फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भारत के तीन दिनों के दौरे पर हैं. इस दौरान उन्होंने मुंबई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी की. अब मैक्रों ने पीएम मोदी के साथ AI तस्वीर भी शेयर की है.
मैक्रों ने पीएम मोदी के साथ तस्वीर शेयर करते हुए कहा कि जब दोस्त मिलते हैं तो इनोवेशन होता है. AI इम्पैक्ट समिट के लिए तैयार हूं. इस तस्वीर की खास बात ये है कि इस एआई तस्वीर में पीएम मोदी और मैक्रों को heart का साइन बनाते देखा जा सकता है. तस्वीर के नीचे लिखा है कि हां, ये एआई तस्वीर है.
बता दें कि इससे पहले मुंबई में दोनों नेताओं के बीच रक्षा, व्यापार, तकनीक, अंतरिक्ष, ऊर्जा और इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई.
AI इम्पैक्ट समिट में हिस्सा लेंगे मैक्रों
फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट में हिस्सा लेंगे, जहां भारत और फ्रांस मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में सहयोग पर रणनीति बनाएंगे.
इससे पहले बुधवार को दिल्ली में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मैक्रों ने कहा था कि ग्लोबल एआई रेस में भारत और फ्रांस फिलहाल अमेरिका-चीन से पीछे हो सकते हैं, लेकिन हम रेस में हैं. हम मजबूती से मुकाबला कर रहे हैं. हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हमारे पास डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग क्षमता हो और हम अपने देशों में टैलेंट तैयार करें. इसमें तीन बातें साफ हैं: कंप्यूटिंग कैपेसिटी, टैलेंट और पूंजी.
क्या भारत के लिए नया रूस बन पाएगा फ्रांस?
सबसे बड़ा सवाल यही है. दशकों तक भारत का सबसे बड़ा रक्षा साझेदार रूस रहा. लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के आंकड़ों के मुताबिक, 1999-2012 में भारत के रक्षा आयात में रूस की हिस्सेदारी 70-80% थी. लेकिन 2020-24 में यह घटकर 36% रह गई, जबकि फ्रांस 33% के साथ दूसरे नंबर पर पहुंच गया.
अब प्रस्तावित 114 राफेल लड़ाकू विमानों की डील के बाद फ्रांस भारत का सबसे बड़ा डिफेंस पार्टनर बन सकता है. मुंबई में हुई द्विपक्षीय बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने ऐलान किया कि भारत और फ्रांस मिलकर दुनिया का पहला ऐसा हेलीकॉप्टर बनाएंगे, जो माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई तक उड़ सकेगा. इस हेलीकॉप्टर H-125 की असेंबली लाइन Airbus और Tata Advanced Systems Limited की साझेदारी में भारत में शुरू हुई है. यह हेलीकॉप्टर रेस्क्यू और हाई-एल्टीट्यूड सैन्य अभियानों के लिए अहम होगा और पूरी दुनिया में एक्सपोर्ट किया जाएगा.