पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव से पहले ट्रंप कार्ड खेला है. उन्होंने रविवार को चुनाव तारीखों के ऐलान से पहले कहा कि उनकी सरकार राज्य के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बकाया महंगाई भत्ते का भुगतान इस साल मार्च से शुरू करेगी. इस फैसले का लाभ शिक्षकों, शैक्षणिक संस्थानों के गैर-शिक्षण कर्मचारियों और अनुदान प्राप्त संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारियों को भी मिलेगा. इसके अलावा पुरोहितों और मुअज्जिनों के मानदेय में भी बढ़ोतरी की गई है.
सोशल मीडिया पर दी जानकारी
ममता बनर्जी ने X पर लिखा कि उन्हें यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि उनकी 'मा-माटी-मानुष' सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से किया गया वादा पूरा किया है. उन्होंने कहा कि लाखों शिक्षक, गैर-शिक्षण कर्मचारी और पंचायत, नगर निकाय तथा अन्य स्थानीय निकायों जैसे अनुदान प्राप्त संस्थानों के कर्मचारी और पेंशनभोगी भी इससे लाभान्वित होंगे.
मार्च 2026 से मिलेगा बकाया भुगतान
मुख्यमंत्री ने बताया कि कर्मचारियों को 'रोपा 2009' के तहत बकाया महंगाई भत्ते का भुगतान मार्च 2026 से शुरू होगा. उन्होंने कहा कि इसके लिए राज्य के वित्त विभाग की ओर से जारी अधिसूचनाओं में विस्तृत प्रक्रिया तय कर दी गई है.
भाजपा ने बताया चुनावी हथकंडा
हालांकि भारतीय जनता पार्टी ने ममता बनर्जी की इस घोषणा को चुनावी हथकंडा बताया है. पार्टी नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि यह घोषणा उस समय की गई है जब चुनाव आयोग कुछ ही मिनटों में चुनाव की तारीखों का ऐलान करने वाला है.
उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी को अचानक लाखों कर्मचारी, पेंशनभोगी, शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारी याद आ गए. उन्होंने दावा किया कि 'रोपा 2009' के बकाया महंगाई भत्ते का भुगतान मार्च 2026 से करने की बात सिर्फ चुनावी घोषणा है और वास्तव में एक पैसा भी जारी नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने वर्षों तक कर्मचारियों को ठगा है और अब अंतिम समय में यह कदम उठाया गया है.
सुवेंदु अधिकारी ने यह भी आरोप लगाया कि यह सब राज्य की जनता को एक बार फिर भ्रमित करने की कोशिश है और इसे उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का चुनावी नाटक बताया.
पुरोहितों और मुअज्जिनों के मानदेय में भी बढ़ोतरी
एक अन्य संदेश में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में पुरोहितों और मुअज्जिनों के मासिक मानदेय में बढ़ोतरी की भी घोषणा की. ये सभी घोषणाएं उस समय की गईं जब चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद लागू होने वाली आदर्श आचार संहिता से ठीक पहले का समय था. चुनाव कार्यक्रम की घोषणा होते ही आदर्श आचार संहिता लागू हो जाती है.