अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयानों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में खलबली मचा दी है. वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने अब अपना अगला निशाना ग्रीनलैंड को बताया. ग्रीनलैंड को लेकर दी गई ट्रंप की धमकी पर अब यूरोपीय देश एकजुट हो गए हैं.
फ्रांस, जर्मनी, इटली, पोलैंड, स्पेन, ब्रिटेन और डेनमार्क ने एक संयुक्त बयान जारी कर साफ कर दिया है कि आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा यूरोप की शीर्ष प्राथमिकताओं में है और ग्रीनलैंड के भविष्य पर फैसला सिर्फ डेनमार्क और ग्रीनलैंड के लोगों का अधिकार है.
इस संयुक्त बयान पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मनी के चांसलर मर्ज़, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टुस्क, स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर और डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन के हस्ताक्षर हैं.
बयान में कहा गया है कि आर्कटिक की सुरक्षा यूरोप ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय और ट्रांस-अटलांटिक सुरक्षा के लिए भी बेहद अहम है. नाटो पहले ही आर्कटिक को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल कर चुका है और यूरोपीय सहयोगी देश वहां अपनी मौजूदगी, सैन्य गतिविधियां और निवेश बढ़ा रहे हैं.
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यूरोपीय नेताओं ने स्पष्ट किया कि डेनमार्क साम्राज्य, जिसमें ग्रीनलैंड शामिल है, नाटो का हिस्सा है, और आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा नाटो सहयोगियों, खासकर अमेरिका, के साथ मिलकर सामूहिक रूप से सुनिश्चित की जानी चाहिए. इसके तहत संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांत संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और सीमाओं की अक्षुण्णता से कोई समझौता नहीं होगा.
बयान में यह भी कहा गया कि 1951 के रक्षा समझौते के तहत अमेरिका इस प्रयास में एक अहम साझेदार है, लेकिन ग्रीनलैंड के भविष्य से जुड़े फैसले बाहरी दबाव से नहीं लिए जाएंगे.
ट्रंप के इस बयान से बढ़ी हलचल
इस संयुक्त बयान का समय इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एयर फोर्स वन में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा था-“हमें ग्रीनलैंड चाहिए… वहां इस वक्त रूसी और चीनी जहाज मौजूद हैं.” ट्रंप ने यह भी दावा किया कि यूरोपीय संघ चाहता है कि अमेरिका ग्रीनलैंड अपने नियंत्रण में ले, और यह अमेरिका की सुरक्षा व आर्थिक हितों के लिए जरूरी है. उनके इस बयान को लेकर यूरोप में गंभीर चिंता जताई जा रही है.
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संयुक्त बयान के जरिए यूरोपीय देशों ने साफ संकेत दिया है कि ग्रीनलैंड न तो सौदे का विषय है और न ही किसी ताकत की रणनीतिक संपत्ति, बल्कि वहां के लोगों का अधिकार है.