संगम की रेती पर लगे माघ मेले में हर कदम पर आस्था दिखाई देती है. कहीं भजन-कीर्तन की गूंज है, कहीं कल्पवासी तपस्या में लीन हैं तो कहीं साधु-संत अपनी अनोखी साधना और वेशभूषा के कारण चर्चा का केंद्र बने हुए हैं. इसी भीड़ और आध्यात्मिक माहौल के बीच एक ऐसा चेहरा है, जिसे देख श्रद्धालु देखते ही रह जाते हैं, मोबाइल निकाल लेते हैं और सेल्फी लेना चाहते हैं.
सोने की चमक से सिर से पांव तक लदे, चांदी के मुकुट में सजे ये बाबा हैं- गूगल गोल्डन बाबा, जिनका असली नाम मनोज आनंद महाराज है. करीब 5 करोड़ रुपये से ज्यादा का सोना शरीर पर धारण करने वाले ये बाबा इस वक्त एक और वजह से चर्चा में हैं. इतना सोना पहनने के बावजूद वे नंगे पांव चलते हैं.
माघ मेले में गूगल गोल्डन बाबा का शिविर दूर से ही पहचाना जा सकता है. जैसे ही बाबा अपने डेरे से बाहर निकलते हैं, भीड़ जमा हो जाती है. कोई सेल्फी लेना चाहता है, कोई उनके आभूषणों को नजदीक से देखना चाहता है तो कोई बस हैरानी से उन्हें निहारता रह जाता है.

बाबा के दोनों हाथों में भारी-भरकम सोने के कंगन, मोटी-मोटी चैनें, पांचों उंगलियों में सोने की अंगूठियां- हर अंगूठी में अलग-अलग देवी-देवताओं की आकृतियां जड़ी हुई हैं. गले में सोने और चांदी का शंख, रुद्राक्ष की मालाएं, जिनमें भी सोने की जड़ाई की गई है. सिर पर चांदी का मुकुट है, जिस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर लगी हुई है.
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इतना ही नहीं, बाबा चांदी के बर्तन में भोजन करते हैं और चांदी के गिलास में पानी पीते हैं. उनके पास लड्डू गोपाल की सोने की मूर्ति है. बाबा कहते हैं, यह परमात्मा ही मेरे असली रक्षक हैं.

गूगल गोल्डन बाबा बताते हैं कि कुछ साल पहले तक वे चांदी के जूते पहनते थे. ये जूते उन्होंने आगरा से बनवाए थे. उस वक्त चांदी का भाव करीब 40 हजार रुपये किलो था और उनके जूते की कीमत करीब डेढ़ से दो लाख रुपये बैठती थी. जूते चांदी के थे, शौक से पहनते थे.
बाबा मुस्कराते हुए कहते हैं कि एक संकल्प लिया और जूते त्याग दिए. जब संकल्प पूरा होगा तो हम फिर से करीब साढ़े चार किलो चांदी के जूते धारण करेंगे. कड़ाके की ठंड हो या तपती रेत, बाबा नंगे पांव ही चलते हैं. उनके पैरों में न कोई जूता है, न चप्पल.

यूपी के सभी जिले और 28 राज्यों की यात्रा
गूगल गोल्डन बाबा उत्तर प्रदेश के सभी जिलों की यात्रा पर निकले. इसके साथ ही 28 राज्यों में परिक्रमा का संकल्प भी लिया. उत्तराखंड से शुरू हुई उनकी यह यात्रा पिछले दो साल से लगातार जारी है. बाबा कहते हैं, ये सिर्फ यात्रा नहीं, तपस्या है.

मनोज आनंद महाराज मूल रूप से कानपुर के रहने वाले हैं. वे करौली वाले बाबा के भक्त हैं और पिछले करीब 20 वर्षों से सोना धारण कर रहे हैं. बाबा बताते हैं कि शुरुआत में सिर्फ एक सोने की चैन थी. फिर शौक में सोना धारण करने लगे. किसी को पतंग उड़ाने का शौक होता है, किसी को माउंट एवरेस्ट चढ़ने का, और हमें सोना पहनने का. धीरे-धीरे ये शौक पहचान बन गया.
सोना पहनने को लेकर बाबा कहते हैं कि मैं क्षत्रिय हूं, हमारे पूर्वज सोना पहनते थे. द्वापर, त्रेता, कलियुग... हर युग में राजा और क्षत्रिय सोना धारण करते आए हैं. सोना शौर्य, पराक्रम और समृद्धि का प्रतीक है. इसमें कोई घमंड नहीं है. बाबा का कहना है कि वे सोना सिर्फ शौक के कारण पहनते हैं, न कि दिखावे के लिए.

बाबा बताते हैं कि उन पर चार बार हमले हो चुके हैं. हर बार हमला करने वाले तुरंत पकड़ लिए गए. जिसने किया, वो जेल की सलाखों के पीछे गया. हमें डर नहीं लगता. जिसके साथ गिरधारी हो, उसे किसकी चिंता. एक बार धमकी मिलने पर बाबा ने पूरे कानपुर में होर्डिंग लगवा दिए थे कि आओ, धमकी का परिणाम देख लो.
चांदी-सोने के बर्तन में खाने पर बाबा कहते हैं कि ये सब भाग्य का फल है. प्रभु जिसे जो देना चाहता है, दे देता है. बाबा साधना करते हैं... पूजा, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठान रोजाना होते हैं. उनके शिविर के बाहर हर वक्त लोगों की भीड़ लगी रहती है.