कानपुर में लैंबॉर्गिनी कार हादसे के बाद आरोपी शिवम मिश्रा के कारोबारी पिता के.के. मिश्रा और उनके वकील ने दावा किया कि गाड़ी ड्राइवर मोहन चला रहा था. पुलिस का कहना है कि स्टीयरिंग पर शिवम ही थे, जबकि बचाव पक्ष ने ड्राइवर मोहन का कोर्ट में एफिडेविट पेश किया. हालांकि, सामने आए नए वीडियो में हादसे के तुरंत बाद ड्राइविंग सीट पर शिवम मिश्रा अकेले फंसे दिख रहे हैं और कार में कोई ड्राइवर मौजूद नहीं है. इसी विरोधाभास ने पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया है.
कैमरे में कैद हुई हकीकत
हादसे के तुरंत बाद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जो शिवम के पिता और वकील के आधिकारिक बयानों की पोल खोलता नजर आ रहा है. इस वीडियो में साफ दिख रहा है कि ड्राइविंग सीट पर शिवम मिश्रा ही बैठे हैं और बाउंसर उन्हें बाहर निकाल रहे हैं.
मौके पर मौजूद बाउंसर वॉकी-टॉकी पर पुलिस से बात करते और भीड़ को हटाते हुए भी देखे जा रहे हैं. वीडियो साक्ष्य चीख-चीख कर कह रहे हैं कि दुर्घटना के वक्त कार के अंदर कोई तीसरा व्यक्ति यानी ड्राइवर मौजूद नहीं था.
ड्राइवर मोहन का चौंकाने वाला बयान
दूसरी ओर, कथित ड्राइवर मोहन ने 'आजतक' से बातचीत में दावा किया कि वह दिल्ली से गाड़ी ठीक करने आया था और टेस्ट ड्राइव ले रहा था. मोहन के मुताबिक, बगल की सीट पर बैठे शिवम को अचानक मूर्छा (बेहोशी) आई और वे उसके ऊपर गिर गए, जिससे संतुलन बिगड़ा और टक्कर हो गई. जब उससे वीडियो में शिवम के ड्राइविंग सीट पर होने का सवाल पूछा गया, तो उसने कहा कि वह नीचे से निकल गया था. सोमवार को सरेंडर न करने के बाद मोहन आज अपने वकील के साथ कोर्ट पहुंचा है.
कोर्ट की कार्यवाही और मेडिकल इमरजेंसी
इस बीच, शिवम मिश्रा के वकील ने कोर्ट में आवेदन दाखिल कर लैंबॉर्गिनी कार को रिलीज करने की मांग की है. साथ ही, पुलिस रिपोर्ट पर संज्ञान लेने की अपील की गई है. शिवम के पिता का कहना है कि उनके बेटे को मेडिकल इमरजेंसी के कारण इलाज के लिए दिल्ली भेजा गया है. फिलहाल कोर्ट इस मामले में पुलिस की रिपोर्ट और पेश किए गए विरोधाभासी सबूतों के आधार पर सुनवाई कर रही है. वकील और ड्राइवर के बयानों को लेकर अब कानूनी शिकंजा कसता नजर आ रहा है.