कोलकाता के आरजी कर (RG Kar) मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में शुक्रवार की सुबह बेहद खौफनाक रही. दमदम के रहने वाले अरूप बनर्जी की अस्पताल की लिफ्ट में फंसने और तकनीकी खराबी के कारण मौत हो गई. इस घटना ने सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं के रखरखाव और आपातकालीन रिस्पांस सिस्टम की पोल खोल दी है.
सुबह करीब 5 बजे अरूप बनर्जी अपनी पत्नी के साथ बेटे का इलाज कराने आए थे. अस्पताल की चौथी मंजिल पर इलाज के बाद उनका परिवार नीचे उतर रहा था.
वे ग्राउंड फ्लोर के लिए लिफ्ट में चढ़े, लेकिन लिफ्ट बिना किसी अटेंडेंट (लिफ्टमैन) के चल रही थी. तकनीकी खराबी के कारण लिफ्ट ने ग्राउंड फ्लोर को पार कर लिया और सीधे बेसमेंट के उस शाफ्ट में जा गिरी जो रेडियोलॉजी यूनिट से जुड़ा था.
बचाव की कोशिश नाकाम
परिवार खुद को एक बंद और सुनसान इलाके में फंसा पाकर घबरा गया. जान बचाने की कोशिश में उनका बेटा लिफ्ट के वेंटिलेशन की एक छोटी जगह से किसी तरह बाहर निकला और मदद के लिए दौड़ा.
अरूप और उनकी पत्नी अंदर ही फंसे रहे और मदद के लिए चिल्लाते रहे. आरोप है कि अस्पताल कर्मियों को वहां पहुंचने और दरवाजा खोलने में काफी समय लग गया. जब तक उन्हें बाहर निकाला गया, अरूप बेहोश हो चुके थे और डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
ताला पुलिस स्टेशन ने इस मामले में 'अप्राकृतिक मौत' का केस दर्ज किया है. शुरुआती जांच में तमाम कमियां सामने आई हैं. सबसे पहली यह कि ड्यूटी पर कोई ऑपरेटर मौजूद नहीं था.
इसके अलावा, लिफ्ट के अंदर इमरजेंसी अलार्म या बातचीत का कोई साधन काम नहीं कर रहा था. वहीं, लोक निर्माण विभाग (PWD) की टीम लिफ्ट के इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल सिस्टम की जांच कर रही है कि आखिर लिफ्ट ने तय स्टॉप्स को क्यों छोड़ा?
यह भी पढ़ें: स्ट्रेचर नहीं मिला तो बीमार पिता को कंधे पर लादकर भटकता रहा बेटा, लिफ्ट भी थी खराब
पुलिस फिलहाल अस्पताल के लिफ्ट ऑपरेटरों और सुबह की शिफ्ट के कर्मचारियों से पूछताछ कर रही है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा कि मौत लिफ्ट के झटके से लगी चोटों के कारण हुई या दम घुटने से हुई.