
ईरान जंग से जुड़ी दूसरी बड़ी खबर सामने आई है. ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका को सारा 'न्यूक्लियर डस्ट' मिलेगा. ट्रंप ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम को 'न्यूक्लियर डस्ट' कहते हैं. यह बहुत महीन पाउडर या केक के रूप में स्टोर होता है. ईरान की ओर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से खोलने का ऐलान करने के बाद ईरान जंग में ये दूसरा बड़ा घटनाक्रम है.
ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट में दावा किया कि, "U.S.A. को हमारे शानदार B2 बॉम्बर्स से पैदा हुई सारी न्यूक्लियर "Dust" मिलेगी." ट्रंप ने आगे कहा कि इस सौदे में किसी भी तरह से, किसी भी रूप में, पैसों का कोई लेन-देन नहीं होगा. यह सौदा किसी भी तरह से लेबनान से भी जुड़ा हुआ नहीं है, लेकिन US अलग से लेबनान के साथ काम करेगा और हिज़्बुल्लाह की स्थिति से उचित तरीके से निपटेगा."
अगर यह सच है, तो यह ईरान की तरफ से एक बड़ी रियायत होगी और इससे संघर्ष को खत्म करने की अमेरिका की एक अहम मांग पक्की हो जाएगी. लेकिन न तो ईरान ने और न ही इस संघर्ष में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे देशों ने यह कहा है कि तेहरान ने ऐसा कोई समझौता किया है.
बता दें कि अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस ने अपनी एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा है कि अमेरिका और ईरान युद्ध समाप्त करने के लिए तीन-पृष्ठों की एक योजना पर बातचीत कर रहे हैं; इस चर्चा का एक मुख्य बिंदु यह है कि ईरान द्वारा अपने एनरिच्ड यूरेनियम के भंडार को छोड़ने के बदले में अमेरिका ईरान के 20 अरब डॉलर के फ्रीज फंड को रिलीज कर देगा.

ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि ईरानी संपत्तियों को रिलीज करना होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के समझौते का अहम हिस्सा रहा है. ट्रंप अब कह रहे हैं कि ईरान अपना परमाणु बम का कच्चा माल यानी कि एनरिच्ड यूरेनियम अमेरिका को देने पर राजी हो गया है, लेकिन वे यह भी कह रहे हैं कि इसके बदले में किसी भी तरह का पैसे का कोई लेन-देन नहीं होगा.
इधर ईरानी अधिकारी कह रहे हैं कि डील में फ्रीज अरबों डॉलर की संपत्तियों को रिलीज करना भी शामिल है, दोनों पक्षों की ओर से विरोधाभासी दावे से सस्पेंस पैदा हो गया है.
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एक्सियोस के अनुसार ट्रंप प्रशासन की एक सबसे अहम प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि ईरान अपनी भूमिगत परमाणु सुविधाओं में जमा लगभग 2,000 किलोग्राम समृद्ध यूरेनियम के भंडार तक पहुंच न बना सके. अमेरिका की चिंता उस 450 किलोग्राम यूरेनियम की हैजिसे 60% शुद्धता तक एनरिच किया गया है. इससे 10 से 11 परमाणु बम बनाया जा सकता है.
ईरान ने की होर्मुज को पूरी तरह से खोलने की घोषणा
एक अहम घटनाक्रम में ईरान ने शुक्रवार को कहा कि होर्मुज स्ट्रेट सभी कमर्शियल जहाजों के लिए "पूरी तरह से खुला" है; इस कदम का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वागत किया.
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने X पर एक पोस्ट में कहा, "लेबनान में संघर्ष विराम के मद्देनज़र, होर्मुज स्ट्रेट से सभी कमर्शियल जहाजों के गुज़रने का रास्ता, संघर्ष विराम की शेष अवधि के लिए, पूरी तरह से खुला घोषित किया जाता है."
हालांकि, ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी तब तक "पूरी तरह से लागू" रहेगी, जब तक तेहरान युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका के साथ किसी समझौते पर नहीं पहुंच जाता.
उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट "पूरी तरह से खुला है और व्यापार तथा पूरी तरह से आवाजाही के लिए तैयार है, लेकिन नौसैनिक नाकेबंदी सिर्फ़ ईरान के मामले में पूरी तरह से लागू और प्रभावी रहेगी, और यह तब तक जारी रहेगी जब तक ईरान के साथ हमारा डील 100% पूरा नहीं हो जाता.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शुक्रवार को इस अहम घटनाक्रम के बाद एक के बाद एक कई ट्वीट किए हैं.
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि इजरायल अब लेबनान पर बमबारी नहीं करेगा. अमेरिका ने उन्हें अब ऐसा करने से मना कर दिया है. अब बहुत हो गया.
ट्रंप ने कहा कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को फिर कभी बंद न करने पर सहमति जताई है. अब इसका इस्तेमाल दुनिया के ख़िलाफ़ एक हथियार के तौर पर नहीं किया जाएगा. ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान ने अमेरिका के सहयोग से होर्मुज में लगाए गए सभी माइंस को हटा दिया है.
एक दूसरे पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और आर्मी चीफ को इस कोशिश में शामिल होने के धन्यवाद दिया है.
होर्मुज स्ट्रेट खुलने के बाद ट्रंप ने नाटो देशों को अपने अंदाज में जोरदार फटकार लगाई है. ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा, "अब जब होर्मुज स्ट्रेटका मामला सुलझ गया है, तो मुझे NATO से फ़ोन आया, जिसमें पूछा गया कि क्या हमें किसी मदद की ज़रूरत है. मैंने उनसे कहा कि वे दूर ही रहें, सिवाय इसके कि वे बस अपने जहाजों में तेल भरवाना चाहते हों. जब जरूरत थी, तब वे किसी काम के नहीं थे—बस कागज़ी शेर."
ईरान का यूरेनियम- अमेरिका के आंखों की किरकिरी
बता दें कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम कथित तौर पर अमेरिका के लिए सबसे बड़ी चिंता थी. अमेरिका का मानना रहा है कि ईरान का 60 प्रतिशत समृद्ध यूरेनियम यानी कि लगभग 450 किलोग्राम यूरेनियम परमाणु हथियार बनाने की दिशा में बढ़ाया गया कदम है.
ट्रंप प्रशासन ने इसे 'आने वाला खतरा' करार दिया, क्योंकि यह जल्दी 90 प्रतिशत हथियार-ग्रेड स्तर पर पहुंच सकता था. 2025-26 की बातचीत में अमेरिका ने ईरान से 20 साल तक यूरेनियम संवर्धन रोकने, नतांज, फोर्डो और इस्फाहान सुविधाओं को तोड़ने और स्टॉकपाइल सौंपने की मांग की थी.
ईरान इस शर्त पर राजी नहीं था और अपनी अरबों डॉलर की फ्रीज संपत्तियों को रिलीज करने की मांग कर रहा था. इसके बाद अमेरिका-इजराइल ने जून 2025 में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए, फिर फरवरी 2026 में पूर्ण युद्ध शुरू किया. ट्रंप ने इसे 'परमाणु हथियार रोकने' का जरिया बताया. अब ट्रंप के दावे को माने तो ईरान उन्हें अपना एनरिच्ड यूरेनियम सौंपने को तैयार है.