जाता है.

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