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'नरसंहार के आठवें स्टेज पर भारत', अमेरिकी सांसद इल्हान उमर ने फिर उगला जहर

सोमालियाई मूल की अमेरिकी सांसद इल्हान उमर को पाकिस्तान का हमदर्द माना जाता है. वे पहले भी कई बार कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने की नाकाम कोशिशें कर चुकी हैं. यह कार्यक्रम 7 जून को आयोजित हुआ था, लेकिन इसके वीडियो अब सामने आए हैं.

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इल्हान उमर का बयान अमेरिकी विधिवेत्ता ग्रेगरी एच. स्टैंटन के '10 स्टेज ऑफ जेनोसाइड' मॉडल के संदर्भ में था. (Image: File)
इल्हान उमर का बयान अमेरिकी विधिवेत्ता ग्रेगरी एच. स्टैंटन के '10 स्टेज ऑफ जेनोसाइड' मॉडल के संदर्भ में था. (Image: File)

अमेरिका की डेमोक्रेटिक सांसद इल्हान उमर ने भारत को लेकर एक बार फिर विवादित बयान दिया है. इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (IAMC) के एक कार्यक्रम में उन्होंने दावा किया कि भारत नरसंहार के आठवें स्टेज पर पहुंच चुका है. उनका यह बयान अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और इसे लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है.

यह कार्यक्रम 7 जून को आयोजित हुआ था, लेकिन इसके वीडियो अब सामने आए हैं. कार्यक्रम का आयोजन IAMC ने किया था, जो लंबे समय से भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सवाल उठाता रहा है.

सोमालियाई मूल की अमेरिकी सांसद इल्हान उमर को पाकिस्तान का हमदर्द माना जाता है. वे पहले भी कई बार कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने की नाकाम कोशिशें कर चुकी हैं. एक तरफ जहां इल्हान भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करने में जुटी हैं, वहीं खुद अमेरिका में वे और सोमालियाई प्रवासी समुदाय डोनाल्ड ट्रंप और MAGA समर्थकों के निशाने पर रहते हैं. ट्रंप गुट द्वारा अक्सर उनके समुदाय को संदिग्ध बताया जाता है और खुद उमर पर भी अवैध अप्रवासी होने के आरोप लगते रहे हैं.

क्या बोलीं इल्हान उमर?

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए इल्हान उमर ने कहा कि भारत से आने वाली रिपोर्टें यह संकेत देती हैं कि देश नरसंहार के आठवें चरण में है. उन्होंने आरोप लगाया कि यह केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रक्रिया अब व्यवस्थित और सामाजिक स्तर तक फैल चुकी है.

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उमर का यह बयान अमेरिकी विधिवेत्ता ग्रेगरी एच. स्टैंटन के '10 स्टेज ऑफ जेनोसाइड' मॉडल के संदर्भ में था. इस मॉडल में आठवें चरण को 'Persecution' यानी उत्पीड़न बताया गया है, जिसमें किसी समुदाय के खिलाफ राज्य समर्थित दमन, अधिकारों का हनन, जबरन विस्थापन, संपत्ति जब्त करना और अन्य प्रकार के व्यवस्थित उत्पीड़न शामिल हैं.

भारत सरकार ने पहले ही किया था खंडन

केंद्र सरकार पहले भी भारत में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार के आरोपों को खारिज कर चुकी है. केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने हाल ही में कहा था कि भारत दुनिया के सबसे सुरक्षित और समावेशी देशों में से एक है, जहां अल्पसंख्यक समुदाय सुरक्षित हैं. उन्होंने कहा था कि भारत के पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यकों को धार्मिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है और वे शरण के लिए भारत का रुख करते हैं.

रिजिजू ने यह भी कहा था कि पिछले 12 वर्षों में देश में अल्पसंख्यकों के जीवन स्तर और अवसरों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है तथा किसी व्यक्ति को धार्मिक पहचान के कारण देश छोड़ने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ा.

विदेश मंत्रालय ने भी दिया था जवाब

मई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नॉर्वे यात्रा के दौरान भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर पूछे गए सवाल के जवाब में विदेश मंत्रालय के सचिव सिबी जॉर्ज ने कहा था कि भारत में हाल के चुनावों में 90 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ, जो लोकतांत्रिक भागीदारी का बड़ा उदाहरण है.

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उन्होंने यह भी कहा था कि स्वतंत्रता के समय भारत में अल्पसंख्यकों की आबादी करीब 11 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 20 प्रतिशत से अधिक हो गई है. उनके मुताबिक यह भारत की समावेशी व्यवस्था का प्रमाण है.

IAMC पर भी उठते रहे हैं सवाल

कार्यक्रम का आयोजन करने वाले IAMC ने समय-समय पर अमेरिका से भारत को 'Country of Particular Concern' घोषित करने की मांग की है. संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) समेत कुछ भारतीय नेताओं पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग करता रहा है. इस कार्यक्रम में मिनेसोटा के अटॉर्नी जनरल कीथ एलिसन, असिस्टेंट कमिश्नर ज़रीना बाबर, मिनेसोटा सीनेट की मेजॉरिटी लीडर एरिन मर्फी और रिपब्लिकन स्टेट सीनेटर जिम एबेलर सहित कई अन्य वक्ताओं ने भी हिस्सा लिया.

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