अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में नवजात अमेरिकी शिशुओं के लिए 'ट्रंप अकाउंट' (530A Account) नाम की एक महात्वाकांक्षी योजना शुरू की है. इस योजना के तहत 1 जनवरी 2025 से 2028 के बीच पैदा होने वाले प्रत्येक अमेरिकी बच्चे को सरकार की ओर से 1,000 डॉलर (लगभग 84,000 रुपये) का सीड फंड दिया जाएगा.
यह राशि स्टॉक मार्केट और म्यूचुअल फंड्स में निवेश की जाएगी, जिसे बच्चा 18 वर्ष का होने पर ही निकाल सकेगा. इस योजना का उद्देश्य बच्चों को जन्म से ही आर्थिक मजबूती देना और भविष्य में सरकारी सहायता पर निर्भरता कम करना बताया गया है.
हालांकि, इस योजना को लेकर जो बात सबसे ज्यादा चर्चा में है, वह यह कि यह कोई नई अवधारणा नहीं है. भारत के कम से कम पांच राज्यों में दशकों से इसी तरह की योजनाएं लागू हैं. तमिलनाडु ने तो ऐसी योजना 1992 में ही शुरू कर दी थी. यह योजना इस धारणा को मजबूत करती कि ट्रंप और उनका प्रशासन भारत की नीतियों और विचारों से प्रेरणा ले रहे हैं
भारत जैसी योजनाओं की झलक
तमिलनाडु, बिहार, दिल्ली, हरियाणा और महाराष्ट्र में लड़कियों के लिए जन्म के समय फिक्स्ड डिपॉजिट या नकद सहायता देने की योजनाएं पहले से मौजूद हैं, जिनकी राशि 18 साल की उम्र में शिक्षा या विवाह के लिए निकाली जा सकती है. ट्रंप अकाउंट की संरचना इन योजनाओं से काफी मिलती-जुलती नजर आती है.
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अभी तक, भारत के कम से कम पांच राज्यों में ऐसी योजनाएं हैं, जिनके तहत नवजात बच्चों को अनुदान या फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में वित्तीय सहायता दी जाती है.
तमिलनाडु ने 1992 में मुख्यमंत्री बालिका संरक्षण योजना शुरू की, जिसके तहत 1,20,000 रुपये से कम वार्षिक आय वाले परिवार में जन्मी प्रत्येक लड़की के नाम 50,000 रुपये की एफडी की जाती है. यह राशि 10वीं की परीक्षा देने के बाद, 18 वर्ष की उम्र में निकाली जा सकती है.
बिहार ने 2007 में मुख्यमंत्री कन्या सुरक्षा योजना शुरू की, जिसके तहत 22 नवंबर 2007 के बाद बीपीएल परिवारों में जन्मी प्रत्येक लड़की के नाम 2000 रुपये की एफडी की जाती है.
दिल्ली ने 2008 में लाडली योजना शुरू की, जिसके तहत 1 जनवरी 2008 के बाद पंजीकृत अस्पताल में जन्मी प्रत्येक लड़की को 11,000 रुपये की नकद सहायता दी जाती है, बशर्ते परिवार की वार्षिक आय 1,00,000 रुपये से अधिक न हो. आगे की सहायता शिक्षा से जुड़ी होती है.
हरियाणा ने 2015 में आपकी बेटी हमारी बेटी योजना शुरू की, जिसके तहत बीपीएल या एससी परिवारों में जन्मी लड़कियों के लिए 21,000 रुपये की राशि एलआईसी में निवेश की जाती है, जो 18 वर्ष की उम्र में निकाली जा सकती है.
महाराष्ट्र ने 2017 में माझी कन्या भाग्यश्री योजना शुरू की, जिसमें 7,50,000 रुपये से कम आय वाले परिवारों की बेटियों के लिए 50,000 रुपये की एफडी की जाती है.
ट्रंप के विचार मोदी की नीतियों से मिलते-जुलते दिखते हैं?
भारतीय योजनाओं से समानता सिर्फ ट्रंप अकाउंट तक सीमित नहीं है. इससे पहले भी ऐसा लगता रहा है कि ट्रंप कई मामलों में मोदी की स्क्रिप्ट से पढ़ रहे हों.
20 जनवरी 2025 के अपने शपथ ग्रहण भाषण में ट्रंप ने कहा, “अमेरिका का स्वर्ण युग अब से शुरू होता है.” यह वाक्य भारत के ‘अमृत काल’ विजन से मेल खाता है, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने 2021 में भारत की आज़ादी की 75वीं वर्षगांठ पर 25 वर्षों की विकास यात्रा के रूप में पेश किया था. अमेरिका को “पहले से ज्यादा महान, मजबूत और असाधारण” बनाने पर ट्रंप का जोर, मोदी के भारत को ‘विश्वगुरु’ बनाने के आह्वान से काफी मिलता-जुलता है.
दोनों नेता राष्ट्रीय गौरव, सांस्कृतिक पुनरुत्थान और नियति-आधारित नेतृत्व की भाषा का इस्तेमाल करते हैं. आर्थिक आत्मनिर्भरता से लेकर राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति तक, ट्रंप की शैली कई मामलों में मोदी की राजनीतिक भाषा से मेल खाती है.
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लेकिन शायद सबसे चौंकाने वाली समानता यह है कि दोनों नेताओं ने अपने सत्ता में आने को दैवीय उद्देश्य से जोड़ा है. मई 2024 में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि उन्हें विश्वास है कि उन्हें भगवान ने एक विशेष उद्देश्य के लिए भेजा है. इसी तरह, 20 जनवरी 2025 को दिए गए भाषण में ट्रंप ने अपने ऊपर हुए जानलेवा हमले का ज़िक्र करते हुए कहा कि उनका बचना ईश्वर की इच्छा थी.
उन्होंने कहा, “कुछ महीने पहले पेंसिल्वेनिया के एक सुंदर मैदान में एक हत्यारे की गोली मेरे कान को छूती हुई निकल गई. लेकिन तभी मुझे लगा, और अब और भी विश्वास है, कि मेरी जान किसी वजह से बचाई गई.” दोनों नेताओं के भाषणों में राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक गौरव और यहां तक कि दैवीय उद्देश्य का उल्लेख भी समानताएं दिखाता है. ऐसे में सवाल उठना लाज़मी है कि क्या ट्रंप प्रशासन भारत को नीति-प्रेरणा का मॉडल मान रहा है?