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अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात पर क्या बोले CBI के पूर्व डायरेक्टर एम नागेश्वर राव?

माघ मेला में शंकराचार्य के साथ हुई घटना पर 'हिंदुओं का समान अधिकार आंदोलन' के नेता एम नागेश्वर राव ने मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने सरकारी जांच न होने पर खुद साक्ष्य जुटाने शुरू किए हैं. राव का कहना है कि यह रिपोर्ट हिंदू समाज की होगी और दोषी चाहे कोई भी हो, सच जनता के सामने रखा जाएगा.

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अविमुक्तेश्वरानंद के साथ सीबीआई के पूर्व डायरेक्टर एम नागेश्वर राव (Photo- ITG)
अविमुक्तेश्वरानंद के साथ सीबीआई के पूर्व डायरेक्टर एम नागेश्वर राव (Photo- ITG)

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर दर्ज हुआ पॉक्सो एक्ट का मुकदमा चर्चा में है. मुकदमे की जांच प्रयागराज पुलिस कर रही है, लेकिन पॉक्सो के इस केस का कनेक्शन प्रयागराज के माघ मेला में मौनी अमावस्या स्नान से भी है, जहां से प्रशासन और अविमुक्तेश्वरानंद के बीच टकराव शुरू हुआ और इसी दिन शिकायतकर्ता ने पीड़ितों (बटुकों) की मुलाकात होना भी बताया है.

ऐसे में मौनी अमावस्या यानी 18 जनवरी को क्या हुआ था, अब इसकी जांच की जा रही है. यह जांच कोई और नहीं बल्कि सीबीआई के पूर्व डायरेक्टर एम नागेश्वर राव और उनकी टीम कर रही है.

एम नागेश्वर राव और उनकी टीम मौनी अमावस्या पर प्रयागराज में हुए विवाद की जांच के लिए बीते कई दिनों से वाराणसी में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके लोगों से बातचीत कर रही है. आइये जानते हैं 'आज तक' से उन्होंने क्या-कुछ कहा....

पूर्व आईपीएस अधिकारी एम नागेश्वर राव ने प्रयागराज माघ मेला में शंकराचार्य के कथित अपमान के मामले में अपनी निजी 'फैक्ट फाइंडिंग' जांच शुरू कर दी है. हिंदू समाज को संवैधानिक समान अधिकार दिलाने के लिए संघर्षरत राव ने 'आजतक' से बातचीत में बताया कि सरकार द्वारा ज्यूडिशियल इंक्वारी न कराए जाने के कारण वे स्वयं साक्ष्य और बयान दर्ज कर रहे हैं. उन्होंने घटना के दिन मौजूद लोगों के बयान रिकॉर्ड करने के साथ ही पुलिस और प्रशासन से भी संपर्क साधा है. इस जांच का उद्देश्य घटना के पीछे के असल तथ्यों और दोषों को उजागर कर हिंदू समाज के सामने एक निष्पक्ष रिपोर्ट पेश करना है.

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धार्मिक आयोजन में धर्माचार्य ही सर्वोच्च

एम नागेश्वर राव ने स्पष्ट कहा कि किसी भी धार्मिक कार्यक्रम में धर्माचार्यों को ही प्रमुखता मिलनी चाहिए, न कि राजनेताओं को. उन्होंने तर्क दिया कि माघ मेला हिंदू समाज का है, किसी सरकार या अन्य धर्म का नहीं. पुलिस का काम केवल सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण है, वह किसी धर्माचार्य को धार्मिक कार्य करने से नहीं रोक सकती. राव के अनुसार, शंकराचार्य हिंदुओं के सर्वोच्च गुरु हैं और उनकी प्रमाणिकता पर सवाल उठाना सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता.

मंदिरों पर सरकारी कब्जे और भेदभाव का मुद्दा

राव ने संविधान के अनुच्छेद 25 से 30 में संशोधन की मांग दोहराते हुए कहा कि देश में केवल हिंदू मंदिरों पर सरकार का कब्जा है, जबकि मस्जिद और चर्च स्वतंत्र हैं. उन्होंने सभी राजनीतिक दलों पर निशाना साधते हुए इसे भेदभावपूर्ण बताया. फिलहाल, उनकी टीम साक्ष्यों के आधार पर एक टेक्स्ट रिपोर्ट तैयार कर रही है. यदि प्रशासन सहयोग करता है, तो वे 15 दिनों में यह रिपोर्ट वेबसाइट के माध्यम से सार्वजनिक कर देंगे, ताकि दुनिया सच जान सके.

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