ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय ने सोमवार को पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री सुजीत बोस को कथित नगरपालिका भर्ती घोटाले के सिलसिले में गिरफ्तार कर लिया. ED के सूत्रों के मुताबिक, बोस ने कथित तौर पर पैसों के बदले में साउथ दम दम नगरपालिका के तहत कई पदों के लिए करीब 150 उम्मीदवारों की सिफारिश की थी. एजेंसी ने दावा किया है कि अपराध से मिली रकम का पता लगा लिया गया है. यह रकम उन फ्लैटों के रूप में है, जिन्हें बोस ने कथित तौर पर कई लोगों को नगरपालिका में नौकरी दिलाने के बदले में हासिल किया था.
जांचकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि सुजीत बोस से जुड़े बैंक खातों में बड़ी मात्रा में कैश जमा पाया गया. यह गिरफ्तारी पूर्व मंत्री के ED के सामने पेश होने के कुछ ही घंटों बाद हुई.
सुजीत बोस ने 2026 के विधानसभा चुनावों में बिधाननगर सीट हार गए. कथित घोटाले के सिलसिले में पूछताछ के लिए ED के सामने पेश हुए थे.
सुजीत बोस कौन हैं?
सुजीत बोस पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री और तृणमूल कांग्रेस के नेता हैं. उन्हें प्रवर्तन निदेशालय ने एक कथित नगरपालिका भर्ती घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले के सिलसिले में गिरफ्तार किया है. बिधाननगर से तीन बार के मौजूदा विधायक सुजीत बोस, विधानसभा चुनावों में बीजेपी के शरदवत मुखर्जी से 37,000 से ज़्यादा वोटों के अंतर से हार गए.
बोस ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत CPI(M) की युवा शाखा, डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (DYFI) के एक नेता के तौर पर की थी. वह कम्युनिस्ट दिग्गज और पूर्व मंत्री सुभाष चक्रवर्ती के करीबी सहयोगी बन गए. हालांकि, 1990 के दशक के आखिरी तक, दोनों के रास्ते अलग हो गए. सुजीत बोस 2001 में TMC में शामिल हो गए और ममता बनर्जी के खास लोगों में शामिल हो गए. पार्टी ज्वाइन करने के पांच साल बाद सुजीत बोस ने बेलगाछिया ईस्ट से चक्रवर्ती के खिलाफ अपना पहला विधानसभा चुनाव लड़ा. इसके बाद, बोस अपने ही पुराने गुरु से हार गए.
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हालांकि, सुभाष चक्रवर्ती का 2009 में निधन हो गया. बोस ने इसके बाद हुए उपचुनाव में CPI(M) के दिग्गज नेता की पत्नी रमाला के खिलाफ चुनाव लड़ा. बोस जीत गए और पहली बार विधानसभा में पहुंचे. उन्होंने इसके बाद के दो चुनाव भी जीते और उन्हें मंत्री भी बनाया गया.
कोलकाता में TMC के एक जाने-माने कद्दावर नेता सुजीत बोस को लेक टाउन इलाके में स्थित श्रीभूमि स्पोर्टिंग क्लब में शहर की सबसे बड़ी दुर्गा पूजाओं में से एक का आयोजन करने का विशेष श्रेय दिया जाता था.