अमेरिका-ईरान जंग के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया संबोधन में कई बड़े दावे किए गए, जिसमें रिजीम चेंज, महंगाई खत्म, निवेश रिकॉर्ड और पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा पर आरोप शामिल थे. इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की सेना-नौसेना को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है और यहां तक कि ईरान में सत्ता परिवर्तन भी हो चुका है. कई दावे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए, तो कुछ तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर रखा गया. पढ़ें ट्रंप के दावे का फैक्ट चेक.
1. "ईरान में रिजीम चेंज हो चुका है"
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "हमने कभी रिजीम चेंज की बात नहीं की, लेकिन अब वहां बदलाव हो चुका है. पुराने नेता मारे जा चुके हैं और नई लीडरशिप ज्यादा समझदार है."
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FACT: राष्ट्रपति ट्रंप का यह दावा पूरी तरह गलत है. जंग की शुरुआत में इजरायली हमले में सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर सामने आई थी, जिसके बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को सत्ता सौंपी गई. विशेषज्ञों के मुताबिक, मोजतबा खामेनेई पहले से ज्यादा कट्टर माने जाते हैं. साथ ही, इस जंग के दौरान IRGC (रिवोल्यूशनरी गार्ड) का प्रभाव और बढ़ा है. ईरान की नागरिक सरकार खुद मानती है कि उसके पास सैन्य फैसलों पर सीमित नियंत्रण है. यानी "रिजीम चेंज" का दावा जमीनी हकीकत के उलट है.
2. "ईरान ने 45,000 प्रदर्शनकारियों को मार दिया"
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया, "इस शासन ने हाल ही में 45,000 प्रदर्शनकारियों को मार डाला."
FACT: ईरान में कितने प्रदर्शनकारियों की मौत हुई, इस आंकड़े की पुष्टि नहीं हुई है. एपी की रिपोर्ट के मुताबिर जनवरी तक करीब 7,000 मौतें कन्फर्म हुई थीं. ईरान सरकार ने 3,117 मौतों का आंकड़ा दिया था. इके अलावा 53,000 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी की बात सामने आई थी. ट्रंप का 45,000 का आंकड़ा मौजूद आंकड़ों से काफी ज्यादा है और इसके समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं दिया गया.
3. "अमेरिका को मिडिल ईस्ट के तेल की जरूरत नहीं"
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया, "हम पूरी तरह स्वतंत्र हैं. हमें मिडिल ईस्ट के तेल की जरूरत नहीं."
FACT: अमेरिकी राष्ट्रपति का यह दावा आंशिक रूप से सही है. 2025 में अमेरिका ने अपने कुल तेल आयात का सिर्फ 8.5% पर्शियन गल्फ से लिया. लेकिन तेल एक वैश्विक बाजार है. अगर मिडिल ईस्ट में संकट होता है, तो उसका असर पूरी दुनिया की कीमतों पर पड़ता है. ईरान जंग शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में 50% से ज्यादा उछाल दर्ज किया गया है. अमेरिका में पेट्रोल $4 प्रति गैलन के पार पहुंच गया है. यानी, सीधे निर्भर न होने के बावजूद असर जरूर पड़ता है.
4. "$18 ट्रिलियन का निवेश आया"
राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया, "रिकॉर्ड $18 ट्रिलियन का निवेश अमेरिका में आया."
FACT: एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट की मानें तो इस दावे का कोई ठोस सबूत नहीं है. व्हाइट हाउस की वेबसाइट के अनुसार यह आंकड़ा करीब $10.5 ट्रिलियन है. इसमें भी कई निवेश बाइडेन प्रशासन के समय के हैं. एक स्टडी के मुताबिक, $5 ट्रिलियन से ज्यादा निवेश तो शायद कभी जमीन पर आए ही नहीं. यानी यह आंकड़ा काफी बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है.
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5. "ओबामा ने ईरान को $1.7 बिलियन कैश दिया"
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने का दावा है कि, पूर्व राष्ट्रपति "बराक ओबामा ने ईरान को 1.7 बिलियन डॉलर कैश दिया."
FACT: ट्रंप के इस दावे को भ्रामक बताया जा रहा है. असल में यह पैसा ईरान का ही था. 1970 के दशक में ईरान ने अमेरिका को $400 मिलियन सैन्य उपकरण खरीदने के लिए दिए थे. डील रद्द होने के बाद यह पैसा बकाया रह गया था. 2015 में समझौते के तहत अमेरिका ने $400 मिलियन मूल राशि + $1.3 बिलियन ब्याज चुकाया था. यानी यह "गिफ्ट" नहीं, बल्कि पुराने बकाए का भुगतान किया गया था.
6. "ईरान का मिसाइल पावर खत्म, सेना-नौसेना तबाह"
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया, "ईरान की सेना-नौसेना को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है. ईरान का मिसाइल पावर खत्म कर दिया गया है."
FACT: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के दावे के उलट ईरान ने इजरायल पर मिसाइल हमले किए हैं. उनके संबोधन के तुरंत बाद इजरायली सेना ने दावा किया कि ईरान से मिसाइलें दागी गई हैं. ट्रंप के दावे के उलट ईरान खाड़ी और इजरायल पर रोजाना हमले करता रहा है
7. "अमेरिका में कोई महंगाई नहीं", ट्रंप का दावा कितना सही?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया, "हमने अमेरिका को दुनिया की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था बना दिया, जहां कोई महंगाई नहीं है."
FACT: यह दावा पूरी तरह सही नहीं है. 2024 में, जब जो बाइडेन का कार्यकाल खत्म हुआ, तब अमेरिका की GDP ग्रोथ 2.8% थी, जो दुनिया के बड़े विकसित देशों में सबसे तेज थी (स्पेन को छोड़कर). ट्रंप के कार्यकाल में यह ग्रोथ घटकर 2.1% रह गई. वहीं, फरवरी 2026 में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) 2.4% था, जो फेडरल रिजर्व के 2% लक्ष्य से ऊपर है. यानी महंगाई खत्म नहीं हुई है.