उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के 2.0 कार्यकाल के तीसरे मंत्रिमंडल विस्तार को एक हफ्ता पूरा हो चुका है, लेकिन नए मंत्रियों के विभागों का अब तक कोई अता-पता नहीं है. शपथ ले चुके माननीय मंत्री फिलहाल सिर्फ अपने खाली चैंबरों, सरकारी बंगलों और चमचमाती सरकारी गाड़ियों तक ही सीमित हैं और उनके विभागों का अब तक कोई अता पता नहीं है.
उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात के तुरंत बाद विभागों का बंटवारा हो जाएगा, लेकिन हकीकत यह है कि दिल्ली और लखनऊ के बीच विभागों को लेकर 'डेडलॉक' (गतिरोध) के हालात बन गए हैं.
माना जा रहा है PWD यानी पथ निर्माण विभाग, नगर विकास, स्वास्थ्य और सूचना जैसे विभागों को लेकर दिल्ली और लखनऊ में ठनी हुई है, लेकिन अभी तक विभाग बंटवारे का कोई फार्मूला नहीं निकल पा रहा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी कुछ मंत्रालयों को लेकर अड़े हुए हैं.
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सिर्फ विभागों की बात नहीं बल्कि डिप्टी सीएम के विभागों को बदलने को लेकर भी पेंच फंसा हुआ है. सूत्रों की माने तो डिप्टी सीएम केशव मौर्य और ब्रजेश पाठक के विभाग बदलने और बड़ा विभाग सौंपने साथ ही भूपेंद्र चौधरी को भी बड़ा विभाग देने को लेकर पूरा पेंच फंस गया है.
सूत्रों की मानें तो बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने अपनी इच्छा से सीएम को अवगत करा दिया है अब फैसला मुख्यमंत्री को लेना है. सीएम योगी भी लखनऊ के बजाए गोरखपुर में है और माना जा रहा है रविवार शाम या सोमवार को हो सीएम इस पर कोई फैसला लेंगे.
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उधर अखिलेश यादव अब हर दिन मंत्रिमंडल में विभागों के बंटवारे की देरी पर लेकर चुटकी ले रहे हैं.विभाग बंटवारे में हो रही देरी पर अखिलेश यादव ने इसे डबल इंजन के डब्बों का टकराव करार दिया है और तंज कसते हुए कहा है कि दिल्ली की पर्ची अभी आई नहीं है तो मंत्री इंतजार करें. बरहाल पहले मंत्रिमंडल विस्तार में देरी हुई और अब विभागों के बटवारे में देरी ने लखनऊ और दिल्ली के टकराव को एक बार फिर उजागर कर दिया है.