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TMC की हार पर राहुल गांधी को रास नहीं आई कांग्रेस नेताओं की 'कुटिल मुस्कान', चेताया

राहुल गांधी ने अपनी ही पार्टी के नेताओं को फटकार लगाई है. कांग्रेस नेता ने बंगाल में टीएमसी की हार पर अपनी पार्टी के कुछ नेताओं की 'कुटिल मुस्कान' की चर्चा की है. राहुल ने कहा है कि बीजेपी अपने मिशन में सफल हो रही है और इस समय हमें अपनी छोटी-मोटी राजनीति को परे रखना चाहिए.

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राहुल ने TMC की हार पर प्रतिक्रिया दी है.  (FIle Photo: PTI)
राहुल ने TMC की हार पर प्रतिक्रिया दी है. (FIle Photo: PTI)

पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजे पर आ रहे कुछ कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया पर राहुल गांधी नाराजगी जताई है. राहुल ने अपनी पार्टी के नेताओं और दूसरे दलों की लीडर की आलोचना की जो CM ममता बनर्जी की हार पर 'कुटिल मुस्कान' दे रहे थे. उन्होंने कहा कि विपक्ष की हार BJP के लिए "भारत के लोकतंत्र को खत्म करने के अपने मिशन" में सिर्फ़ एक "बड़ा कदम" है. और इस मौके पर कांग्रेस और दूसरी पार्टी के नेताओं को अपनी छोटी-मोटी राजनीति को किनारे रखना चाहिए. 

शिवसेना-UBT की पूर्व सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इस तरह खुश होने को 'शर्मनाक' बताया. 

पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सुनामी में टीएमसी औंधे मुंह गिरी है. पार्टी को मात्र 80 सीटें मिली है. जबकि कांग्रेस को 2 सीटों पर जीत मिली है. 

बंगाल के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने लिखा, "कांग्रेस और कुछ अन्य नेता TMC की हार पर खुश हो रहे हैं. उन्हें यह बात साफ तौर पर समझ लेनी चाहिए, असम और बंगाल के जनादेश की चोरी, भारतीय लोकतंत्र को खत्म करने के BJP के मिशन में एक बड़ा कदम है."

राहुल ने आगे कहा, "छोटी-मोटी राजनीति को एक तरफ रख दें. यह किसी एक पार्टी की बात नहीं है. यह भारत की बात है."

हालांकि राहुल का इशारा किस कांग्रेस नेता की ओर है ये स्पष्ट नहीं हो सका है. 

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यह दूसरी बार है जब राहुल गांधी ममता बनर्जी के पक्ष में खड़े हुए हैं. इससे पहले सोमवार को उन्होंने कहा था, "हम ममता जी से सहमत हैं. बंगाल में 100 से ज़्यादा सीटें चुराई गई हैं."

प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि TMC और DMK की नाकामी पर 'INDIA अलायंस' के अंदर से ही जिस तरह की खुशी जाहिर की जा रही है, उसे देखना शर्मनाक है. ऐसी ही 'कुटिल मुस्कान' तब भी देखने को मिली थी, जब अरविंद केजरीवाल और तेजस्वी यादव चुनाव हारे थे और AAP में हाल ही में हुई फूट के दौरान भी. और अब आने वाले UP चुनावों के लिए उन्होंने अखिलेश यादव को अपना निशाना बनाया हुआ है. 

पूर्व राज्यसभा सांसद ने कहा कि वोटर ठीक इसी तरह की फूट को नकारते हैं और BJP इसी का फायदा उठाती है. 2024 में विपक्ष की अगुवाई किसी एक पार्टी ने नहीं की थी, बल्कि यह सभी पार्टियों का एक साझा और मिलकर किया गया प्रयास था. इसलिए कृपया उस भावना को याद रखें, जिसके चलते 'INDIA अलायंस' का गठन किया गया था. 

राहुल ने भले ही किसी नेता का नाम नहीं लिया लेकिन राज्य के सियासी गलियारों में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के बयान की चर्चा है. 

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अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि BJP ममता बनर्जी के समर्थन से ही बंगाल में दाखिल हुई. उन्होंने कहा, "ममता बनर्जी ने BJP के लिए रेड कारपेट बिछाया और दावतों का इंतज़ाम किया. और अब TMC को इसका खामियाज़ा भुगतना पड़ रहा है."

अधीर रंजन ने आगे कहा था, "बंगाल में केसरिया लहर यानी गेरुआ लहर और सत्ता विरोधी लहर चली जिससे ऐसे नतीजे आएं, लोगों को परिवर्तन का अंदाजा तो था लेकिन टीएमसी का नामोनिशान नहीं रहेगा ये हमारे सोच के बाहर थी. 

कांग्रेस नेता ने कहा कि बंगाल में बीजेपी नाम की कोई पार्टी नहीं थी. ममता ने हाथ मिलाकर बीजेपी को दावत देकर उन्हें यहां ले आई, आज उनको ये भुगतना पड़ रहा है. टीएमसी की चालाकी उनकी हार की कारण बन चुकी है. 

बता दें कि अधीर रंजन ने भी बहरामपुर से चुनाव लड़ा लेकिन वे बीजेपी कैंडिडेट के सामने हार गए.

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